क्या भारत को 'एआई संप्रभुता' मजबूत करने के लिए सेमीकंडक्टर और एआई मॉडल पर ध्यान देना चाहिए?
सारांश
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दावोस, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा ने कहा कि भारत को अपनी 'एआई संप्रभुता' को मजबूती देने के लिए सेमीकंडक्टर, एआई मॉडल विकसित करने और उनमें रियल लाइफ एप्लिकेशन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने भारतीय उद्यमियों को यह बताया कि देश में मजबूत एआई क्षमताएं विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में दावोस में बोलते समय, अरविंद कृष्णा ने कहा कि अब छोटे और विशिष्ट कार्यों के लिए बनाए गए एआई मॉडल बड़े एआई मॉडल के समकक्ष प्रदर्शन करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि आज ऐसे छोटे एआई मॉडल का उपयोग लगभग 95 प्रतिशत हो चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए असली परिवर्तन सेमीकंडक्टर, एआई मॉडल के निर्माण और उनके उपयोग में होगा। यही ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत को बड़ी सफलता प्राप्त हो सकती है।
आईबीएम प्रमुख ने चीन के डीपसीक का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई में सफलता कई बार असफल प्रयासों के बाद मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत को हेल्थकेयर, डिफेंस और कानून जैसे क्षेत्रों में स्थानीय डेटा पर आधारित एआई सिस्टम बनाने चाहिए, ताकि देश की आवश्यकताओं के अनुसार एआई समाधान तैयार किए जा सकें। इसके साथ ही उन्होंने नए प्रयोगों और असफलता को स्वीकार करने की संस्कृति को जरूरी बताया।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां अब तेजी से एआई की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत इस समय 12 एआई मॉडल विकसित कर रहा है, जिनमें से कम से कम 4 मॉडल जल्द ही लॉन्च किए जाएंगे।
आईटी मंत्री ने कहा कि भारत छोटे लेकिन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए बनाए गए एआई मॉडल पर ध्यान दे रहा है, जो विभिन्न उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि भारत ने 70 अरब डॉलर का निवेश एआई से संबंधित बुनियादी सुविधाओं में आकर्षित किया है, जिसमें गूगल और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों के डेटा सेंटर भी शामिल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने भारत के सेमीकंडक्टर प्रोग्राम में हो रही प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में 10 सेमीकंडक्टर फैब प्लांट निर्माणाधीन हैं, 3 पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं और 4 यूनिट 2026 में व्यावसायिक रूप से काम करना प्रारंभ करेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में अनुमति देने से बड़े स्तर पर एआई कंप्यूटिंग के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त की जा सकेगी।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। भारत की सेमीकंडक्टर मांग 2022 में 33 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 117 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
सरकार की 7,280 करोड़ रुपए की योजना, जो रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) के लिए है, भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण को मजबूती प्रदान करेगी और आवश्यक रणनीतिक कच्चे माल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।