7 अक्टूबर 2026
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भारत-ईएफटीए टीईपीए: ₹100 अरब डॉलर FDI और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य, वाणिज्य सचिव ने निर्यातकों को दिया आह्वान

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भारत-ईएफटीए टीईपीए: ₹100 अरब डॉलर FDI और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य, वाणिज्य सचिव ने निर्यातकों को दिया आह्वान

सारांश

भारत-ईएफटीए टीईपीए सिर्फ टैरिफ कटौती नहीं — यह 15 साल में 10 लाख नौकरियाँ और 100 अरब डॉलर FDI का रोडमैप है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने निर्यातकों को स्पष्ट संदेश दिया: यह खिड़की खुली है, इसका फ़ायदा उठाना अब आप पर है।

मुख्य बातें

टीईपीए 1 अक्टूबर 2025 से लागू; वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 7 अक्टूबर 2026 को निर्यातकों को इसका पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।
ईएफटीए देशों ने 92.2% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी; भारत के 99.6% निर्यात को लाभ मिलेगा।
भारत ने 82.7% टैरिफ लाइनों पर प्रतिबद्धता दी, जो ईएफटीए के 95.3% निर्यात को कवर करती है।
ईएफटीए देशों का लक्ष्य: अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर FDI और 10 लाख रोज़गार सृजन।
कई कृषि उत्पादों पर ईएफटीए देशों ने आयात शुल्क शून्य किया; भारतीय कृषि निर्यातकों के लिए नया अवसर।
आइसलैंड , लिकटेंस्टीन , नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के वरिष्ठ प्रतिनिधि नई दिल्ली में पहली वर्षगाँठ बैठक में शामिल।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में निर्यात संवर्धन परिषदों (एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) को संबोधित करते हुए भारतीय निर्यातकों और उद्योग संगठनों से भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ संपन्न ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता महज टैरिफ कटौती का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि व्यवसायों को दीर्घकालिक स्थिरता, पूर्वानुमेयता और निवेश-आधारित विकास की ठोस बुनियाद देने वाला रणनीतिक करार है।

समझौते का दायरा और प्रमुख आँकड़े

टीईपीए 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। इस अवसर पर ईएफटीए के चारों सदस्य देशों — आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड — के वरिष्ठ प्रतिनिधि नई दिल्ली में एकत्रित हुए, जहाँ समझौते की पहली वर्षगाँठ और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

आँकड़ों के अनुसार, ईएफटीए देशों ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा। गैर-कृषि उत्पादों को लगभग पूर्ण बाज़ार पहुँच दी गई है। दूसरी ओर, भारत ने 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर प्रतिबद्धताएँ जताई हैं, जो ईएफटीए देशों के 95.3 प्रतिशत निर्यात को कवर करती हैं।

निवेश और रोज़गार सृजन का लक्ष्य

इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 10 वर्षों में भारत में 50 अरब डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लाने का संकल्प लिया है। इसके बाद के 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर निवेश का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से विदेशी पूँजी आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

अगले 15 वर्षों में 10 लाख रोज़गार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य भी रखा गया है। अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ संरचना के दीर्घकालिक रूप से स्थिर रहने से कारोबारी आत्मविश्वास के साथ निवेश कर सकेंगे, सप्लाई चेन विकसित कर सकेंगे और भविष्य की योजनाएँ बना सकेंगे।

एकीकृत मूल्य शृंखलाओं पर ज़ोर

वाणिज्य सचिव ने भारतीय कंपनियों से ईएफटीए देशों की कंपनियों के साथ मिलकर कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक फैली एकीकृत मूल्य शृंखलाएँ (Integrated Value Chains) विकसित करने की अपील की। उनके अनुसार, ऐसी साझेदारियाँ दोनों पक्षों की प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक विश्वसनीयता को मज़बूती देंगी।

अग्रवाल ने कहा, 'यदि आप इस बाज़ार के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना सकते हैं, तो आप दुनिया के किसी भी बाज़ार के लिए तैयार हैं।' यह टिप्पणी ईएफटीए बाज़ार को एक वैश्विक गुणवत्ता मानक की कसौटी के रूप में रेखांकित करती है।

कृषि निर्यात के नए अवसर

गौरतलब है कि ईएफटीए देशों ने कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य कर दिया है। वाणिज्य सचिव ने इसे भारतीय कृषि निर्यातकों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में चिह्नित किया। इससे उन क्षेत्रों को विशेष फ़ायदा हो सकता है जो अब तक यूरोपीय बाज़ारों में प्रवेश की ऊँची शुल्क दीवारों के कारण पिछड़े हुए थे।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत का कृषि निर्यात उच्च-मूल्य वाले बाज़ारों में विस्तार की राह तलाश रहा है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्यातक इस खिड़की का कितनी तत्परता और तैयारी के साथ उपयोग करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ये 15 वर्ष की लंबी समयसीमा में फैले हैं — जिसका अर्थ है कि जवाबदेही के तंत्र और मील के पत्थर अभी से स्पष्ट होने चाहिए। गौरतलब है कि भारत के पिछले कई द्विपक्षीय व्यापार समझौते — जिनमें ASEAN FTA भी शामिल है — अपेक्षित निर्यात वृद्धि देने में कम पड़े और कुछ मामलों में व्यापार घाटा उलटा बढ़ा। असली परीक्षण यह है कि भारतीय MSME और कृषि निर्यातक ईएफटीए की शून्य-शुल्क खिड़की का उपयोग करने के लिए गुणवत्ता और प्रमाणन मानकों को कितनी जल्दी अपना पाते हैं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौता क्या है?
भारत-ईएफटीए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के चार सदस्य देशों — आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड — के बीच हुआ व्यापार एवं निवेश करार है, जो 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ है। इसमें टैरिफ रियायत, FDI लक्ष्य और रोज़गार सृजन के प्रावधान शामिल हैं।
टीईपीए से भारतीय निर्यातकों को क्या फ़ायदा होगा?
ईएफटीए देशों ने 92.2% टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, जिससे भारत के 99.6% निर्यात को लाभ मिलेगा। गैर-कृषि उत्पादों को लगभग पूर्ण बाज़ार पहुँच मिली है और कई कृषि उत्पादों पर शुल्क शून्य किया गया है।
ईएफटीए देश भारत में कितना निवेश करेंगे?
समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर FDI और उसके बाद के 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य रखा है। कुल मिलाकर 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख रोज़गार सृजित करने की प्रतिबद्धता है।
टीईपीए में भारत ने क्या प्रतिबद्धताएँ दी हैं?
भारत ने 82.7% टैरिफ लाइनों पर रियायतें देने की प्रतिबद्धता जताई है, जो ईएफटीए देशों के 95.3% निर्यात को कवर करती है। इससे ईएफटीए देशों की कंपनियों को भी भारतीय बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलेगी।
टीईपीए की पहली वर्षगाँठ पर क्या चर्चा हो रही है?
7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक में ईएफटीए के चारों सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद थे। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने निर्यातकों को एकीकृत मूल्य शृंखलाएँ विकसित करने और समझौते का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्र प्रेस
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