शांति बिल 2025: भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता के लिए एक नया मार्गदर्शन
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नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि के लिए शांति बिल 2025 एक महत्वपूर्ण कदम है। इस विधेयक से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
इंफोमेरिक्स रेटिंग्स ने इस बिल को भारतीय विद्युत क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम माना, क्योंकि यह न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता वृद्धि में लंबे समय से मौजूद रुकावटों को समाप्त करता है, विशेषकर देयता और भागीदारी से संबंधित मुद्दों को।
फर्म ने कहा कि न्यूक्लियर ऊर्जा का विस्तार धीरे-धीरे होने की संभावना है और वित्त वर्ष 203२ तक इसकी क्षमता लगभग २२ गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक पहुँच सकती है।
‘शांति बिल 2025’ परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 का स्थान लेता है, और इसके अंतर्गत एक संपूर्ण कानूनी ढांचा प्रस्तुत किया जाएगा जो विकास, सुरक्षा, और दायित्व को नियंत्रित करेगा।
इस विधेयक के तहत, केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत संस्थानों, कंपनियों, या व्यक्तियों को परमाणु संयंत्रों के निर्माण, संचालन, और ईंधन निर्माण की अनुमति दी गई है।
इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य रेटिंग अधिकारी रोहित इनामदार ने कहा, “इस विधेयक में श्रेणीवार संचालक देयता की सीमाएँ निर्धारित की गई हैं और आपूर्तिकर्ताओं के लिए कानूनी कार्रवाई को सीमित किया गया है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और भविष्य की परमाणु परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा।”
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि न्यूक्लियर ऊर्जा की क्षमता में वृद्धि टैरिफ प्रतिस्पर्धा और घरेलू विक्रेता पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर निर्भर करेगी।
फर्म ने यह भी उल्लेख किया कि दीर्घकालिक सरकारी समर्थित ईंधन आपूर्ति व्यवस्था और घरेलू ईंधन चक्र अवसंरचना का विकास महत्वपूर्ण रहेगा।