भारत का व्यापार घाटा घटा: निर्यात में वृद्धि और सेवाओं के अधिशेष का असर
सारांश
Key Takeaways
- भारत का व्यापार घाटा 21 अरब डॉलर तक घटा।
- निर्यात में 6 प्रतिशत वृद्धि हुई।
- कच्चे तेल का आयात 6 प्रतिशत घटा।
- सोने के आयात में 59 प्रतिशत की गिरावट आई।
- सेवा क्षेत्र का अधिशेष घाटे को संतुलित कर रहा है।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति मार्च 2026 में मजबूत बनी रही, क्योंकि सामान (गुड्स) का व्यापार घाटा कम होकर 21 अरब डॉलर रह गया। यह कमी मुख्य रूप से कीमती धातुओं के आयात में तेज गिरावट और निर्यात में सुधार के कारण हुई। इसके अतिरिक्त, मजबूत सर्विस सेक्टर का अधिशेष इस घाटे को संतुलित करने में सहायक रहा। यह जानकारी गुरुवार को जारी एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत का कुल आयात लगभग 6 प्रतिशत घटकर 59.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि कुल निर्यात 6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में नेट सर्विस एक्सपोर्ट 18.2 अरब डॉलर हो गया और पूरे वित्त वर्ष 2026 में इसमें 13 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि देखी गई।
यह ध्यान देने योग्य है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, तेल आयात में लगभग 6 प्रतिशत की मासिक कमी आई। इसका कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना बताया जा रहा है, जिससे आयात की मात्रा में 35-40 प्रतिशत की कमी आई। वित्त वर्ष 2026 में कुल निर्यात में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें अमेरिका के टैरिफ का असर नए बाजारों में निर्यात बढ़ाकर संतुलित किया गया।
गुड्स ट्रेड डेफिसिट में कमी का मुख्य कारण सोने के आयात में 59 प्रतिशत और चांदी के आयात में 63 प्रतिशत की गिरावट रही।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण कच्चे तेल के आयात में 35-40 प्रतिशत तक कमी आई। इसके विपरीत, तेल निर्यात 51 प्रतिशत बढ़कर 5.2 अरब डॉलर हो गया, जो मई 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है।
मध्य पूर्व में तनाव के चलते सऊदी अरब और यूएई को निर्यात में क्रमशः 44 प्रतिशत और 60 प्रतिशत की गिरावट का सामना करना पड़ा। इसका प्रभाव रत्न और आभूषण निर्यात पर भी पड़ा, जो लगभग 22 प्रतिशत घट गया।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए आंका गया है कि यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी का लगभग 1.7 प्रतिशत रह सकता है और भुगतान संतुलन (बीओपी) में 35 अरब डॉलर से अधिक की कमी हो सकती है।
साथ ही, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में सर्विस निर्यात मजबूत बना रहा, जिसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हालाँकि, यदि मध्य पूर्व संकट लंबा चलता है, तो वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण इस सेक्टर पर दबाव आ सकता है।