सामान्य बीमा उद्योग वित्त वर्ष 2026 में 9% बढ़कर ₹3.36 लाख करोड़ पर, स्वास्थ्य बीमा सबसे बड़ा चालक
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सामान्य बीमा (जनरल इंश्योरेंस) क्षेत्र वित्त वर्ष 2025-26 में 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ ₹3.36 लाख करोड़ के सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय (जीडीपीआई) पर पहुंच गया। 18 अगस्त को जारी बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है, जिसमें निजी बीमा कंपनियों — विशेष रूप से स्वास्थ्य बीमा कंपनियों — के बेहतर प्रदर्शन को इस वृद्धि का मुख्य कारण बताया गया है।
प्रीमियम और लाभ के आँकड़े
BCG की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग का कुल सकल लिखित प्रीमियम (जीडब्ल्यूपी) 10 प्रतिशत बढ़कर ₹3.44 लाख करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, वृद्धि की यह तस्वीर मुनाफे के मोर्चे पर उतनी उज्ज्वल नहीं रही। उद्योग का कर पश्चात लाभ (पीएटी) सालाना आधार पर 23 प्रतिशत घटकर ₹10,000 करोड़ रह गया। इसी अवधि में उद्योग का इक्विटी पर प्रतिफल (आरओई) 9 प्रतिशत से गिरकर 6 प्रतिशत पर आ गया।
बीमा कंपनियों ने इस दौरान अपनी मूल्य निर्धारण और पोर्टफोलियो रणनीतियों में बदलाव किए, जिसके चलते अंडरराइटिंग प्रदर्शन पुनर्संतुलन के दौर से गुजरा। उद्योग का संयुक्त अनुपात (कम्बाइंड रेशियो) 2 अंक बढ़कर 113 प्रतिशत पर पहुंच गया — जो यह संकेत देता है कि बीमा कंपनियाँ प्रति ₹100 प्रीमियम पर ₹113 का खर्च कर रही हैं।
क्षेत्रवार प्रदर्शन: स्वास्थ्य और मोटर बीमा आगे
क्षेत्रवार आँकड़ों में स्वास्थ्य बीमा सबसे बड़ा वृद्धि चालक रहा। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) युक्तिकरण के बाद पूरे वित्त वर्ष में स्वास्थ्य बीमा कारोबार 17 प्रतिशत बढ़ा, जबकि वर्ष की पहली छमाही में यह वृद्धि केवल 10 प्रतिशत थी — यानी दूसरी छमाही में रफ्तार उल्लेखनीय रूप से तेज हुई।
मोटर बीमा क्षेत्र में भी लगभग 9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। गौरतलब है कि वाहन बिक्री में 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद नवीनीकरण-आधारित पोर्टफोलियो के कारण इसका पूरा लाभ बीमा कंपनियों को नहीं मिल पाया। वहीं अग्नि बीमा और फसल बीमा क्षेत्रों में अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि हुई।
निजी बनाम सार्वजनिक क्षेत्र
वित्त वर्ष 2025-26 में निजी बीमा कंपनियों की जीडीपीआई वृद्धि 10 प्रतिशत रही, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की वृद्धि 8 प्रतिशत दर्ज की गई। निजी कंपनियों ने पूरे वर्ष बेहतर अंडरराइटिंग अनुशासन बनाए रखा — उनका संयुक्त अनुपात लगभग 109 प्रतिशत पर स्थिर रहा और आरओई करीब 9 प्रतिशत बना रहा।
विशेष रूप से बड़ी निजी बीमा कंपनियाँ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में रहीं। उन्होंने 7 प्रतिशत प्रीमियम वृद्धि के साथ हानि अनुपात और संयुक्त अनुपात में 2 से 3 अंकों का सुधार दर्ज किया, और उनका आरओई 14 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप में प्रबंध निदेशक एवं भागीदार तथा भारत बीमा प्रमुख पल्लवी मलानी ने कहा, 'भारतीय सामान्य बीमा उद्योग लगातार बढ़ रहा है और अब यह अधिक परिपक्व चरण में प्रवेश कर रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक प्रतिस्पर्धा इस बात पर होगी कि कौन-सी बीमा कंपनियाँ अपने बड़े कारोबार को लाभप्रद और अनुशासित अंडरराइटिंग में बदल पाने में सफल रहती हैं।
आगे की राह
रिपोर्ट के निष्कर्ष संकेत देते हैं कि उद्योग केवल व्यवसाय की मात्रा बढ़ाने के बजाय टिकाऊ और लाभदायक वृद्धि को प्राथमिकता देने लगा है। वाणिज्यिक पॉलिसियों के नवीनीकरण में मूल्य निर्धारण अनुशासन और फसल बीमा में संतुलित छूट रणनीति इस परिपक्वता के संकेत हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में जीएसटी सुधारों के निरंतर प्रभाव और स्वास्थ्य बीमा की बढ़ती पैठ के साथ उद्योग की वृद्धि की गति बनी रहने की उम्मीद है।