क्या सरकारी कंपनी भारत कोकिंग कोल का आईपीओ 30 मिनट में फुल सब्सक्राइब हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- भारत कोकिंग कोल का आईपीओ 30 मिनट में सब्सक्राइब हुआ।
- 1,071 करोड़ रुपये का ऑफर।
- ग्रे मार्केट प्रीमियम 9.4 रुपये।
- आईपीओ 13 जनवरी तक खुला रहेगा।
- बीसीसीएल भारत में कोकिंग कोल का सबसे बड़ा उत्पादक है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की सबसे प्रमुख कोल प्रोडक्शन कंपनी कोल इंडिया की सहायक कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) का आईपीओ शुक्रवार को निवेशकों के लिए खुल गया। यह आईपीओ केवल 30 मिनट के अंदर ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया।
बीसीसीएल का यह आईपीओ वर्ष 2026 का पहला प्रमुख बोर्ड आईपीओ है, जिसमें 1,071 करोड़ रुपए का ऑफर है। यह आईपीओ 13 जनवरी तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।
ग्रे मार्केट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस आईपीओ का अंतिम जीएमपी (ग्रे मार्केट प्रीमियम) 9.4 रुपये है (दोपहर 1:53 बजे तक)। जबकि इसका उच्चतम जीएमपी 16.25 रुपये है। इसका मतलब है कि कंपनी के शेयर करीब 32.4 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकते हैं, जिससे निवेशकों को हर शेयर पर लगभग 40.87 प्रतिशत का मुनाफा होने की संभावना है।
शुक्रवार की सुबह इस आईपीओ को 34.69 करोड़ शेयरों के मुकाबले 38.9 करोड़ शेयरों के लिए बोलियों के साथ 1.12 गुना अधिक सब्सक्राइब किया गया, जिसमें गैर-संस्थागत निवेशकों ने 1.99 गुना और खुदरा निवेशकों ने 1.5 गुना सब्सक्राइब किया।
यह आईपीओ पूरी तरह से कोल इंडिया द्वारा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है, जिसके पास बीसीसीएल की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है। आईपीओ का प्राइस बैंड 21-23 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, ताकि कंपनी 1,071 करोड़ रुपये जुटा सके।
आईपीओ से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से 273 करोड़ रुपये जुटाए, जिन्हें 23 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 11,87,53,500 शेयर प्रदान किए गए। इस आईपीओ में 50 प्रतिशत हिस्सा बड़े संस्थ institucional निवेशकों के लिए, 35 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए और 15 प्रतिशत रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईपीओ में लिस्टिंग के समय अच्छा मुनाफा मिल सकता है, क्योंकि कंपनी की बाजार में स्थिति मजबूत है। यह भारत में कोकिंग कोयले की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है और वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में इसका 58.50 प्रतिशत हिस्सा रहा।
बीसीसीएल की स्थापना 1972 में हुई थी और इसे मिनी रत्न का दर्जा मिला हुआ है। भारत में इसकी कोई सीधी तुलना वाली लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए इसकी तुलना अल्फा मेटालर्जिकल रिसोर्सेज और वॉरियर मेट कोल जैसी कुछ विदेशी कोयला कंपनियों से की जाती है।