केंद्र सरकार ने डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर ऑफशोर ब्लॉक पर घटाई तेल-गैस रॉयल्टी, नया ढांचा लागू

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केंद्र सरकार ने डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर ऑफशोर ब्लॉक पर घटाई तेल-गैस रॉयल्टी, नया ढांचा लागू

सारांश

केंद्र सरकार ने डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर ऑफशोर ब्लॉक पर रॉयल्टी में भारी कटौती की है — अल्ट्रा-डीपवाटर पर पहले सात साल शून्य रॉयल्टी। पश्चिम एशिया संकट के बीच यह कदम घरेलू तेल अन्वेषण को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

डीपवाटर क्षेत्रों पर पहले 7 वर्षों के लिए रॉयल्टी 5% , आठवें वर्ष से 10% निर्धारित।
अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों पर पहले 7 वर्षों तक शून्य रॉयल्टी , आठवें वर्ष से 5% ।
संशोधित ढांचे में NELP , HELP और DSF नीतियों के तहत आवंटित ब्लॉक शामिल।
स्थलीय और उथले जल क्षेत्रों में अधिकांश श्रेणियों पर रॉयल्टी 12.5% पर यथावत।
यह कदम पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता की पृष्ठभूमि में उठाया गया।

केंद्र सरकार ने 12 मई 2026 को डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर ऑफशोर ब्लॉक से कच्चे तेल और केसिंग हेड कंडेनसेट उत्पादन पर रॉयल्टी दरों में उल्लेखनीय कटौती की घोषणा की। सरकार की ओर से जारी नए नोटिफिकेशन में यह संशोधित रॉयल्टी ढांचा तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल एवं गैस अन्वेषण को प्रोत्साहित करना है।

नया रॉयल्टी ढांचा: मुख्य प्रावधान

संशोधित ढांचे के अंतर्गत डीपवाटर क्षेत्रों में कॉमर्शियल उत्पादन शुरू होने के पहले सात वर्षों तक रॉयल्टी दर 5 प्रतिशत निर्धारित की गई है। आठवें वर्ष से यह दर बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाएगी।

अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों के लिए यह राहत और अधिक उदार है — कॉमर्शियल उत्पादन के पहले सात वर्षों तक कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। आठवें वर्ष के बाद उत्पादन जारी रखने पर 5 प्रतिशत रॉयल्टी देय होगी।

कौन-से क्षेत्र और नीतियाँ शामिल हैं

संशोधित रॉयल्टी अनुसूची में विभिन्न नीतिगत व्यवस्थाओं के तहत आवंटित ब्लॉक शामिल किए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय तेल कंपनियों को नामांकन-आधारित आवंटन, नई अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (NELP) से पूर्व आवंटित ब्लॉक, तथा हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (HELP) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) नीति के तहत आवंटित क्षेत्र शामिल हैं।

स्थलीय और उथले जल क्षेत्रों के लिए अधिकांश श्रेणियों में रॉयल्टी दर 12.5 प्रतिशत पर यथावत बनी हुई है। सरकार ने कुछ निर्दिष्ट श्रेणियों के लिए 7.5 प्रतिशत की रॉयल्टी दर भी बरकरार रखी है।

वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में बढ़ती अस्थिरता के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएँ दबाव का सामना कर रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के पास पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और घरेलू खाना पकाने के लिए एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है।

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करने हेतु अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते पर ईरान की प्रतिक्रिया पर असंतोष जताया था और तेहरान के रुख को

संपादकीय दृष्टिकोण

अल्ट्रा-डीपवाटर पर सात साल की शून्य रॉयल्टी निश्चित रूप से आकर्षक है, असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह ढांचा अनुबंध स्थिरता और पर्यावरणीय मंज़ूरी की जटिलताओं को भी संबोधित करता है। गौरतलब है कि भारत अपनी तेल ज़रूरतों का लगभग 85% आयात करता है — और घरेलू उत्पादन बढ़ाए बिना यह निर्भरता कम नहीं होगी। पश्चिम एशिया संकट ने इस नीतिगत ज़रूरत को और अधिक तात्कालिक बना दिया है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने डीपवाटर ब्लॉक पर रॉयल्टी क्यों घटाई?
सरकार ने गहरे समुद्री तेल एवं गैस अन्वेषण में निवेश आकर्षित करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। पश्चिम एशिया संकट के बीच आयात निर्भरता घटाना भी इस निर्णय की प्रमुख वजह बताई जा रही है।
डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों पर नई रॉयल्टी दरें क्या हैं?
डीपवाटर क्षेत्रों पर पहले 7 वर्षों तक 5% और आठवें वर्ष से 10% रॉयल्टी देय होगी। अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों पर पहले 7 वर्षों तक कोई रॉयल्टी नहीं, और आठवें वर्ष के बाद 5% रॉयल्टी लागू होगी।
स्थलीय और उथले जल क्षेत्रों पर रॉयल्टी दरों में क्या बदलाव हुआ?
स्थलीय और उथले जल क्षेत्रों के लिए अधिकांश श्रेणियों में रॉयल्टी दर 12.5% पर यथावत बनी हुई है। कुछ निर्दिष्ट श्रेणियों के लिए 7.5% की दर भी बरकरार रखी गई है।
संशोधित रॉयल्टी ढांचे में कौन-सी नीतियों के ब्लॉक शामिल हैं?
इसमें राष्ट्रीय तेल कंपनियों को नामांकन-आधारित आवंटन, NELP से पूर्व के ब्लॉक, HELP और DSF नीति के तहत आवंटित क्षेत्र शामिल हैं। यह ढांचा व्यापक रूप से सभी प्रमुख लाइसेंसिंग व्यवस्थाओं को कवर करता है।
यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा संकट के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता के बीच भारत के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक रूप से ज़रूरी हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही नागरिकों से ईंधन खपत घटाने और गैर-ज़रूरी सोने की खरीद से बचने की अपील कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस