30 जुलाई 2026
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करिश्मा खेमू ने कश्मीर के पुश्तैनी घर की यादें साझा कीं, अशोक पंडित हुए भावुक

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करिश्मा खेमू ने कश्मीर के पुश्तैनी घर की यादें साझा कीं, अशोक पंडित हुए भावुक

सारांश

करिश्मा खेमू की इंस्टाग्राम पोस्ट सिर्फ एक सेलेब्रिटी का कश्मीर दौरा नहीं — यह 1990 के उस दर्द की वापसी है जो लाखों कश्मीरी पंडित परिवार आज भी महसूस करते हैं। टूटा हुआ घर, बंद कमरे, और माँ की यादें — अशोक पंडित सहित पूरी एक पीढ़ी इस वीडियो में अपनी कहानी देख रही है।

मुख्य बातें

करिश्मा खेमू ने 30 जुलाई को इंस्टाग्राम पर श्रीनगर के पुश्तैनी घर की भावुक वीडियो साझा की।
परिवार को 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के दौरान एक ही रात में घर छोड़ना पड़ा था।
पुश्तैनी घर को अब किराए के लिए छोटे-छोटे कमरों में बाँट दिया गया है; सीढ़ियाँ 9 से घटकर 3 रह गई हैं।
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा — 'यह हर कश्मीरी पंडित की कहानी है।' करिश्मा कुणाल खेमू की बहन हैं; खेमू परिवार भी 1990 के पलायन से प्रभावित परिवारों में शामिल था।

करिश्मा खेमू ने गुरुवार, 30 जुलाई को इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें वे और उनकी माँ श्रीनगर स्थित अपने पुश्तैनी घर में नजर आ रही हैं — वही घर, जिसे 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के दौरान उनके परिवार को एक ही रात में छोड़ना पड़ा था। अभिनेता कुणाल खेमू की बहन की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया का केंद्र बन गई।

पुश्तैनी घर की दर्दनाक वापसी

वीडियो में करिश्मा की माँ घर के अलग-अलग कमरों की ओर इशारा करते हुए पुरानी यादें ताजा करती दिखती हैं। वे कहती हैं, 'यह हमारा घर था; यह मेरा बेडरूम था। यह पापा का कमरा था।' करिश्मा ने बताया कि उनकी माँ की शादी के शुरुआती दिन इसी घर में बीते थे और वे ऊपरी मंजिल पर रहती थीं।

करिश्मा ने अपनी आवाज में पीड़ा और ठहराव लिए हुए कहा, 'जब माँ की शादी हुई थी, तो वह घर की ऊपरी मंजिल पर सोती थीं। एक ही रात में हमें सब कुछ छोड़ना पड़ा था। आज, इतने सालों बाद, हम श्रीनगर की गलियों से गुजरते हुए अपने घर पहुंच रहे हैं।'

घर अब पहचान से परे

करिश्मा ने बताया कि जो घर कभी बड़ा और भरा-पूरा हुआ करता था, उसे अब किराए पर देने के लिए छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया गया है। उन्होंने कहा, 'अब इस घर को कमरों में बाँट दिया गया है। हर कमरे पर किसी का घर बना हुआ है।' सीढ़ियों पर बिजली नहीं थी और अधिकांश कमरे बंद मिले।

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'बहुत गई थोड़ी रही। 9 सीढ़ियाँ थीं कभी, अब सिर्फ 3 रह गई हैं। जमीन बगल गई, घर बदल गया, पर जो यादें रह गई थीं, वो आज भी वहीं थीं। सालों बाद अपना घर दोबारा देखना अलग ही अहसास है।'

अशोक पंडित की भावुक प्रतिक्रिया

फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने करिश्मा की पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, 'मैं निशब्द और स्तब्ध हूँ। यह हर कश्मीरी पंडित की कहानी है। करिश्मा, हमारी जड़ों से जुड़ी यादें ताजा करने के लिए आपका धन्यवाद।' उनकी यह प्रतिक्रिया उस सामूहिक दर्द की गूँज है, जो लाखों कश्मीरी पंडित परिवार तीन दशकों से अधिक समय से अपने भीतर लिए जी रहे हैं।

1990 का पलायन: एक अमिट घाव

1990 में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक माना जाता है। भय और हिंसा के माहौल में हजारों परिवारों को रातोंरात अपने घर, जायदाद और जड़ें छोड़कर पलायन करना पड़ा था। करिश्मा की माँ का यह वाक्य — 'तुम्हारे पापा मेरे सामने वाले कमरे में पढ़ाई किया करते थे' — उस पूरी पीढ़ी की कहानी का सार है।

करिश्मा ने पोस्ट के अंत में लिखा, 'अगर इस घर को सही से रखा गया होता, तो अच्छा होता, लेकिन अब यह हमारा तो नहीं है। हर बार जब माता-पिता वहाँ जाते हैं, तो मिली-जुली भावनाएँ होती हैं — ज्यादातर बचपन की यादें और कुछ कड़वी यादें। कश्मीरी पंडितों का घर, कश्मीर।' यह वीडियो केवल एक परिवार की वापसी नहीं, बल्कि एक पूरी कौम के टूटे हुए अतीत की झलक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मुख्यधारा का मनोरंजन मीडिया अक्सर महज 'नॉस्टेल्जिया कंटेंट' के रूप में पेश करता है — जबकि यह एक अनसुलझी मानवीय त्रासदी का दस्तावेज है। 1990 का पलायन तीन दशक बाद भी न्यायिक और पुनर्वास के मोर्चे पर अधूरा है। अशोक पंडित जैसे लोगों की प्रतिक्रिया यह भी बताती है कि यह दर्द व्यक्तिगत नहीं, सामुदायिक है। सवाल यह है कि क्या इस तरह की पोस्ट केवल भावनात्मक चर्चा तक सीमित रहेंगी, या नीतिगत जवाबदेही की माँग भी उठाएँगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करिश्मा खेमू ने कश्मीर के बारे में क्या साझा किया?
करिश्मा खेमू ने 30 जुलाई को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसमें वे और उनकी माँ श्रीनगर के उस पुश्तैनी घर में नजर आ रही हैं जिसे 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के दौरान परिवार को एक रात में छोड़ना पड़ा था। वीडियो में माँ पुराने कमरों और यादों को याद करती दिखती हैं।
कुणाल खेमू का कश्मीर से क्या संबंध है?
अभिनेता कुणाल खेमू का परिवार उन कश्मीरी पंडित परिवारों में शामिल था, जिन्हें 1990 में घाटी से पलायन करना पड़ा था। करिश्मा खेमू उनकी बहन हैं, जिन्होंने हाल ही में माँ के साथ श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर का दौरा किया।
अशोक पंडित ने करिश्मा की पोस्ट पर क्या कहा?
फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने करिश्मा की पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, 'मैं निशब्द और स्तब्ध हूँ। यह हर कश्मीरी पंडित की कहानी है। करिश्मा, हमारी जड़ों से जुड़ी यादें ताजा करने के लिए आपका धन्यवाद।'
1990 में कश्मीरी पंडितों को क्यों पलायन करना पड़ा?
1990 में कश्मीर घाटी में बढ़ती हिंसा और भय के माहौल के कारण हजारों कश्मीरी पंडित परिवारों को रातोंरात अपने घर, संपत्ति और जड़ें छोड़कर पलायन करना पड़ा। यह भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक मानी जाती है।
करिश्मा खेमू के पुश्तैनी घर की अभी क्या स्थिति है?
करिश्मा ने बताया कि उनका पुश्तैनी घर अब किराए के लिए छोटे-छोटे कमरों में बाँट दिया गया है। सीढ़ियाँ जो कभी 9 थीं, अब सिर्फ 3 रह गई हैं। सीढ़ियों पर बिजली नहीं थी और अधिकांश कमरे बंद मिले।
राष्ट्र प्रेस
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