16 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत ईएफटीए टीईपीए: 2040 तक $100 अरब निवेश और 20 लाख नौकरियों का लक्ष्य, एसोचैम ने गिनाए फायदे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत ईएफटीए टीईपीए: 2040 तक $100 अरब निवेश और 20 लाख नौकरियों का लक्ष्य, एसोचैम ने गिनाए फायदे

सारांश

भारत ईएफटीए टीईपीए के एक साल पूरे होने पर एसोचैम ने बड़े अनुमान पेश किए — 2040 तक 20 लाख नौकरियाँ और 100 अरब डॉलर निवेश। लेकिन यह प्रतिबद्धता वास्तविक परियोजनाओं में कब बदलेगी, यही असली सवाल है।

मुख्य बातें

भारत ईएफटीए टीईपीए के एक वर्ष पूरे होने पर एसोचैम ने 16 अक्टूबर 2026 को अनुमान जारी किए।
ईएफटीए ने 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें पहले दशक में 50 अरब डॉलर शामिल हैं।
समझौते से 2040 तक 10 लाख से 20 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना।
ईएफटीए ने 92.2% टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क रियायत दी, जिससे भारत के 99.6% निर्यात को बाज़ार पहुँच मिल सकती है।
द्विपक्षीय व्यापार 26.7 अरब डॉलर तक पहुँचा; ईएफटीए देशों का वैश्विक वार्षिक आयात लगभग 628 अरब डॉलर ।
ग्रीन हाइड्रोजन, एआई, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण को सहयोग के प्रमुख उभरते क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया।

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के एक वर्ष पूरे होने पर उद्योग मंडल एसोचैम ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कहा कि इस समझौते से वर्ष 2040 तक भारत में 10 लाख से 20 लाख नए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है। साथ ही, ईएफटीए ने 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें पहले दशक में 50 अरब डॉलर का निवेश निर्धारित है।

समझौते की मुख्य बातें

स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — ये चार देश ईएफटीए के सदस्य हैं और टीईपीए के तहत भारत के साथ उनकी साझेदारी अब केवल व्यापारिक सीमाओं से आगे निकल रही है। एसोचैम के अनुसार, यह समझौता धीरे धीरे निवेश, नवाचार और रोज़गार के एक व्यापक मंच में तब्दील हो रहा है।

बाज़ार पहुँच के मोर्चे पर ईएफटीए ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क रियायतें देने की पेशकश की है, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को ईएफटीए बाज़ार तक पहुँच का रास्ता खुल सकता है। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर पहले ही 26.7 अरब डॉलर पर पहुँच चुका है।

किन क्षेत्रों को होगा फायदा

एसोचैम ने अनुमान लगाया है कि फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, आभूषण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा, "ईएफटीए देशों के जैविक रसायनों के आयात में भारत की 8.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बताती है कि कितनी संभावनाएँ मौजूद हैं। इसी तरह की सफलता फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, बिजली के उपकरणों, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरणों और कपड़ा क्षेत्र में भी दोहराई जा सकती है।"

क्षेत्रीय दृष्टि से, सान्याल ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों को कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों, कॉफी और मसालों के निर्यात से विशेष लाभ मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि ईएफटीए देशों का वैश्विक वार्षिक आयात करीब 628 अरब डॉलर है, जो भारतीय कारोबारियों के लिए एक विशाल बाज़ार अवसर है।

वहीं, भारत ने डेयरी, सोया और कोयला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रतिबद्धताएँ सुनिश्चित की हैं।

एसोचैम के अध्यक्ष की प्राथमिकताएँ

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, "अगला कदम टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को व्यवहार्य परियोजनाओं और रोज़गार के अवसरों में बदलना है।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्नत विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ी संभावनाएँ हैं, और इन साझेदारियों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अभिन्न भागीदार बनाना होगा।

ग्रीन हाइड्रोजन और तकनीकी सहयोग

एसोचैम के बयान के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन इस साझेदारी का एक प्रमुख उभरता क्षेत्र है। भारत का वर्ष 2030 तक सालाना कम से कम 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य, नॉर्वे की समुद्री प्रौद्योगिकी, आइसलैंड की भू तापीय ऊर्जा विशेषज्ञता और स्विट्जरलैंड की इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक के साथ स्वाभाविक तालमेल बैठाता है।

इसके अतिरिक्त, एआई, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण को भी सहयोग के संभावनाशील क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया है। भारत की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएँ, सेमीकॉन इंडिया 2.0 और इंडिया एआई मिशन, सटीक इंजीनियरिंग तथा ऑटोमेशन में ईएफटीए की विशेषज्ञता के साथ समन्वय के लिए मज़बूत आधार प्रदान करते हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था में उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एकाधिक मोर्चों पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि टीईपीए की परिकल्पना न केवल बड़े उद्योगों बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप और किसानों के लिए भी अवसर सुनिश्चित करने की है। अब असली परीक्षा यह होगी कि 100 अरब डॉलर की यह प्रतिबद्धता वास्तविक परियोजनाओं, विनिर्माण इकाइयों और स्वच्छ ऊर्जा उपक्रमों में किस गति से और किस पैमाने पर परिवर्तित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है कि किसी व्यापार समझौते के साथ ऐसे महत्वाकांक्षी रोज़गार अनुमान जोड़े गए हों। असली सवाल यह है कि 'प्रतिबद्धता' को 'वास्तविक परियोजना' में बदलने के लिए कौन सा सत्यापन तंत्र मौजूद है। गौरतलब है कि टीईपीए में निवेश के आँकड़े ईएफटीए की स्व घोषित प्रतिबद्धता पर आधारित हैं, जिनकी बाध्यकारी निगरानी का ढाँचा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। एमएसएमई और किसानों को लाभान्वित करने की बात तो कही जा रही है, परंतु उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की व्यावहारिक रूपरेखा अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ईएफटीए टीईपीए क्या है?
टीईपीए (व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता) भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — के बीच हुआ एक व्यापार एवं निवेश समझौता है। इसके तहत ईएफटीए ने 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है और भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को बाज़ार पहुँच का रास्ता खुला है।
टीईपीए से भारत में कितने रोज़गार पैदा होने की उम्मीद है?
एसोचैम के अनुमान के अनुसार, टीईपीए से वर्ष 2040 तक भारत में 10 लाख से 20 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हो सकते हैं। यह अनुमान उद्योग मंडल एसोचैम ने समझौते के एक वर्ष पूरे होने पर 16 अक्टूबर 2026 को जारी किया।
टीईपीए से किन भारतीय क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ होगा?
एसोचैम के अनुसार, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, आभूषण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों को कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य, कॉफी और मसालों के निर्यात से विशेष फायदा हो सकता है।
ग्रीन हाइड्रोजन में भारत ईएफटीए सहयोग कैसे काम करेगा?
भारत का 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य, नॉर्वे की समुद्री प्रौद्योगिकी, आइसलैंड की भू तापीय ऊर्जा विशेषज्ञता और स्विट्जरलैंड की इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक के साथ मिलकर साझेदारी का एक स्वाभाविक आधार बनाता है। एसोचैम ने इसे टीईपीए के तहत सहयोग का एक प्रमुख उभरता क्षेत्र बताया है।
ईएफटीए ने भारत को कितनी टैरिफ रियायतें दी हैं?
ईएफटीए ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क रियायतें देने की पेशकश की है, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को ईएफटीए बाज़ार तक पहुँच मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि ईएफटीए देशों का वार्षिक वैश्विक आयात लगभग 628 अरब डॉलर है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले