चीनी आधारित एथेनॉल खरीद पर केंद्र की रोक, 1 नवंबर से नया आपूर्ति वर्ष प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को सरकारी ईंधन कंपनियों को चीनी, गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथेनॉल की खरीद रोकने का निर्देश दिया है। यह निर्णय 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए एथेनॉल आपूर्ति वर्ष से लागू होगा और इसका मुख्य उद्देश्य चीनी की घरेलू कीमतों को स्थिर रखना है, क्योंकि कमज़ोर मानसून के कारण इस वर्ष गन्ने की फसल प्रभावित हुई है।
टेंडर में क्या बदला
सरकारी तेल रिफाइनिंग कंपनियों — इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड — ने संयुक्त रूप से नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद का टेंडर जारी किया है। टेंडर दस्तावेज़ में स्पष्ट उल्लेख है कि 'इस मात्रा-आधारित टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल के लिए कोई प्रस्ताव नहीं माँगा गया है।'
नए टेंडर के तहत आपूर्तिकर्ता केवल सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं।
मानसून और उत्पादन संकट
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक भारत इस वर्ष पिछले साल की तुलना में कम उत्पादन की स्थिति का सामना कर रहा है। अल नीनो के प्रभाव के कारण एक दशक से अधिक समय में सबसे कमज़ोर मानसून दर्ज किया गया, जिसने गन्ने की फसल को प्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुँचाया। आंकड़ों के अनुसार, गन्ने की उपलब्धता में कमी का सीधा असर एथेनॉल उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए गन्ने और अनाज से एथेनॉल उत्पादन लगातार बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि चीनी की घरेलू आपूर्ति और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के बीच यह टकराव नया नहीं है — सरकार इससे पहले भी इसी तरह के हस्तक्षेप कर चुकी है।
चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की छूट
सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को नियमित मासिक रिलीज़ कोटे के अतिरिक्त अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान बेचने की अनुमति भी दी है। सरकारी आदेश के अनुसार, यदि कोई चीनी मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस पूरी मात्रा को इन दोनों महीनों में बेच सकती है — यह बिक्री नियमित आवंटित कोटे के ऊपर होगी।
यह छूट घरेलू बाज़ार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पर असर
भारत सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण हासिल करना है, जिसे 'E20' कार्यक्रम के नाम से जाना जाता है। चीनी-आधारित एथेनॉल की खरीद पर रोक से इस लक्ष्य की प्रगति कुछ धीमी हो सकती है, हालाँकि अनाज-आधारित एथेनॉल की आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिश जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनाज-आधारित स्रोतों की सीमित क्षमता को देखते हुए 1,100 करोड़ लीटर के लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति और नई गन्ना फसल के उत्पादन के आंकड़े यह तय करेंगे कि सरकार अगले वर्ष इस नीति को जारी रखेगी या चीनी-आधारित एथेनॉल की खरीद फिर से शुरू करेगी।