क्या कमजोर शिक्षा प्रणाली पाकिस्तान को पीछे धकेल रही है? 2.62 करोड़ बच्चे हैं स्कूल से बाहर: एक रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं।
- ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स 0.41 है।
- शिक्षा पर जीडीपी का केवल 1.9 प्रतिशत खर्च होता है।
- स्नातक बेरोजगारी दर 31 प्रतिशत है।
- शिक्षकों की ट्रेनिंग में कमी है।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की कमजोर शिक्षा और कौशल प्रणाली देश की आर्थिक प्रगति में एक गंभीर बाधा बन चुकी है। एक हालिया रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि शिक्षा व्यवस्था मानव संसाधन के क्षमता को उत्पादकता में बदलने में असफल रही है, जिसके कारण देश आर्थिक रूप से पीछे रह गया है।
पाकिस्तान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि शिक्षा पर कम सार्वजनिक व्यय, पुराने पाठ्यक्रम, शिक्षकों की अपर्याप्त प्रशिक्षण, सीमित व्यावसायिक शिक्षा के विकल्प, और शोध के लिए कम फंडिंग के चलते देश में कौशल की भारी कमी और युवाओं में उच्च बेरोजगारी बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स 0.41 है, जिसका अर्थ है कि आज जन्म लेने वाला बच्चा, यदि पूरी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य मिले भी, तो वह अपनी संभावित उत्पादकता का केवल 41 प्रतिशत ही प्राप्त कर पाएगा।
हालांकि, पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, प्राकृतिक संसाधन प्रचुरता में हैं और जनसंख्या अपेक्षाकृत युवा है, लेकिन ये सभी कारक अब तक स्थायी आर्थिक विकास में परिवर्तित नहीं हो सके हैं। कमजोर कौशल और कम उत्पादकता राष्ट्रीय प्रगति को निरंतर सीमित कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान शिक्षा पर अपने जीडीपी का केवल 1.9 प्रतिशत खर्च करता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुझाए गए 4 से 6 प्रतिशत से काफी कम है। इसके अतिरिक्त, देश में लगभग 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं।
पाठ्यक्रमों में डिजिटल कौशल, आलोचनात्मक सोच और व्यवहारिक शिक्षा पर सीमित ध्यान दिया जाता है, जिससे कार्यबल तकनीकी बदलावों के लिए तैयार नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 64 प्रतिशत स्नातकों को कौशल की कमी के कारण रोजगार प्राप्त करने में कठिनाई होती है, जबकि युवाओं में स्नातक बेरोजगारी दर लगभग 31 प्रतिशत आंकी गई है।
रिसर्च फंडिंग बहुत कम है, उच्च शिक्षा उद्योग की आवश्यकताओं से कटी हुई है, और शिक्षकों की गुणवत्ता भी अपर्याप्त प्रशिक्षण और सीमित पेशेवर विकास के कारण प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि शिक्षकों में सतत सीखने की भागीदारी कम होने से कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता भी कमजोर पड़ रही है।
अप्रेंटिसशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी सीमित हैं, जिसके कारण कई स्नातक रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते। रिपोर्ट के अनुसार, 58 प्रतिशत नियोक्ताओं को उपयुक्त कर्मचारी खोजने में कठिनाई हो रही है।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान की जनसांख्यिकीय बढ़त एक बोझ में बदल सकती है और लाखों युवा उत्पादक रोजगार से बाहर रह जाएंगे।