क्या भारत वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र का बड़ा खिलाड़ी बन गया है?

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क्या भारत वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र का बड़ा खिलाड़ी बन गया है?

सारांश

भारत ने वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में सीफूड निर्यात का मूल्य दोगुना हो गया है। जानिए इस क्षेत्र में भारत की नई उपलब्धियों के बारे में।

Key Takeaways

  • भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
  • सीफूड निर्यात में पिछले 10 वर्षों में दोगुना वृद्धि।
  • राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क लागू किया जा रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग के अवसर।
  • सीफूड पोषण और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा है कि भारत अब विश्व के प्रमुख मत्स्य पालन और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) देशों में शुमार हो गया है। मजबूत सरकारी नीतियों, बेहतर प्रोसेसिंग क्षमता, और मजबूत लॉजिस्टिक व्यवस्था के चलते पिछले 10 वर्षों में भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य दोगुना हो चुका है।

मंत्री ने बताया कि भारत राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क (2025), विशेष आर्थिक क्षेत्र नियम (2025), और अपडेटेड हाई सी फिशिंग गाइडलाइंस (2025) के माध्यम से नियमों के पालन और पारदर्शिता को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ और निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा देना है, विशेषकर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह में।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में आधुनिक एक्वाकल्चर और मैरीकल्चर तकनीक, प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, मछली पकड़ने वाले जहाजों की डिजाइन, डिजिटल निगरानी, संयुक्त अनुसंधान, तकनीक हस्तांतरण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन, व्यापार विस्तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए कई सहयोग के अवसर उपलब्ध हैं।

मंत्री ने यह बात एक सम्मेलन में साझा की, जिसमें 40 देशों के राजनयिकों ने भाग लिया, जिनमें राजदूत, उच्चायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

इस कार्यक्रम में भारत और अन्य देशों के बीच मत्स्य पालन और सीफूड क्षेत्र में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को उजागर किया गया।

सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और महासागर का स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, जिम्मेदार मत्स्य पालन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, हरित नवाचार, क्षमता निर्माण, आपूर्ति शृंखला का विकास और सजावटी मछली पालन तथा समुद्री शैवाल की खेती जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताए गए।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज राज्य मंत्री प्रोफेसर एस. पी. सिंह बघेल ने बताया कि सीफूड पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाता है, बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न करता है और देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है।

उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन विभाग उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी वैल्यू-चेन पर आधारित रणनीति अपना रहा है, ताकि इस क्षेत्र का टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके।

केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भारत में एक्वाकल्चर के तेज विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य सीफूड निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।

कुरियन ने कहा कि पिछले सात महीनों में निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र की मजबूत प्रगति को दर्शाती है।

Point of View

बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने मत्स्य पालन में क्या उपलब्धियां हासिल की हैं?
भारत ने पिछले 10 वर्षों में सीफूड निर्यात में 100% की वृद्धि की है, और यह वैश्विक मत्स्य पालन में प्रमुख स्थान प्राप्त कर चुका है।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह का क्या कहना है?
उन्होंने कहा है कि भारत अब दुनिया के प्रमुख मत्स्य पालन और जलीय कृषि देशों में शामिल हो गया है।
भारत का सीफूड निर्यात मूल्य में कितनी वृद्धि हुई है?
भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य पिछले 10 वर्षों में दोगुना हो गया है।
भारत की मत्स्य पालन नीति में क्या बदलाव आए हैं?
भारत ने राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क और विशेष आर्थिक क्षेत्र नियमों के माध्यम से नियमों के पालन को मजबूत किया है।
एक्वाकल्चर में भारत का लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य सीफूड निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
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