भारत ईएफटीए टीईपीए: 2040 तक $100 अरब निवेश और 20 लाख नौकरियों का लक्ष्य, एसोचैम ने गिनाए फायदे
सारांश
मुख्य बातें
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के एक वर्ष पूरे होने पर उद्योग मंडल एसोचैम ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कहा कि इस समझौते से वर्ष 2040 तक भारत में 10 लाख से 20 लाख नए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है। साथ ही, ईएफटीए ने 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें पहले दशक में 50 अरब डॉलर का निवेश निर्धारित है।
समझौते की मुख्य बातें
स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — ये चार देश ईएफटीए के सदस्य हैं और टीईपीए के तहत भारत के साथ उनकी साझेदारी अब केवल व्यापारिक सीमाओं से आगे निकल रही है। एसोचैम के अनुसार, यह समझौता धीरे धीरे निवेश, नवाचार और रोज़गार के एक व्यापक मंच में तब्दील हो रहा है।
बाज़ार पहुँच के मोर्चे पर ईएफटीए ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क रियायतें देने की पेशकश की है, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को ईएफटीए बाज़ार तक पहुँच का रास्ता खुल सकता है। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर पहले ही 26.7 अरब डॉलर पर पहुँच चुका है।
किन क्षेत्रों को होगा फायदा
एसोचैम ने अनुमान लगाया है कि फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, आभूषण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा, "ईएफटीए देशों के जैविक रसायनों के आयात में भारत की 8.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बताती है कि कितनी संभावनाएँ मौजूद हैं। इसी तरह की सफलता फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, बिजली के उपकरणों, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरणों और कपड़ा क्षेत्र में भी दोहराई जा सकती है।"
क्षेत्रीय दृष्टि से, सान्याल ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों को कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों, कॉफी और मसालों के निर्यात से विशेष लाभ मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि ईएफटीए देशों का वैश्विक वार्षिक आयात करीब 628 अरब डॉलर है, जो भारतीय कारोबारियों के लिए एक विशाल बाज़ार अवसर है।
वहीं, भारत ने डेयरी, सोया और कोयला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रतिबद्धताएँ सुनिश्चित की हैं।
एसोचैम के अध्यक्ष की प्राथमिकताएँ
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, "अगला कदम टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को व्यवहार्य परियोजनाओं और रोज़गार के अवसरों में बदलना है।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्नत विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ी संभावनाएँ हैं, और इन साझेदारियों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अभिन्न भागीदार बनाना होगा।
ग्रीन हाइड्रोजन और तकनीकी सहयोग
एसोचैम के बयान के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन इस साझेदारी का एक प्रमुख उभरता क्षेत्र है। भारत का वर्ष 2030 तक सालाना कम से कम 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य, नॉर्वे की समुद्री प्रौद्योगिकी, आइसलैंड की भू तापीय ऊर्जा विशेषज्ञता और स्विट्जरलैंड की इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक के साथ स्वाभाविक तालमेल बैठाता है।
इसके अतिरिक्त, एआई, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण को भी सहयोग के संभावनाशील क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया है। भारत की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएँ, सेमीकॉन इंडिया 2.0 और इंडिया एआई मिशन, सटीक इंजीनियरिंग तथा ऑटोमेशन में ईएफटीए की विशेषज्ञता के साथ समन्वय के लिए मज़बूत आधार प्रदान करते हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था में उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एकाधिक मोर्चों पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि टीईपीए की परिकल्पना न केवल बड़े उद्योगों बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप और किसानों के लिए भी अवसर सुनिश्चित करने की है। अब असली परीक्षा यह होगी कि 100 अरब डॉलर की यह प्रतिबद्धता वास्तविक परियोजनाओं, विनिर्माण इकाइयों और स्वच्छ ऊर्जा उपक्रमों में किस गति से और किस पैमाने पर परिवर्तित होती है।