ओस्लो में भारत-नॉर्वे बिजनेस समिट: PM मोदी ने TEPA के तहत $100 अरब निवेश और 10 लाख नौकरियों का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मई 2025 को ओस्लो में आयोजित भारत-नॉर्वे बिजनेस और रिसर्च समिट में हिस्सा लिया और दोनों देशों के व्यावसायिक समुदाय से नई साझेदारियाँ बनाने तथा आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाई देने की अपील की। इस उच्चस्तरीय आयोजन में नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे भी उपस्थित रहे। समिट में 50 से अधिक कंपनियों के सीईओ सहित दोनों देशों के 250 से अधिक व्यावसायिक और शोध प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
समिट की पृष्ठभूमि और महत्व
यह समिट इंडिया-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के लागू होने के बाद द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में आई तेज़ी की पृष्ठभूमि में आयोजित हुई। मुख्य सत्र से पहले ओस्लो में चार अलग-अलग राउंडटेबल सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें हेल्थकेयर इनोवेशन, समुद्री सहयोग, बैटरी और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, डिजिटलाइज़ेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और विंड एनर्जी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
मोदी का मुख्य संदेश: $100 अरब निवेश और 10 लाख नौकरियाँ
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने TEPA के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में हुई बढ़ोतरी की सराहना की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दोनों पक्षों के हितधारकों को TEPA के तहत 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश लक्ष्य को हासिल करने और इसके परिणामस्वरूप भारत में 10 लाख नौकरियाँ सृजित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने भारत की तेज़ विकास गति, जनसांख्यिकीय लाभ, प्रतिभाशाली युवा शक्ति, निवेशक-अनुकूल नियामक ढाँचे और प्रतिस्पर्धी संघवाद को देश की प्रमुख ताकत बताया।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र और ग्रीन ट्रांजिशन
प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे के निवेशकों को विशेष रूप से ब्लू इकॉनमी, शिपबिल्डिंग, ग्रीन ट्रांजिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य-तकनीक, ज़रूरी खनिज और स्टार्ट-अप्स जैसे क्षेत्रों में भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत के व्यापक ग्रीन ट्रांजिशन एजेंडे पर भी प्रकाश डाला, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी में तेज़ विस्तार शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो के अपने लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
नॉर्वे की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश, समुद्री डीकार्बोनाइज़ेशन, महासागरों के सतत विकास और जलवायु वित्तपोषण में नॉर्वे की वैश्विक नेतृत्व भूमिका की सराहना की। समिट के दौरान भारतीय और नॉर्वेजियन कंपनियों तथा संस्थाओं के बीच कई व्यावसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, हालाँकि उनका विस्तृत ब्यौरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका।
आगे की राह
गौरतलब है कि TEPA के लागू होने के बाद यह पहला बड़ा द्विपक्षीय व्यावसायिक मंच है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने का प्रयास करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉर्वे की समुद्री और ऊर्जा विशेषज्ञता भारत के विकास लक्ष्यों के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है, और आने वाले महीनों में इस साझेदारी के ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं।