सुप्रीम कोर्ट ने सड़क गड्ढों और करंट से मौत रोकने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया।
- स्थानीय समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- बुनियादी ढांचे की देखभाल राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क पर गड्ढों, खुली विद्युत तारों से करंट लगने और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण होने वाली जानलेवा घटनाओं को रोकने के लिए निर्देश जारी करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरे देश के लिए एक समान आदेश जारी करना संभव नहीं है। ऐसी समस्याएं स्थानीय स्तर पर भिन्न होती हैं, इसलिए याचिकाकर्ता चाहें तो संबंधित हाई कोर्ट में जाकर याचिका दायर कर सकते हैं।
यह याचिका 'जनश्रुति पीपुल्स वॉयस' नामक संस्था द्वारा प्रस्तुत की गई थी। याचिका में यह मांग की गई थी कि सड़क दुर्घटनाओं, खुले तारों से करंट लगने के मामलों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक देशव्यापी मानक प्रक्रिया और दिशा-निर्देश बनाए जाएं। याचिकाकर्ता ने इन घटनाओं को रोकने हेतु सख्त नीतियों और जिम्मेदारी का निर्धारण करने की अपील की थी, क्योंकि ऐसे हादसे रोजाना हो रहे हैं और इनमें निर्दोष व्यक्तियों की जान जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला हाई कोर्ट के दायरे में आता है, जहां स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर निर्णय लिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि बुनियादी ढांचे की देखभाल और सुरक्षा के मुद्दे मुख्य रूप से राज्य सरकारों, नगर निकायों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी हैं।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देशभर में सड़कों पर गड्ढे, खुले मैनहोल और लटकते बिजली के तारों के कारण होने वाले हादसे आम हो गए हैं। कई हाई कोर्ट पहले ही ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना चुके हैं, जैसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में गड्ढों से मृत्यु होने पर मुआवजा देने का आदेश दिया था।