भारत-ईएफटीए टीईपीए से नॉर्वे निवेशकों को बड़ा मौका, 15 वर्षों में $100 अरब निवेश और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) और भारत की मजबूत आर्थिक विकास दर ने नॉर्वे के निवेशकों के लिए विनिर्माण से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा तक कई क्षेत्रों में नए द्वार खोल दिए हैं। उद्योग जगत के आकलनों के अनुसार, यह साझेदारी दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को एक नई ऊँचाई पर ले जाने की क्षमता रखती है।
टीईपीए की मुख्य विशेषताएँ
अक्टूबर 2025 से लागू इस समझौते में 15 वर्षों में $100 अरब (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है। इसके साथ ही भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने का अनुमान है, जो विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति मज़बूत करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।
समझौते का उद्देश्य व्यापार उदारीकरण को प्रोत्साहित करना, निवेश प्रवाह को सुगम बनाना और नवाचार, स्थिरता तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि नॉर्वे की तकनीकी दक्षता और पूंजी-गहन उद्योगों की ताकत को भारत के विशाल बाज़ार और विकास महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़ने का यह एक सुनहरा अवसर है।
प्रमुख क्षेत्र जहाँ बढ़ेगा सहयोग
टीईपीए के तहत सहयोग के लिए जिन क्षेत्रों की पहचान की गई है, उनमें विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस, समुद्री सेवाएँ, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), फिनटेक और वित्तीय सेवाएँ शामिल हैं।
गौरतलब है कि भारत की तेज़ी से विस्तार करती डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल भुगतान प्रणाली नॉर्वे की कंपनियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन रही है, क्योंकि यह उन्हें दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता बाज़ारों में प्रवेश का सीधा रास्ता देती है।
भारत की विकास दर और निवेश परिदृश्य
ईवाई इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2030 तक औसतन 6.5 प्रतिशत के आसपास बनी रहने का अनुमान है। साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि दशक के अंत तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मज़बूत घरेलू माँग, बढ़ते निवेश, तेज़ी से विकसित हो रहा बुनियादी ढाँचा और कारोबार सुगमता के लिए किए जा रहे सुधार इस वृद्धि के मुख्य आधार हैं। विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से भारत द्वारा उठाए गए नीतिगत कदम भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भूमिका को मज़बूत करने के लिए कई बहुपक्षीय समझौतों पर काम कर रहा है। टीईपीए को भारत-नॉर्वे आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, और विशेषज्ञों के अनुसार इसके ज़मीनी क्रियान्वयन पर ही इस साझेदारी की वास्तविक सफलता निर्भर करेगी।