14 अक्टूबर 2026
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पीयूष गोयल बोले — भारत-अमेरिका संबंध और मज़बूत होंगे, व्यापार समझौतों में कोई बड़ी बाधा नहीं

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पीयूष गोयल बोले — भारत-अमेरिका संबंध और मज़बूत होंगे, व्यापार समझौतों में कोई बड़ी बाधा नहीं

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ब्लूमबर्ग फोरम में दो-टूक कहा — भारत-अमेरिका साझेदारी राजनीति से ऊपर है। व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी में गहरे होते सहयोग और 38 देशों के साथ व्यापार समझौतों के साथ, भारत की वैश्विक आर्थिक पहुँच 2014 के मुकाबले सात गुना बढ़ चुकी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 14 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम, नई दिल्ली में यह बयान दिया।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है; गोयल को दोनों देशों के बीच समझौतों में कोई बड़ी बाधा नज़र नहीं आती।
भारत-अमेरिका संबंध व्यापार से परे — रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति शृंखला तक विस्तारित हैं।
पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते किए।
2014 में भारत की वरीयता प्राप्त बाज़ार पहुँच ~10 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी तक थी; अब ~70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी तक पहुँच गई है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी दोनों देशों में किसी भी राजनीतिक बदलाव से ऊपर है और आने वाले वर्षों में यह और प्रगाढ़ होती जाएगी। गोयल ने कहा कि फिलहाल उन्हें अमेरिका के साथ समझौतों की राह में कोई बड़ी रुकावट नज़र नहीं आती।

मंत्री की मुख्य टिप्पणियाँ

फोरम में बोलते हुए गोयल ने कहा, 'मेरे विचार में दोनों देशों के बीच साझेदारी बेहद ठोस और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों बड़े लोकतांत्रिक देश हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और निकट भविष्य में भी यही स्थिति बनी रहेगी।

मंत्री ने कहा, 'कुल मिलाकर, मुझे अमेरिका के साथ समझौते करने में कोई बड़ी बाधा दिखाई नहीं देती।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य को लेकर विश्लेषक अनिश्चितता जता रहे हैं।

संबंधों की व्यापकता — व्यापार से परे

गोयल ने यह स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंध केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने संयुक्त रक्षा अभ्यास, प्रौद्योगिकी सहयोग, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं और लोगों के बीच संपर्क को इस साझेदारी के अहम स्तंभ बताया।

उनके अनुसार इस संबंध की नींव 'हमारी आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं' पर टिकी है, जो इसे दीर्घकालिक स्थायित्व प्रदान करती है।

व्यापार समझौतों में बड़ी छलांग

मंत्री ने बताया कि पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते (Preferential Trade Agreements) संपन्न किए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 तक भारत को केवल लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं तक वरीयता प्राप्त बाज़ार पहुँच थी।

आज यह आँकड़ा बढ़कर लगभग 70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं तक पहुँच गया है — जो भारत की वैश्विक व्यापार महत्वाकांक्षाओं में सात गुना विस्तार दर्शाता है।

वैश्विक संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे दौर में आया है जब दुनिया के कई देश अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलावों को लेकर अपनी रणनीतियाँ पुनः परिभाषित कर रहे हैं। गोयल ने अन्य देशों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका की मज़बूत साझेदारी क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता का आधार है।

मंत्री ने स्पष्ट किया, 'यह एक स्थिर और मजबूत साझेदारी है और मुझे नहीं लगता कि दुनिया के बाकी देशों को इसे लेकर चिंता करने की ज़रूरत है।' आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में नए समझौतों की संभावना और प्रबल होती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन देशों को दिया गया है जो अमेरिकी राजनीतिक उठा-पटक के बीच भारत की दिशा को लेकर अनिश्चित हैं। हालाँकि व्यापार समझौतों का विस्तार प्रभावशाली है — 10 से 70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी तक — लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये समझौते ज़मीनी व्यापार वृद्धि और रोज़गार में कितना परिवर्तित होते हैं। भारत-अमेरिका संबंधों की मज़बूती का दावा वर्षों से दोहराया जाता रहा है, फिर भी द्विपक्षीय व्यापार विवाद — जैसे टैरिफ और जीएसपी — समय-समय पर उभरते रहे हैं। बिना ठोस व्यापार समझौते की रूपरेखा के, 'कोई बाधा नहीं' की बात आशावाद है, नीति नहीं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या कहा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 14 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी दोनों देशों में किसी भी राजनीतिक बदलाव के बावजूद और मज़बूत होती जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते करने में उन्हें कोई बड़ी बाधा नज़र नहीं आती।
भारत-अमेरिका संबंध केवल व्यापार तक सीमित हैं?
नहीं। गोयल के अनुसार यह साझेदारी व्यापार से आगे बढ़कर रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं और लोगों के बीच संपर्क तक फैली हुई है। दोनों देश संयुक्त रक्षा अभ्यास भी करते हैं।
भारत ने कितने देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते किए हैं?
पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते (Preferential Trade Agreements) संपन्न किए हैं। इससे भारत की वरीयता प्राप्त बाज़ार पहुँच 2014 के ~10 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी से बढ़कर अब ~70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी तक पहुँच गई है।
क्या राजनीतिक बदलाव भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं?
गोयल ने कहा कि दोनों देशों में राजनीतिक सोच में किसी भी बदलाव के बावजूद संबंध मज़बूत बने रहेंगे। उनके अनुसार इस साझेदारी की ताकत 'आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं' पर आधारित है, जो इसे दीर्घकालिक स्थायित्व देती है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम क्या है और यह बयान वहाँ क्यों दिया गया?
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम एक वैश्विक आर्थिक नीति मंच है जहाँ प्रमुख नेता और नीति-निर्माता अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इस फोरम का आयोजन हुआ, जहाँ गोयल ने भारत की व्यापार नीति और द्विपक्षीय संबंधों पर यह महत्वपूर्ण बयान दिया।
राष्ट्र प्रेस
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