नंदन नीलेकणि: एआई को जन-जन तक पहुँचाने में भारत करेगा दुनिया का नेतृत्व
सारांश
मुख्य बातें
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि भारत बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आम लोगों तक पहुँचाने और उसके व्यापक उपयोग में वैश्विक नेतृत्व करने की स्थिति में है। उनके अनुसार, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण में भारत की दशकों की विशेषज्ञता इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
एआई 'विनर टेक्स ऑल' क्षेत्र नहीं: नीलेकणि
नीलेकणि ने कहा कि आज अधिकांश लोग एआई को केवल जीपीटी मॉडल्स के नज़रिए से देखते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कोई भी एकल कंपनी या समूह इन मॉडलों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रख सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ी संख्या में कंपनियों और नवाचारों के लिए पर्याप्त जगह है।
नीलेकणि ने कहा, 'इस तकनीक को बोतल में बंद नहीं किया जा सकता। अधिक चिप्स आएंगे, नई तकनीकें विकसित होंगी और यह 'विनर टेक्स ऑल' वाला क्षेत्र नहीं है।' यह टिप्पणी उन आशंकाओं के बीच महत्वपूर्ण है जिनमें कहा जाता है कि एआई उद्योग में मुट्ठीभर अमेरिकी और चीनी कंपनियाँ ही वर्चस्व स्थापित कर लेंगी।
भारत की डिजिटल क्षमता — एआई विस्तार की नींव
नीलेकणि ने रेखांकित किया कि भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और बड़े पैमाने पर तकनीकी समाधानों को लागू करने में जो अनुभव अर्जित किया है, वही एआई के विस्तार में भी उसकी ताकत बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन्फोसिस जैसी आईटी कंपनियों के लिए आने वाले समय में माँग और अधिक बढ़ेगी।
उनके अनुसार, आईटी क्षेत्र के भविष्य को लेकर जो निराशावाद फैलाया जा रहा है, वह केवल 'डिजास्टर मार्केटिंग' है। गौरतलब है कि नीलेकणि स्वयं आधार और यूपीआई जैसी परियोजनाओं के सूत्रधार रहे हैं, जो भारत के जन-केंद्रित डिजिटल मॉडल के प्रमुख उदाहरण हैं।
पीएम मोदी की टिप्पणी: भारत का आत्मविश्वास अभूतपूर्व स्तर पर
इसी फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आज हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज़्यादा है। हमारा बैंकिंग सिस्टम कई देशों के मुकाबले ज़्यादा मज़बूत स्थिति में है। आज भारत का आत्मविश्वास अभूतपूर्व स्तर पर है। हम स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधार लागू कर रहे हैं।'
मोदी ने यह भी याद दिलाया कि कोविड काल में भारत ने 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई और अपनी विनिर्माण क्षमता से अन्य देशों की सहायता की। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवता को सशक्त बनाने का रास्ता चुना है।
एआई इम्पैक्ट समिट और वैश्विक पहचान
प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले भारत ने एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। इस सम्मेलन में न केवल मानवता के लिए एआई के उपयोग पर, बल्कि पशुओं के कल्याण में एआई की भूमिका पर भी चर्चा हुई — जो एक असामान्य परंतु विचारोत्तेजक परिप्रेक्ष्य था।
मोदी ने कहा, '2014 के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता और सुलभ बनाने पर ध्यान दिया।' इसके परिणामस्वरूप आज छोटे शहरों के छात्र डिजिटल शिक्षा हासिल कर रहे हैं, गाँव के दुकानदार नए ग्राहकों तक पहुँच पा रहे हैं और युवा ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के ज़रिए नए कौशल सीख रहे हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई के शासन और वितरण को लेकर बहस तेज़ हो रही है। नीलेकणि और मोदी दोनों की टिप्पणियाँ संकेत देती हैं कि भारत एआई को केवल उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और समावेशी मॉडल के निर्माता के रूप में देखना चाहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यूपीआई-आधार-डिजीलॉकर जैसी पारिस्थितिकी तंत्र क्षमता, यदि एआई से जुड़ती है, तो यह करोड़ों नागरिकों के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकती है।