क्या सोने-चांदी की कीमतें गिर रही हैं, वैश्विक तनाव में कमी के कारण?
सारांश
Key Takeaways
- सोने और चांदी की कीमतें गिर रही हैं।
- यूरोप पर टैरिफ लगाने की आशंका में कमी आई है।
- डॉलर में मजबूती से कीमती धातुओं पर दबाव।
- लंबी अवधि में सोने की तेजी बनी रह सकती है।
- निवेशकों को बाजार की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
मुंबई, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूरोप पर टैरिफ लगाने की आशंका में कमी आने के चलते, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे ये दोनों कीमती धातुएं हाल ही में बने रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे आ गईं।
ग्रीनलैंड से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव में कमी और निवेशकों की सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में आई कमी के कारण यह स्थिति बनी। इसके साथ ही, डॉलर में मजबूती भी सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना रही है।
तीन कारोबारी सत्रों के बाद, गुरुवार को सोने की कीमत में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि चांदी भी अपने ऑल-टाइम हाई से नीचे आ गई।
बुधवार को एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी वायदा 1,58,475 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जबकि सिल्वर मार्च वायदा 3,35,521 रुपए प्रति किलोग्राम के अपने ऑल-टाइम हाई तक पहुंची थी।
खबर लिखे जाने तक (दोपहर 12 बजे के आस-पास) मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,022 रुपए या 0.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,51,840 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 1,992 रुपए या 0.63 प्रतिशत घटकर 3,16,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने के दाम में गिरावट आई है। अमेरिकी बाजार में सोना 4,790 से 4,800 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे पहले इस हफ्ते सोना 4,887 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट स्वाभाविक मुनाफावसूली का परिणाम है, हालांकि लंबे समय में सोने की तेजी बनी हुई है।
फ्यूचर बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि खुले सौदों की संख्या में कमी आई है, जो दर्शाता है कि कुछ निवेशक अपनी पुरानी खरीदारी से बाहर निकल रहे हैं और नई खरीदारी अभी ज्यादा नहीं हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी मजबूत बनी हुई है और 92 से 93 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार कर रही है। हाल ही में चांदी ने 95.80 डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण चांदी को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, सुरक्षित निवेश के रूप में इसकी मांग भी बनी हुई है।
अमेरिकी डॉलर स्थिर नजर आया है, क्योंकि ट्रंप ने साफ किया है कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इससे डॉलर इंडेक्स बढ़कर 98.81 पर पहुंच गया, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए सोना थोड़ा महंगा हो गया।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि नाटो प्रमुख के साथ इस मुद्दे पर भविष्य की रूपरेखा तय की गई है।
निवेशकों की नजर अब अमेरिका के महंगाई और बेरोजगारी के आंकड़ों पर टिकी है, जो आगे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
अधिकांश बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जनवरी के अंत में होने वाली बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, हालांकि साल के अंत तक दो बार ब्याज दरें घटने की उम्मीद जताई जा रही है।