गौतम अदाणी बोले: प्रोजेक्ट साइट्स के युवा कर्मचारियों में दिखता है अपना 16 साल का सफर
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 12 अगस्त को कहा कि देश के कोने-कोने से जब युवा अपने घर-परिवार को छोड़कर, आँखों में सपने लिए उनकी प्रोजेक्ट साइट्स पर पहुँचते हैं, तो उनमें उन्हें अपना ही सफर दिखाई देता है। यह भावनात्मक संदेश उन्होंने 'अपनी बात, अपनों के साथ' कार्यक्रम की दूसरी बातचीत में अपने कर्मचारियों के साथ साझा किया।
कार्यक्रम में क्या हुआ
गौतम अदाणी ने इस संवाद श्रृंखला में अपनी यादें, व्यक्तिगत अनुभव और जीवन से मिली सीख कर्मचारियों के साथ खुलकर साझा कीं। 'अपनी बात, अपनों के साथ' कार्यक्रम का यह दूसरा सत्र था, जो समूह के भीतर नेतृत्व और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की पहल का हिस्सा है।
एक्स पर साझा किया व्यक्तिगत अनुभव
अदाणी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि वे 16 वर्ष की आयु में काम सीखने और समझने के लिए मुंबई आए थे। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि आप में से बहुत से साथियों ने भी जीवन में ऐसा ही दिन देखा होगा, जब आपने अपने गाँव, शहर और परिवार को पीछे छोड़कर एक नए भविष्य की तलाश में पहला कदम रखा होगा। जीवन में पहला कदम ही सबसे कठिन और निर्णायक होता है।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि यही पहला कदम व्यक्ति को आकार देता है और उसका भविष्य निर्धारित करता है।
16 साल की उम्र में मुंबई का पहला कदम
पोस्ट के कैप्शन में गौतम अदाणी ने लिखा कि जब 16 साल की उम्र में मुंबई में पहला कदम रखा था, तो न माँ के हाथ का खाना था, न पिता की सुरक्षा का एहसास और न कोई तय रास्ता। 'केवल मेहनत का हौसला और हर दिन कुछ नया सीखने की चाह थी।' यह कहानी, उनके अनुसार, केवल उनकी नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति की है जिसने घर से दूर रहकर देश के किसी कोने में किसी प्रोजेक्ट को अपना सपना बनाया है।
लाखों युवाओं से जुड़ाव का संदेश
अदाणी ने कहा कि आज वे उन लाखों युवाओं में अपनी कहानी देखते हैं — जो घर से दूर हैं, अपनों से दूर हैं, लेकिन अपने पसीने से अपना और भारत का भविष्य बना रहे हैं। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अदाणी ग्रुप देश भर में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा और बंदरगाह परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं।