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नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम अगस्त में 10% बढ़कर ₹27,455 करोड़, हेल्थ सेगमेंट में 32.5% उछाल

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नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम अगस्त में 10% बढ़कर ₹27,455 करोड़, हेल्थ सेगमेंट में 32.5% उछाल

सारांश

भारत का नॉन-लाइफ इंश्योरेंस बाज़ार अगस्त में 10% उछला — लेकिन असली कहानी हेल्थ सेगमेंट की है, जिसने लगातार पाँचवें महीने 30% से ज़्यादा की बढ़त दर्ज की। ₹10,834 करोड़ का हेल्थ प्रीमियम और कुल प्रीमियम में 44% की हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि भारतीय उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मुख्य बातें

नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर ₹27,455 करोड़ हुआ।
हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम अगस्त में 18 प्रतिशत बढ़कर ₹10,834 करोड़ ; लगातार पाँचवें महीने 30%+ वृद्धि।
वित्त वर्ष 27 के अप्रैल-अगस्त में संचयी ग्रोथ पिछले साल के 6% से बढ़कर 9.6% हुई।
फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा आगे बढ़ाने से जुलाई में फसल प्रीमियम तीन गुना बढ़कर ₹3,274 करोड़ हुआ।
प्राइवेट इंश्योरर्स और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स का कुल प्रीमियम में हिस्सा अगस्त में 73.3 प्रतिशत — चालू वर्ष का सर्वोच्च।
सितंबर के दूसरे पखवाड़े से GST बेस के कारण रिटेल हेल्थ ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ने का अनुमान।

नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर ₹27,455 करोड़ पर पहुँच गया, जिसमें हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट की अगुवाई सबसे आगे रही। केयरएज रेटिंग्स की ताज़ा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है, जो भारतीय गैर-जीवन बीमा क्षेत्र की बढ़ती गहराई को रेखांकित करती है।

मुख्य आँकड़े और विकास के कारण

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में ग्रोथ का एक बड़ा कारण फसल बीमा पंजीकरण की समय-सीमा में बदलाव रहा। राज्यों ने खरीफ फसल पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई से आगे बढ़ाकर अगस्त कर दी, जिससे जुलाई में फसल प्रीमियम तीन गुना बढ़कर ₹3,274 करोड़ हो गया था और कारोबार का एक हिस्सा अगस्त में स्थानांतरित हो गया।

इस प्रभाव के चलते वित्त वर्ष 2027 में अप्रैल से अगस्त के बीच इंडस्ट्री की संचयी ग्रोथ एक साल पहले के 6 प्रतिशत से बढ़कर 9.6 प्रतिशत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया कि फसल प्रीमियम में बढ़ोतरी से आग और फसल से जुड़े नुकसान का असर 11.1 प्रतिशत अंक से घटकर 4.2 प्रतिशत अंक रह गया।

हेल्थ इंश्योरेंस: लगातार पाँचवें महीने 30% से अधिक वृद्धि

अगस्त में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर ₹10,834 करोड़ हो गया। यह लगातार पाँचवाँ महीना रहा जब हेल्थ सेगमेंट ने 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की — अगस्त में यह दर 32.5 प्रतिशत रही। अप्रैल-अगस्त 2027 के दौरान हेल्थ प्रीमियम की संचयी वृद्धि 20.9 प्रतिशत रही।

कुल प्रीमियम में हेल्थ इंश्योरेंस का हिस्सा अगस्त में 39.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 27 के अप्रैल-अगस्त में 44 प्रतिशत रहा — जो इस सेगमेंट की प्रमुखता को दर्शाता है।

विशेषज्ञ का नज़रिया

केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर प्रियेश रूपारेलिया ने कहा, 'हेल्थ इंश्योरेंस ग्रोथ का मुख्य कारण बना हुआ है और इस ग्रोथ की क्वालिटी में भी सुधार हुआ है — रिन्यूअल रेट में बढ़ोतरी, क्लेम रेश्यो में कमी और नए ग्राहकों का जुड़ना इसकी वजहें हैं।'

मोटर सेगमेंट में सुस्ती पर रूपारेलिया ने स्पष्ट किया, 'इस सुस्ती का मतलब रिटेल डिमांड में कमी नहीं है। यह वाहन पंजीकरण में कमी और सरकारी हेल्थ योजनाओं के प्रीमियम की बुकिंग में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।'

मोटर और अन्य सेगमेंट की स्थिति

आग और फसल बीमा को छोड़कर, जुलाई में इंडस्ट्री की ग्रोथ लगभग 17 प्रतिशत से घटकर 14.3 प्रतिशत रह गई, जिसका कारण वाहन बिक्री और मोटर इंश्योरेंस कारोबार में आई सुस्ती बताई गई। हालाँकि मोटर इंश्योरेंस ने भी लगातार पाँचवें महीने डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की।

गौरतलब है कि प्राइवेट इंश्योरर्स और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स ने अगस्त में कुल प्रीमियम का 73.3 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जो चालू वर्ष का सर्वाधिक है और सरकारी कंपनियों पर निजी क्षेत्र की बढ़त को स्पष्ट करता है।

आगे की दिशा

रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर के दूसरे पखवाड़े से रिटेल हेल्थ ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है, क्योंकि तब GST से जुड़े बेस की तुलना का आधार सामने आएगा। फिर भी उद्योग विश्लेषकों की दृष्टि में हेल्थ और मोटर सेगमेंट की दीर्घकालिक गति मज़बूत बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय मध्यवर्ग के बदलते वित्तीय व्यवहार का प्रमाण है — कोविड के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा की माँग संरचनात्मक रूप से बढ़ी है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि फसल पंजीकरण की समय-सीमा बदलने से जो कृत्रिम वृद्धि दिखी, वह वास्तविक माँग नहीं बल्कि प्रशासनिक बदलाव का नतीजा है — इससे आँकड़ों की व्याख्या में सावधानी ज़रूरी है। निजी इंश्योरर्स का 73.3% हिस्सा बता रहा है कि सरकारी कंपनियाँ तेज़ी से बाज़ार खो रही हैं, जो नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम कितना रहा?
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर ₹27,455 करोड़ हो गया। हेल्थ सेगमेंट इस वृद्धि में सबसे अहम योगदानकर्ता रहा।
हेल्थ इंश्योरेंस की ग्रोथ इतनी तेज़ क्यों रही?
केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर प्रियेश रूपारेलिया के अनुसार, रिन्यूअल रेट में बढ़ोतरी, क्लेम रेश्यो में कमी और नए ग्राहकों के जुड़ने से हेल्थ इंश्योरेंस की ग्रोथ लगातार पाँचवें महीने 30 प्रतिशत से ऊपर रही। अगस्त में यह दर 32.5 प्रतिशत रही और प्रीमियम ₹10,834 करोड़ पर पहुँचा।
फसल बीमा की समय-सीमा बदलने का इंश्योरेंस प्रीमियम पर क्या असर पड़ा?
राज्यों ने खरीफ फसल पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई से आगे बढ़ाकर अगस्त कर दी, जिससे जुलाई में फसल प्रीमियम तीन गुना बढ़कर ₹3,274 करोड़ हो गया था। इस बदलाव से आग और फसल से जुड़े नुकसान का असर 11.1 प्रतिशत अंक से घटकर 4.2 प्रतिशत अंक रह गया।
प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की बाज़ार हिस्सेदारी कितनी है?
रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट इंश्योरर्स और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स ने अगस्त 2026 में कुल प्रीमियम का 73.3 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जो चालू वर्ष का सर्वाधिक है। यह सरकारी बीमा कंपनियों की तुलना में निजी क्षेत्र की बढ़त को दर्शाता है।
आगे आने वाले महीनों में इंश्योरेंस ग्रोथ की क्या संभावना है?
रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर के दूसरे पखवाड़े से रिटेल हेल्थ ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है, क्योंकि तब GST से जुड़े बेस की तुलना आसान होगी। हालाँकि वित्त वर्ष 27 के अप्रैल-अगस्त में संचयी ग्रोथ 9.6 प्रतिशत रही, जो पिछले साल के 6 प्रतिशत से काफी बेहतर है।
राष्ट्र प्रेस
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