12 अगस्त 2026
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गौतम अदाणी बोले: प्रोजेक्ट साइट्स के युवा कर्मचारियों में दिखता है अपना 16 साल का सफर

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गौतम अदाणी बोले: प्रोजेक्ट साइट्स के युवा कर्मचारियों में दिखता है अपना 16 साल का सफर

सारांश

गौतम अदाणी ने अपने कर्मचारियों को वह बात बताई जो शायद किसी बोर्डरूम में नहीं कही जाती — 16 साल की उम्र में बिना माँ के हाथ के खाने और बिना तय रास्ते के मुंबई आने का वह पहला कदम। प्रोजेक्ट साइट्स के लाखों युवाओं में उन्हें वही अपना अक्स दिखता है।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने 12 अगस्त को 'अपनी बात, अपनों के साथ' के दूसरे सत्र में कर्मचारियों को संबोधित किया।
अदाणी ने बताया कि वे 16 वर्ष की आयु में काम सीखने के लिए मुंबई आए थे — बिना तय रास्ते, केवल मेहनत के हौसले के साथ।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट साइट्स पर काम करने वाले युवाओं में उन्हें अपना ही सफर दिखाई देता है।
यह संदेश एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए भी साझा किया गया, जिसमें व्यक्तिगत अनुभव और जीवन की सीख शामिल थी।
अदाणी ने कहा — यह कहानी केवल उनकी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जिसने घर से दूर रहकर भारत का भविष्य बनाया।

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 12 अगस्त को कहा कि देश के कोने-कोने से जब युवा अपने घर-परिवार को छोड़कर, आँखों में सपने लिए उनकी प्रोजेक्ट साइट्स पर पहुँचते हैं, तो उनमें उन्हें अपना ही सफर दिखाई देता है। यह भावनात्मक संदेश उन्होंने 'अपनी बात, अपनों के साथ' कार्यक्रम की दूसरी बातचीत में अपने कर्मचारियों के साथ साझा किया।

कार्यक्रम में क्या हुआ

गौतम अदाणी ने इस संवाद श्रृंखला में अपनी यादें, व्यक्तिगत अनुभव और जीवन से मिली सीख कर्मचारियों के साथ खुलकर साझा कीं। 'अपनी बात, अपनों के साथ' कार्यक्रम का यह दूसरा सत्र था, जो समूह के भीतर नेतृत्व और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की पहल का हिस्सा है।

एक्स पर साझा किया व्यक्तिगत अनुभव

अदाणी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि वे 16 वर्ष की आयु में काम सीखने और समझने के लिए मुंबई आए थे। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि आप में से बहुत से साथियों ने भी जीवन में ऐसा ही दिन देखा होगा, जब आपने अपने गाँव, शहर और परिवार को पीछे छोड़कर एक नए भविष्य की तलाश में पहला कदम रखा होगा। जीवन में पहला कदम ही सबसे कठिन और निर्णायक होता है।'

उन्होंने आगे जोड़ा कि यही पहला कदम व्यक्ति को आकार देता है और उसका भविष्य निर्धारित करता है।

16 साल की उम्र में मुंबई का पहला कदम

पोस्ट के कैप्शन में गौतम अदाणी ने लिखा कि जब 16 साल की उम्र में मुंबई में पहला कदम रखा था, तो न माँ के हाथ का खाना था, न पिता की सुरक्षा का एहसास और न कोई तय रास्ता। 'केवल मेहनत का हौसला और हर दिन कुछ नया सीखने की चाह थी।' यह कहानी, उनके अनुसार, केवल उनकी नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति की है जिसने घर से दूर रहकर देश के किसी कोने में किसी प्रोजेक्ट को अपना सपना बनाया है।

लाखों युवाओं से जुड़ाव का संदेश

अदाणी ने कहा कि आज वे उन लाखों युवाओं में अपनी कहानी देखते हैं — जो घर से दूर हैं, अपनों से दूर हैं, लेकिन अपने पसीने से अपना और भारत का भविष्य बना रहे हैं। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अदाणी ग्रुप देश भर में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा और बंदरगाह परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब कर्मचारियों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना रणनीतिक भी है। 'अपनी बात, अपनों के साथ' जैसे कार्यक्रम बड़े कॉर्पोरेट घरानों में आम हैं, लेकिन इनकी वास्तविक प्रभावशीलता तब परखी जाती है जब कर्मचारियों की कार्यस्थल परिस्थितियाँ, वेतन और सुरक्षा मानक सार्वजनिक जाँच के दायरे में आते हैं। प्रेरणादायी आख्यान ज़रूरी हैं, पर पर्याप्त नहीं — असली कसौटी यह है कि प्रोजेक्ट साइट्स पर काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए ज़मीनी हालात कितने बदले हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'अपनी बात, अपनों के साथ' कार्यक्रम क्या है?
यह अदाणी ग्रुप की एक आंतरिक संवाद श्रृंखला है जिसमें चेयरमैन गौतम अदाणी सीधे कर्मचारियों से बात करते हैं। 12 अगस्त को इस श्रृंखला का दूसरा सत्र आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव और जीवन की सीख साझा की।
गौतम अदाणी ने कर्मचारियों को क्या संदेश दिया?
अदाणी ने कहा कि 16 साल की उम्र में वे बिना किसी सहारे के मुंबई आए थे और आज प्रोजेक्ट साइट्स पर काम करने वाले युवाओं में उन्हें अपना वही सफर दिखता है। उन्होंने जोर दिया कि जीवन का पहला कदम ही सबसे कठिन और निर्णायक होता है।
गौतम अदाणी ने एक्स पर क्या लिखा?
अदाणी ने एक्स पर लिखा कि 16 साल की उम्र में मुंबई में पहला कदम रखते वक्त न माँ के हाथ का खाना था, न पिता की सुरक्षा और न कोई तय रास्ता — केवल मेहनत का हौसला था। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं में आज वही कहानी दिखती है जो कभी उनकी अपनी थी।
अदाणी का यह संदेश किसके लिए था?
यह संदेश विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए था जो अदाणी ग्रुप की विभिन्न प्रोजेक्ट साइट्स पर घर-परिवार से दूर रहकर काम करते हैं। अदाणी ने कहा कि ये युवा अपने पसीने से अपना और भारत का भविष्य बना रहे हैं।
गौतम अदाणी की प्रारंभिक जीवन यात्रा कैसी रही?
गौतम अदाणी ने खुद बताया कि वे 16 वर्ष की आयु में काम सीखने के लिए मुंबई आए थे। बिना किसी पूर्व-निर्धारित रास्ते के, केवल मेहनत और सीखने की ललक के बल पर उन्होंने अपना सफर शुरू किया, जो आज अदाणी ग्रुप के रूप में जाना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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