पीयूष गोयल बोले — भारत-अमेरिका संबंध और मज़बूत होंगे, व्यापार समझौतों में कोई बड़ी बाधा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी दोनों देशों में किसी भी राजनीतिक बदलाव से ऊपर है और आने वाले वर्षों में यह और प्रगाढ़ होती जाएगी। गोयल ने कहा कि फिलहाल उन्हें अमेरिका के साथ समझौतों की राह में कोई बड़ी रुकावट नज़र नहीं आती।
मंत्री की मुख्य टिप्पणियाँ
फोरम में बोलते हुए गोयल ने कहा, 'मेरे विचार में दोनों देशों के बीच साझेदारी बेहद ठोस और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों बड़े लोकतांत्रिक देश हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और निकट भविष्य में भी यही स्थिति बनी रहेगी।
मंत्री ने कहा, 'कुल मिलाकर, मुझे अमेरिका के साथ समझौते करने में कोई बड़ी बाधा दिखाई नहीं देती।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य को लेकर विश्लेषक अनिश्चितता जता रहे हैं।
संबंधों की व्यापकता — व्यापार से परे
गोयल ने यह स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंध केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने संयुक्त रक्षा अभ्यास, प्रौद्योगिकी सहयोग, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं और लोगों के बीच संपर्क को इस साझेदारी के अहम स्तंभ बताया।
उनके अनुसार इस संबंध की नींव 'हमारी आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं' पर टिकी है, जो इसे दीर्घकालिक स्थायित्व प्रदान करती है।
व्यापार समझौतों में बड़ी छलांग
मंत्री ने बताया कि पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते (Preferential Trade Agreements) संपन्न किए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 तक भारत को केवल लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं तक वरीयता प्राप्त बाज़ार पहुँच थी।
आज यह आँकड़ा बढ़कर लगभग 70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं तक पहुँच गया है — जो भारत की वैश्विक व्यापार महत्वाकांक्षाओं में सात गुना विस्तार दर्शाता है।
वैश्विक संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे दौर में आया है जब दुनिया के कई देश अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलावों को लेकर अपनी रणनीतियाँ पुनः परिभाषित कर रहे हैं। गोयल ने अन्य देशों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका की मज़बूत साझेदारी क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता का आधार है।
मंत्री ने स्पष्ट किया, 'यह एक स्थिर और मजबूत साझेदारी है और मुझे नहीं लगता कि दुनिया के बाकी देशों को इसे लेकर चिंता करने की ज़रूरत है।' आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में नए समझौतों की संभावना और प्रबल होती दिख रही है।