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भारत ने एआई तकनीक को सेना में शामिल करने की दिशा में उठाया बड़ा कदम

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भारत ने एआई तकनीक को सेना में शामिल करने की दिशा में उठाया बड़ा कदम

सारांश

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बाद, भारत ने अपनी सशस्त्र सेनाओं में एआई तकनीक को तेजी से शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह कदम न केवल तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह देश की सैन्य रणनीति में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है।

मुख्य बातें

एआई तकनीक का समावेश भारतीय सेना की सामरिक क्षमता को बढ़ाएगा।
ओओडीए लूप के तहत निर्णय लेने की गति महत्वपूर्ण है।
नया एआई टूल सीमा निगरानी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
94 प्रतिशत सटीकता से सैन्य गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिलेगी।
पुराने सैन्य प्लेटफार्मों को अपग्रेड करने के लिए एआई का उपयोग किया जा रहा है।

नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में संपन्न इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का संदेश अब भारत की सीमाओं से परे फैलने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह समिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग के साथ ही एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परिवर्तन का संकेत भी देती है।

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं को एआई-आधारित युद्ध से संबंधित नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।

किसी भी देश की सैन्य शक्ति का पहले आकलन उसकी सेना के आकार, टैंकों की संख्या और मिसाइलों की मारक क्षमता से किया जाता था। लेकिन अब यह समीकरण बदल गया है। आधुनिक युद्धों में जानकारी की गति और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी कि हथियारों की ताकत।

रक्षा रणनीतिकार अब अक्सर ओओडीए लूप का उल्लेख करते हैं, जिसका अर्थ है 'ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट', यानी स्थिति को देखना, समझना, निर्णय लेना और त्वरित कार्रवाई करना। किसी भी सेना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इन चार चरणों को कितनी तेजी से पूरा करती है।

समिट के दौरान, स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ने एक नया स्वदेशी एआई टूल प्रस्तुत किया, जो भारत की सीमा निगरानी के तरीके को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रणाली सैटेलाइट चित्रों, ड्रोन फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण करके लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के निकट संभावित सैन्य गतिविधियों का पता लगा सकती है।

इस एआई प्रणाली की सटीकता लगभग 94 प्रतिशत बताई जा रही है। विशेष बात यह है कि यह टूल स्पष्ट संकेत मिलने से पहले ही संभावित सैन्य जमावड़े की पहचान कर सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक की मदद से सेना असामान्य गतिविधियों को जल्दी पहचान सकती है और त्वरित प्रतिक्रिया दे सकती है।

अब मानव विश्लेषकों पर निर्भर रहने के बजाय, यह एआई प्रणाली बड़ी मात्रा में डेटा को तेज़ी से प्रोसेस करती है और रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे सैन्य कमांडरों को तनाव बढ़ने से पहले ही निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

रिपोर्ट के अनुसार, समिट में यह भी जानकारी मिली कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को धीरे-धीरे तीनों सैन्य शाखाओं में शामिल किया जा रहा है।

भारतीय सेना में एसएएम-यूएन प्लेटफॉर्म नामक एक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिसकी सहायता से पुराने टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को अपग्रेड किया जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन पुराने सैन्य प्लेटफार्मों में एआई-आधारित फायर कंट्रोल सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे वे आधुनिक युद्धक्षेत्र में प्रभावी बने रह सकते हैं और नई सैन्य गाड़ियों की खरीद की आवश्यकता कम हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत की रक्षा रणनीति में एआई का समावेश न केवल तकनीकी प्रगति है, बल्कि यह सामरिक दृष्टि से एक आवश्यक कदम भी है। इससे न केवल सैन्य क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की सेना में एआई तकनीक का क्या महत्व है?
एआई तकनीक से सेना की निर्णय लेने की क्षमता और जानकारी हासिल करने की गति में सुधार होगा, जिससे आधुनिक युद्ध में सफलता की संभावनाएं बढ़ेंगी।
क्या एआई प्रणाली की सटीकता कितनी है?
रिपोर्ट के अनुसार, इस एआई प्रणाली की सटीकता लगभग 94 प्रतिशत है।
भारतीय सेना में कौन सा एआई प्लेटफार्म उपयोग हो रहा है?
भारतीय सेना में एसएएम-यूएन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पुराने टैंकों को अपग्रेड किया जा रहा है।
यह एआई तकनीक कैसे काम करती है?
यह एआई तकनीक सैटेलाइट चित्रों, ड्रोन फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण करके संभावित सैन्य गतिविधियों का पता लगाती है।
राष्ट्र प्रेस
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