क्या ग्रीनलैंड में तनाव कम होने से बाजार को राहत मिलेगी और रुपए में सुधार होगा?
सारांश
Key Takeaways
- ग्रीनलैंड में तनाव कम होने से बाजार में सुधार हो सकता है।
- रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 91.50 पर पहुंचा।
- डीबीएस बैंक की रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत मिले हैं।
- आर्थिक विकास की दर 8 प्रतिशत है।
- विदेशी पूंजी प्रवाह की चिंता बनी हुई है।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ग्रीनलैंड से जुड़े वैश्विक तनाव में कमी आने के संकेतों ने बाजार की भावना को एक नई दिशा दी है। डीबीएस बैंक द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे बाजार की धारणा में सुधार होगा और रुपये में कुछ उतार-चढ़ाव तो रहेगा, लेकिन इसकी गिरावट अब पहले की तरह तीव्र नहीं होगी।
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर से संभलते हुए 15 पैसे मजबूत होकर 91.50 पर पहुंच गया।
डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि पिछले साल से चले आ रहे नकारात्मक रुझानों को वैश्विक और घरेलू कारणों ने बढ़ावा दिया।
उन्होंने कहा, "वैश्विक वीआईएक्स में तीव्र वृद्धि बाजार के सभी संकेतकों की कमजोरी को दर्शाती है, जिसे प्रतिकूल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल से और बल मिला है। ऐसे में ग्रीनलैंड से जुड़े तनाव में कमी आने के संकेत बाजार के लिए राहत लेकर आए हैं।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता जल्द पूरा हो सकता है, जिसकी घोषणा अगले हफ्ते होने की उम्मीद है। इसके अलावा, विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिससे बाजार में दोबारा उम्मीद जगी है।
देश के अंदर की स्थिति की बात करें तो रुपये पर दबाव ऐसे समय में आया है, जब आर्थिक विकास मजबूत दिखाई दे रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में औसत आर्थिक वृद्धि दर 8 प्रतिशत रही है और आने वाले वित्त वर्ष के लिए इसका 7.5 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है।
कमजोर रुपया जहां ऊंचे आयात शुल्क से प्रभावित निर्यातकों को कुछ राहत देता है, वहीं इससे अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में असंतुलन भी पैदा हुआ है।
डीबीएस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, देश का चालू खाता घाटा अभी काबू में है और यह जीडीपी के करीब 1.0 से 1.2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। लेकिन, असली चिंता विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर है।
बैंक ने बताया कि वर्ष 2025 में शुद्ध पूंजी निकासी के बाद इस साल इक्विटी बाजारों से करीब 3 अरब डॉलर की निकासी हुई है, जबकि बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि कमजोर बनी हुई है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति पिछले साल से बेहतर जरूर है, लेकिन विदेशी कंपनियों द्वारा मुनाफा वापस ले जाने के कारण कुल निवेश के मुकाबले इसमें अभी भी अंतर बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले केंद्रीय बजट में सरकारी खर्च का असर स्पष्ट दिखाई देगा, क्योंकि वित्त वर्ष 2027 में केंद्र और राज्यों का कुल उधार बढ़ने की संभावना है।