13 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नंदन नीलेकणि: एआई के जन विस्तार में भारत करेगा दुनिया का नेतृत्व, 'विनर टेक्स ऑल' नहीं यह क्षेत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नंदन नीलेकणि: एआई के जन विस्तार में भारत करेगा दुनिया का नेतृत्व, 'विनर टेक्स ऑल' नहीं यह क्षेत्र

सारांश

नंदन नीलेकणि का दावा है कि एआई 'विनर टेक्स ऑल' नहीं है — और भारत, अपने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की बदौलत, इस तकनीक को सबसे बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँचाने में दुनिया का नेतृत्व करने की स्थिति में है। पीएम मोदी ने भी उसी मंच से $700 अरब विदेशी मुद्रा भंडार का उल्लेख कर भारत के आत्मविश्वास को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

नंदन नीलेकणि ने 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत एआई के जन विस्तार में विश्व का नेतृत्व करेगा।
नीलेकणि के अनुसार एआई 'विनर टेक्स ऑल' क्षेत्र नहीं है — इकोसिस्टम में बड़ी संख्या में कंपनियों और नवाचारों के लिए जगह है।
उन्होंने आईटी कंपनियों के भविष्य पर निराशावाद को 'डिजास्टर मार्केटिंग' बताया और माँग में वृद्धि का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने उसी मंच पर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के 700 अरब डॉलर से अधिक होने की बात कही।
पीएम ने कोविड काल में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने और एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी का उल्लेख किया।

इन्फोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणि ने 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आम लोगों तक पहुँचाने और उसके उपयोग को व्यापक बनाने में विश्व का नेतृत्व करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और बड़े पैमाने पर तकनीकी समाधान लागू करने की सिद्ध क्षमता इस दिशा में उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।

एआई 'विनर टेक्स ऑल' नहीं

नीलेकणि ने कहा कि आज अधिकांश लोग एआई को केवल जीपीटी मॉडल्स के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में कोई भी एकल कंपनी या खिलाड़ी इन मॉडल्स पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रख सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र किसी एक की इजारेदारी वाला नहीं है — एआई इकोसिस्टम में बड़ी संख्या में कंपनियों और नवाचारों के लिए पर्याप्त जगह है।

उन्होंने कहा, "इस तकनीक को बोतल में बंद नहीं किया जा सकता। अधिक चिप्स आएंगे, नई तकनीकें विकसित होंगी और यह 'विनर टेक्स ऑल' वाला क्षेत्र नहीं है।" यह टिप्पणी उस बहस के बीच महत्वपूर्ण है जिसमें कुछ विश्लेषक एआई के केंद्रीकरण और बड़ी टेक कंपनियों के वर्चस्व की आशंका जता रहे हैं।

भारत की डिजिटल ताकत बनेगी एआई की नींव

नीलेकणि के अनुसार, भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना निर्माण और बड़े पैमाने पर तकनीकी समाधानों को लागू करने में जो अनुभव अर्जित किया है, वही एआई के जन विस्तार में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर चल रही नकारात्मक चर्चाओं को "डिजास्टर मार्केटिंग" करार दिया और कहा कि इन्फोसिस जैसी कंपनियों के लिए माँग बढ़ रही है तथा आने वाले समय में और अधिक काम उपलब्ध होगा।

पीएम मोदी ने गिनाई भारत की आर्थिक मजबूती

इसी मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज़्यादा है। हमारा बैंकिंग सिस्टम कई देशों के मुकाबले ज़्यादा मज़बूत स्थिति में है। दोस्तों, यह मज़बूती भारत की सॉवरेन रेटिंग में हुए सुधारों से झलकती है। आज भारत का आत्मविश्वास अभूतपूर्व स्तर पर है। हम स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधार लागू कर रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने मानवता को सशक्त बनाने का रास्ता चुना है और कोविड काल में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का उल्लेख किया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंचों पर भारत की सॉफ्ट पावर और तकनीकी नेतृत्व की भूमिका को लेकर बड़ी चर्चा है।

एआई इम्पैक्ट समिट और वैश्विक सराहना

प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले भारत ने एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में न केवल मानवता के लिए एआई के उपयोग पर विचार हुआ, बल्कि यह भी चर्चा हुई कि एआई से पशुओं को किस प्रकार लाभ पहुँचाया जा सकता है — एक असामान्य और व्यापक दृष्टिकोण जिसे वैश्विक मीडिया ने उल्लेखनीय माना।

डिजिटल कनेक्टिविटी और समावेशी विकास

मोदी ने कहा कि 2014 के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता और सुलभ बनाने पर विशेष ध्यान दिया। परिणामस्वरूप आज छोटे शहरों के छात्र डिजिटल शिक्षा हासिल कर सकते हैं, गाँव का दुकानदार नए ग्राहकों तक पहुँच सकता है और युवा ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के ज़रिए नए कौशल सीख सकते हैं। उन्होंने कहा, "आज नवाचार के अवसर पहले की तुलना में कहीं अधिक लोगों तक पहुँच रहे हैं।"

गौरतलब है कि नीलेकणि और मोदी का एक ही मंच से एआई पर एकजुट स्वर भारत की तकनीकी राजनीति में एक उभरती हुई सहमति को दर्शाता है — जहाँ सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना को निजी एआई नवाचार के साथ जोड़ने की रणनीति केंद्र में है। आने वाले महीनों में नीति और निवेश दोनों स्तरों पर इसके परिणाम सामने आएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह असुविधाजनक सवाल को टाल देता है — क्या भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्षमता वास्तव में एआई की जटिलताओं के लिए तैयार है, या यह यूपीआई युग की सफलता का अति विस्तार है? यह ऐसे समय में आया है जब भारत के पास अपना कोई प्रतिस्पर्धी फ्रंटियर एआई मॉडल नहीं है और नीति निर्माता अभी भी डेटा शासन और कंप्यूट क्षमता पर संघर्ष कर रहे हैं। मोदी और नीलेकणि का एक ही मंच से एकजुट स्वर एक रणनीतिक आख्यान बना रहा है — लेकिन आख्यान और क्रियान्वयन के बीच की खाई को भरने के लिए ठोस नीतिगत कदम अभी बाकी हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदन नीलेकणि ने एआई के बारे में क्या कहा?
नंदन नीलेकणि ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर एआई को आम लोगों तक पहुँचाने में दुनिया का नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई 'विनर टेक्स ऑल' क्षेत्र नहीं है और इसमें बड़ी संख्या में कंपनियों के लिए अवसर हैं।
भारत एआई विस्तार में क्यों अग्रणी हो सकता है?
नीलेकणि के अनुसार, भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना निर्माण और बड़े पैमाने पर तकनीकी समाधान लागू करने का अनुभव एआई के जन विस्तार में सहायक होगा। यूपीआई, आधार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे उदाहरण भारत की इस क्षमता को प्रमाणित करते हैं।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है और देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत है। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी और कोविड काल में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया।
नीलेकणि ने आईटी कंपनियों के भविष्य पर क्या कहा?
नीलेकणि ने आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर चल रही नकारात्मक चर्चाओं को 'डिजास्टर मार्केटिंग' बताया। उन्होंने कहा कि इन्फोसिस जैसी कंपनियों के लिए माँग बढ़ रही है और आने वाले समय में और अधिक काम उपलब्ध होगा।
एआई इम्पैक्ट समिट क्या था?
एआई इम्पैक्ट समिट भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था जिसमें मानवता के लिए एआई के उपयोग पर विचार हुआ। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार इस सम्मेलन में पशुओं के लिए एआई के उपयोग पर भी चर्चा हुई और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले