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नंदन नीलेकणी: भारत को एआई में एलएलएम-चिप नहीं, वास्तविक उपयोग की एप्लीकेशन पर करना चाहिए फोकस

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नंदन नीलेकणी: भारत को एआई में एलएलएम-चिप नहीं, वास्तविक उपयोग की एप्लीकेशन पर करना चाहिए फोकस

सारांश

इन्फोसिस सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी का साफ़ संदेश — भारत की एआई जीत चिप या एलएलएम बनाने में नहीं, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में वास्तविक एप्लीकेशन तैनात करने में है। डीपीआई की सफलता को ब्लूप्रिंट मानकर चलें, तो भारत दुनिया की 'एआई यूज-केस राजधानी' बन सकता है।

मुख्य बातें

नंदन नीलेकणी ने 6 अगस्त 2026 को एनसीएईआर इंडिया पॉलिसी फोरम में कहा कि भारत को एआई में एलएलएम और एडवांस चिप के बजाय वास्तविक उपयोग की एप्लीकेशन पर फोकस करना चाहिए।
उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई तैनाती को भारत की प्राथमिकता बताया।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की सफलता को एआई अपनाने के लिए आदर्श ब्लूप्रिंट बताया।
भारत में स्टार्टअप की संख्या एक दशक में 10,000 से बढ़कर 1,50,000 से अधिक हो गई है; 2035 तक 10 लाख स्टार्टअप का अनुमान।
नीलेकणी ने डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाने के लिए तेज़ आर्थिक विकास और शहरीकरण, जलवायु, स्वास्थ्य व शिक्षा चुनौतियों के समाधान पर भी ज़ोर दिया।

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एनसीएईआर इंडिया पॉलिसी फोरम 2026 में कहा कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में एडवांस चिप और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) विकसित करने के बजाय वास्तविक उपयोग की एप्लीकेशन बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत के पास दुनिया की 'एआई यूज-केस कैपिटल' बनने का ऐतिहासिक अवसर है।

भारत की रणनीतिक स्थिति

नीलेकणी ने तर्क दिया कि पश्चिमी देश फिलहाल एआई के बुनियादी ढाँचे — एलएलएम, अधिक चिप और डेटा सेंटर — पर अपना ध्यान और संसाधन लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, "आने वाले समय में इन्फ्रास्ट्रक्चर आम चीज बन जाएगी। वैल्यू एप्लीकेशन लेयर की तरफ चली जाती है, और भारत के पास दुनिया की एआई यूज-केस राजधानी बनने का मौका है।"

उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई की तैनाती को भारत की प्राथमिकता बताया, जहाँ जन-उपयोग की गुंजाइश सबसे अधिक है।

डीपीआई की सफलता — एआई के लिए ब्लूप्रिंट

नीलेकणी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) में भारत की उपलब्धियों को एआई अपनाने के लिए एक आदर्श मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि भारत में टेक्नोलॉजी केवल व्यावसायिक उद्देश्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक अरब से अधिक लोगों ने इसका उपयोग किया है। यह व्यापक जन-पहुँच भारत को एआई के अनुप्रयोग स्तर पर वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करती है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम और रोज़गार

नीलेकणी ने रेखांकित किया कि अगले दशक में भारत की रोज़गार वृद्धि में बड़ी कंपनियों की तुलना में उद्यमशीलता की भूमिका अधिक निर्णायक होगी। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले भारत में 10,000 से कम स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर 1,50,000 से अधिक हो गए हैं।

उनके अनुसार, यदि यह इकोसिस्टम 20 प्रतिशत की वार्षिक दर से भी बढ़ता रहा, तो 2035 तक देश में 10 लाख से अधिक स्टार्टअप होंगे — जो न केवल उद्यमी पैदा करेंगे, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियों के अवसर भी सृजित करेंगे।

व्यापक आर्थिक चुनौतियाँ

नीलेकणी ने चेताया कि एआई की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए भारत को तेज़ आर्थिक विकास बनाए रखना होगा, ताकि डेमोग्राफिक डिविडेंड — यानी कामकाजी उम्र की विशाल आबादी — का समुचित उपयोग हो सके। साथ ही, उन्होंने शहरीकरण, जलवायु जोखिम, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और उत्पादकता जैसी संरचनात्मक चुनौतियों को भी प्राथमिकता से हल करने की ज़रूरत बताई।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई में निवेश की होड़ मची है और भारत सरकार भी राष्ट्रीय एआई मिशन के तहत इस क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है। नीलेकणी का यह दृष्टिकोण भारत की तकनीकी नीति की दिशा पर एक महत्त्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्विरोध है — एप्लीकेशन लेयर पर टिकाऊ बढ़त तब तक कमज़ोर रहती है जब तक इन्फ्रास्ट्रक्चर परतें विदेशी मंचों पर निर्भर हों। डीपीआई की सफलता इसलिए संभव हुई क्योंकि भारत ने उसकी बुनियाद खुद बनाई; एआई में वही स्वायत्तता एप्लीकेशन-केवल रणनीति से नहीं मिलेगी। साथ ही, '10 लाख स्टार्टअप' का अनुमान उत्साहजनक है, पर रोज़गार की गुणवत्ता और स्थायित्व पर ध्यान दिए बिना संख्या का उत्सव अधूरा है। असली कसौटी यह होगी कि सरकार की एआई नीति इस 'एप्लीकेशन-फर्स्ट' दृष्टिकोण को नियामक और वित्तीय समर्थन कैसे देती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदन नीलेकणी ने एआई पर भारत की रणनीति के बारे में क्या कहा?
नीलेकणी ने कहा कि भारत को एआई में एडवांस चिप और एलएलएम विकसित करने के बजाय वास्तविक उपयोग की एप्लीकेशन बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई तैनात करके भारत दुनिया की 'एआई यूज-केस कैपिटल' बन सकता है।
भारत का डीपीआई अनुभव एआई के लिए कैसे उपयोगी है?
नीलेकणी के अनुसार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की सफलता — जहाँ एक अरब से अधिक लोगों ने तकनीक का उपयोग किया — एआई अपनाने के लिए एक सिद्ध ब्लूप्रिंट प्रदान करती है। यह दर्शाता है कि भारत तकनीक को व्यावसायिक दायरे से बाहर जन-स्तर पर लागू कर सकता है।
भारत में 2035 तक कितने स्टार्टअप होने का अनुमान है?
नीलेकणी ने कहा कि यदि स्टार्टअप इकोसिस्टम 20 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ता रहा, तो 2035 तक देश में 10 लाख से अधिक स्टार्टअप होंगे। वर्तमान में यह संख्या 1,50,000 से अधिक है, जो एक दशक पहले 10,000 से कम थी।
नीलेकणी ने भारत के सामने कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ गिनाईं?
उन्होंने कहा कि एआई की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए भारत को तेज़ आर्थिक विकास बनाए रखना होगा। साथ ही शहरीकरण, जलवायु जोखिम, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और उत्पादकता से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान भी प्राथमिकता पर रखना होगा।
यह बयान कहाँ और कब दिया गया?
नंदन नीलेकणी ने यह बयान 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एनसीएईआर इंडिया पॉलिसी फोरम 2026 में दिया। यह फोरम नीति-निर्माण और आर्थिक शोध पर केंद्रित एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच है।
राष्ट्र प्रेस
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