करिश्मा खेमू ने कश्मीर के पुश्तैनी घर की यादें साझा कीं, अशोक पंडित हुए भावुक
सारांश
मुख्य बातें
करिश्मा खेमू ने गुरुवार, 30 जुलाई को इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें वे और उनकी माँ श्रीनगर स्थित अपने पुश्तैनी घर में नजर आ रही हैं — वही घर, जिसे 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के दौरान उनके परिवार को एक ही रात में छोड़ना पड़ा था। अभिनेता कुणाल खेमू की बहन की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया का केंद्र बन गई।
पुश्तैनी घर की दर्दनाक वापसी
वीडियो में करिश्मा की माँ घर के अलग-अलग कमरों की ओर इशारा करते हुए पुरानी यादें ताजा करती दिखती हैं। वे कहती हैं, 'यह हमारा घर था; यह मेरा बेडरूम था। यह पापा का कमरा था।' करिश्मा ने बताया कि उनकी माँ की शादी के शुरुआती दिन इसी घर में बीते थे और वे ऊपरी मंजिल पर रहती थीं।
करिश्मा ने अपनी आवाज में पीड़ा और ठहराव लिए हुए कहा, 'जब माँ की शादी हुई थी, तो वह घर की ऊपरी मंजिल पर सोती थीं। एक ही रात में हमें सब कुछ छोड़ना पड़ा था। आज, इतने सालों बाद, हम श्रीनगर की गलियों से गुजरते हुए अपने घर पहुंच रहे हैं।'
घर अब पहचान से परे
करिश्मा ने बताया कि जो घर कभी बड़ा और भरा-पूरा हुआ करता था, उसे अब किराए पर देने के लिए छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया गया है। उन्होंने कहा, 'अब इस घर को कमरों में बाँट दिया गया है। हर कमरे पर किसी का घर बना हुआ है।' सीढ़ियों पर बिजली नहीं थी और अधिकांश कमरे बंद मिले।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'बहुत गई थोड़ी रही। 9 सीढ़ियाँ थीं कभी, अब सिर्फ 3 रह गई हैं। जमीन बगल गई, घर बदल गया, पर जो यादें रह गई थीं, वो आज भी वहीं थीं। सालों बाद अपना घर दोबारा देखना अलग ही अहसास है।'
अशोक पंडित की भावुक प्रतिक्रिया
फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने करिश्मा की पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, 'मैं निशब्द और स्तब्ध हूँ। यह हर कश्मीरी पंडित की कहानी है। करिश्मा, हमारी जड़ों से जुड़ी यादें ताजा करने के लिए आपका धन्यवाद।' उनकी यह प्रतिक्रिया उस सामूहिक दर्द की गूँज है, जो लाखों कश्मीरी पंडित परिवार तीन दशकों से अधिक समय से अपने भीतर लिए जी रहे हैं।
1990 का पलायन: एक अमिट घाव
1990 में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक माना जाता है। भय और हिंसा के माहौल में हजारों परिवारों को रातोंरात अपने घर, जायदाद और जड़ें छोड़कर पलायन करना पड़ा था। करिश्मा की माँ का यह वाक्य — 'तुम्हारे पापा मेरे सामने वाले कमरे में पढ़ाई किया करते थे' — उस पूरी पीढ़ी की कहानी का सार है।
करिश्मा ने पोस्ट के अंत में लिखा, 'अगर इस घर को सही से रखा गया होता, तो अच्छा होता, लेकिन अब यह हमारा तो नहीं है। हर बार जब माता-पिता वहाँ जाते हैं, तो मिली-जुली भावनाएँ होती हैं — ज्यादातर बचपन की यादें और कुछ कड़वी यादें। कश्मीरी पंडितों का घर, कश्मीर।' यह वीडियो केवल एक परिवार की वापसी नहीं, बल्कि एक पूरी कौम के टूटे हुए अतीत की झलक है।