क्या जीएसटी सुधारों ने खपत में 15 प्रतिशत की वृद्धि की है?
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नई दिल्ली, 1 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। देश में जीएसटी सुधारों का प्रभाव खपत पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। सितंबर-अक्टूबर अवधि में जीएसटी के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं की आपूर्ति का कर योग्य मूल्य 15 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 8.6 प्रतिशत था। यह जानकारी सरकारी स्रोतों के हवाले से सोमवार को दी गई।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि वस्तुओं की आपूर्ति का कर योग्य मूल्य में वृद्धि दर्शाती है कि जीएसटी दरों में कमी से खपत में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
सरकार ने जीएसटी के फायदों को लोगों तक पहुंचाने के लिए बचत उत्सव की शुरुआत की थी, जिसने खपत को बढ़ाने में सहायता की है।
सूत्रों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि देखी गई है, उनमें एफएमसीजी, फार्मा, खाद्य उत्पाद, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण और वस्त्र शामिल हैं।
इन क्षेत्रों की मजबूती यह दर्शाती है कि जीएसटी में कमी से ग्राहक खर्च में वृद्धि हुई है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह वृद्धि मूल्य के संदर्भ में है; चूंकि जीएसटी दरें कम थीं, इसलिए मात्रा में वृद्धि और भी अधिक होगी। यह संकेत करता है कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों ने बड़े स्तर पर उपभोग को बढ़ाने में मदद की है। साथ ही, उद्योग ने जीएसटी के लाभ को अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाया है।
सूत्रों के अनुसार, समीक्षा अवधि के जीडीपी निजी उपभोग के आंकड़े काफी समय बाद जारी किए जाएंगे। इस कारण जीएसटी कर योग्य मूल्य उपभोग के लिए सबसे विश्वसनीय रियल टाइम प्रॉक्सी के रूप में कार्य करता है और वर्तमान संख्या स्पष्ट रूप से निरंतर मांग विस्तार का संकेत देती है।
सितंबर में लागू हुए जीएसटी सुधारों के तहत सरकार ने स्लैब की संख्या को चार - 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत से घटाकर दो - 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर दिया था। साथ ही, लग्जरी और सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत का टैक्स लगाया गया है। इसके अलावा, सरकार ने कई चीजों पर सेस को घटाकर शून्य कर दिया था।