30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत का एआई तकनीक की दिशा में नया कदम, सेना में बदलाव की तैयारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत का एआई तकनीक की दिशा में नया कदम, सेना में बदलाव की तैयारी

सारांश

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बाद, भारत ने अपनी सशस्त्र सेनाओं में एआई तकनीक के एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह बदलाव न केवल रणनीतिक है, बल्कि सुरक्षा में भी एक नई दिशा प्रदान करता है।

मुख्य बातें

AI तकनीक: भारतीय सेना में एआई का तेजी से एकीकरण।
स्ट्रेटेजिक बदलाव: सैन्य रणनीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव।
ओओडीए लूप: निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी।
टेक्नोलॉजी: सीमा निगरानी के लिए नया एआई टूल।
पुराने प्लेटफार्मों का अपग्रेड: एआई-आधारित फायर कंट्रोल सिस्टम।

नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन हाल ही में हुआ, और इसके परिणामों ने भारत की सीमाओं के बाहर भी गूंजने शुरू कर दिए हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह समिट केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग पर ही केंद्रित नहीं था, बल्कि इसमें एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव भी देखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं को एआई-आधारित युद्ध के लिए तैयार कर रहा है।

पिछले कुछ दशकों में, किसी देश की सैन्य शक्ति का मूल्यांकन उसके सैन्य बल, टैंकों की संख्या, और मिसाइलों की क्षमता से किया जाता था। लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है। आधुनिक युद्धों में सूचना प्राप्त करने की गति और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है जितनी कि हथियारों की ताकत।

रक्षा विशेषज्ञ अब ओओडीए लूप की चर्चा करते हैं, जिसका अर्थ है 'ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट', यानी स्थिति का अवलोकन करना, उसे समझना, निर्णय लेना, और तत्परता से कार्य करना। किसी भी सेना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इन चार चरणों को कितनी जल्दी पूरा कर सकती है।

समिट के दौरान, स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ने एक नया स्वदेशी एआई उपकरण पेश किया, जो भारत की सीमा निगरानी की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रणाली उपग्रह चित्रों, ड्रोन वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण करके लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास संभावित सैन्य गतिविधियों का पता लगा सकती है।

इस एआई प्रणाली की सटीकता लगभग 94 प्रतिशत बताई जा रही है। विशेष रूप से, यह उपकरण तंबू या सैन्य उपकरणों जैसे स्पष्ट संकेत दिखने से पहले संभावित सैन्य जमावड़े की पहचान कर सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक की सहायता से सेना किसी भी असामान्य गतिविधि को प्रारंभिक चरण में पहचान सकती है और त्वरित प्रतिक्रिया दे सकती है।

अब केवल मानव विश्लेषकों पर निर्भर रहने की बजाय, यह एआई प्रणाली बड़े पैमाने पर डेटा को तेजी से प्रोसेस करती है और वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करती है। इससे सैन्य कमांडरों को तनाव बढ़ने से पहले ही निर्णय लेने में मदद मिलती है।

रिपोर्ट के अनुसार, समिट में यह भी बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को धीरे-धीरे सेना की तीनों शाखाओं में समाहित किया जा रहा है।

भारतीय सेना में एसएएम-यूएन प्लेटफॉर्म नामक एक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से पुराने टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को अपग्रेड किया जा रहा है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इन पुराने सैन्य प्लेटफार्मों में एआई-आधारित फायर कंट्रोल सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे वे आधुनिक युद्धक्षेत्र में भी प्रभावी बने रह सकते हैं और नई सैन्य गाड़ियों की खरीद की आवश्यकता भी कम हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी बेहद आवश्यक है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की सेना में एआई तकनीक का क्या उपयोग हो रहा है?
भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं को एआई-आधारित युद्ध के लिए तैयार कर रहा है, जिसमें सीमा निगरानी और डेटा विश्लेषण शामिल है।
नया एआई टूल क्या काम करेगा?
यह टूल सीमा पर संभावित सैन्य गतिविधियों का पता लगाने में मदद करेगा, जिससे सेना को समय पर जानकारी मिल सकेगी।
एआई तकनीक की सटीकता कितनी है?
इस एआई प्रणाली की सटीकता लगभग 94 प्रतिशत बताई जा रही है।
क्या पुराने टैंकों में एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है?
हां, पुराने टैंकों और बख्तरबंद वाहनों में एआई-आधारित फायर कंट्रोल सिस्टम जोड़े जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले