भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल: विकासशील देशों के लिए एक नई प्रेरणा
सारांश
Key Takeaways
- डिजिटल भुगतान क्रांति ने भारत को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध किया है।
- सरकारी नीतियों का सकारात्मक प्रभाव है।
- यूपीआई ने आर्थिक लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाई है।
- डिजिटल पहचान प्रणाली ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है।
- सस्ते स्मार्टफोन्स ने डिजिटल भुगतान को सुगम बनाया है।
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एक नई अध्ययन रिपोर्ट बताती है कि भारत ने अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी फिनटेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) बदलावों में से एक को सफलतापूर्वक लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप देश वर्तमान में विश्व के सबसे विकसित डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में से एक बन गया है। यह मॉडल अब अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन रहा है।
अजरबैजान स्थित न्यूज डॉट एजेड की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत का यह मॉडल दर्शाता है कि कैसे सरकारी नीतियों, तकनीकी नवाचार, और व्यापक मोबाइल कनेक्टिविटी मिलकर एक प्रभावी भुगतान ढांचा तैयार कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति ने वैश्विक स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। अर्थशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञ इसे अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक सफल मॉडल के रूप में अध्ययन कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल पहचान प्रणाली, तेजी से बढ़ती मोबाइल कनेक्टिविटी, आधुनिक भुगतान प्लेटफार्म, और सरकार की सहायक नीतियों का संयोजन दुनिया के सबसे बड़े और कुशल डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में से एक का निर्माण करता है।
रिपोर्ट में सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा गया है कि वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले और लाखों लोगों को डिजिटल पहचान उपलब्ध कराने वाले सरकारी कार्यक्रमों ने इस व्यवस्था की मजबूत नींव रखी है।
साथ ही सस्ते स्मार्टफोन्स और तेजी से बढ़ती मोबाइल इंटरनेट सेवाओं ने डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (पीएम-वानी) कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक इंटरनेट सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है।
फरवरी २०२६ तक इस पहल के तहत ४,०९,१११ वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें २०७ पीडीओ एग्रीगेटर और ११३ ऐप प्रदाता समर्थन कर रहे हैं। इसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ती और तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
इन सभी विकासों ने बड़े स्तर पर डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक माहौल तैयार किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान को बैंकिंग और मोबाइल सेवाओं से जोड़ने से वित्तीय संस्थान उपयोगकर्ताओं की पहचान सुरक्षित तरीके से सत्यापित कर सकते हैं और लेनदेन को तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने नकद पर निर्भरता को कम करने में भी सहयोग दिया है, जिससे वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और आर्थिक लेनदेन अधिक कुशल हो गए हैं।
सरकार ने हाल ही में एक बयान में कहा कि जनवरी २०२६ के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के जरिए हर महीने लगभग २८.३३ लाख करोड़ रुपए के लेनदेन होते हैं। इस दौरान २१.७ अरब डिजिटल लेनदेन दर्ज किए गए, जो मोबाइल फोन के माध्यम से शून्य लागत पर रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान कर रहे हैं और शहरों से लेकर गांवों तक सभी आय वर्ग में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।