श्रीजा अकुला: WTT कंटेंडर एकल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय, बड़ी बहन ने जगाई थी खेल की लौ
सारांश
मुख्य बातें
श्रीजा अकुला ने जून 2024 में नाइजीरिया के लागोस में आयोजित WTT कंटेंडर टूर्नामेंट में चीन की डिंग यिजिये को 4-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया और इतिहास रचते हुए WTT कंटेंडर स्तर पर एकल खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। हैदराबाद की इस खिलाड़ी की यात्रा एक साधारण परिवार से शुरू होकर विश्व टेबल टेनिस के शीर्ष मंच तक पहुँची है, जिसमें उनकी बड़ी बहन रावली की प्रेरणा ने नींव रखी।
बड़ी बहन की छाया में मिली खेल की राह
श्रीजा अकुला का जन्म 31 जुलाई 1998 को हैदराबाद में हुआ। उनके पिता एक निजी बीमा कंपनी में प्रबंधक पद पर कार्यरत थे। बड़ी बहन रावली कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस खेलती थीं और उन्होंने ही श्रीजा को इस खेल से परिचित कराया।
बहन के साथ खेल की बारीकियाँ सीखने के बाद श्रीजा ने सोमनाथ घोष की अकादमी में दाखिला लिया और पेशेवर टेबल टेनिस को अपना लक्ष्य बनाया। गौरतलब है कि वह पढ़ाई में भी उतनी ही प्रतिभाशाली रहीं — 12वीं कक्षा में उन्होंने 98.7 प्रतिशत अंक हासिल किए।
मुख्य घटनाक्रम: पदकों की लंबी फेहरिस्त
साल 2019 में साउथ एशियाई खेलों में श्रीजा ने महिला युगल और टीम स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल जीते। इसके बाद अप्रैल 2022 में सीनियर नेशनल और अंतर-राज्यीय टेबल टेनिस चैंपियनशिप में उन्होंने एकल और युगल — दोनों खिताब अपने नाम किए।
श्रीजा के करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स रहा, जहाँ उन्होंने दिग्गज खिलाड़ी शरथ कमल के साथ मिलकर मिश्रित युगल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
WTT मंच पर ऐतिहासिक सफलता
जनवरी 2024 में श्रीजा ने टेक्सास में आयोजित WTT फीडर कॉर्पस क्रिस्टी प्रतियोगिता में अपना पहला WTT एकल खिताब जीता। इसके कुछ महीने बाद जून 2024 में लागोस, नाइजीरिया में हुए WTT कंटेंडर टूर्नामेंट में उन्होंने चीन की डिंग यिजिये को 4-1 से मात देकर खिताब जीता और इतिहास रच दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय टेबल टेनिस लगातार वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। इसी टूर्नामेंट में श्रीजा ने अर्चना कामथ के साथ मिलकर महिला डबल्स का खिताब भी अपने नाम किया।
सरकारी सम्मान और आगे की राह
टेबल टेनिस में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2022 में श्रीजा को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उनके संघर्ष और समर्पण की आधिकारिक स्वीकृति थी।
श्रीजा अकुला की कहानी यह साबित करती है कि परिवार की प्रेरणा और व्यक्तिगत दृढ़ता मिलकर किसी भी खिलाड़ी को विश्व मंच पर इतिहास रचने में सक्षम बना सकती है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद है।