सेंसेक्स 1,533 अंक उछला, 74,315 पर बंद; निजी बैंक और IT शेयरों ने संभाली बाजार की कमान
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को 1,533.72 अंक यानी 2.11 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाते हुए 74,315.61 पर कारोबार समाप्त किया, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 374.65 अंक या 1.66 प्रतिशत मजबूत होकर 22,997.35 पर बंद हुआ। वैश्विक तकनीकी शेयरों में बिकवाली के बीच घरेलू बाजार के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ा, जिसने इस तेजी को हवा दी।
किन सूचकांकों ने दिखाई सबसे ज़्यादा ताकत
सत्र में सर्वाधिक बढ़त हासिल करने वाले सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.89 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.83 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 1.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ अग्रणी रहे। इनके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मेटल भी हरे निशान में रहे।
दूसरी तरफ, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लाल निशान में बंद हुए।
प्रमुख गेनर और लूजर
व्यक्तिगत शेयरों में टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, एक्सिस बैंक, इंडिगो, आईटीसी, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस और अल्ट्राटेक सीमेंट प्रमुख लाभ में रहे। केवल बीईएल, ट्रेंट और एचयूएल ही गिरावट के साथ बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप में दबाव
लार्जकैप की इस चमक के विपरीत, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 211.85 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,197.25 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 253.10 अंक यानी 1.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,131.70 पर बंद हुआ। यह विभाजन संकेत देता है कि बाजार की मौजूदा रैली का आधार अभी भी सीमित है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
बाज़ार जानकारों के अनुसार, इस तेजी की मुख्य वजह वैश्विक तकनीकी बाजारों में आई बिकवाली रही — जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अत्यधिक मूल्यांकन और अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं से प्रेरित थी। इस माहौल में घरेलू निवेशकों ने भारतीय बाजार को तुलनात्मक रूप से सुरक्षित विकल्प माना।
इसके साथ ही, बॉन्ड यील्ड में सुधार, रुपये की स्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और इक्विटी कर पर सरकार के पुनर्विचार की संभावना ने भी बाजार के सकारात्मक सेंटिमेंट को बल दिया।
आगे की राह
विश्लेषकों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बिकवाली और मिड-स्मॉलकैप में कमजोरी यह दर्शाती है कि इस उछाल में व्यापक बाज़ार भागीदारी का अभाव है। आगे की स्थिरता के लिए दूसरी तिमाही के राजस्व एवं मार्जिन परिणाम, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी और वैश्विक भू-राजनीतिक तथा मुद्रास्फीति जोखिमों के बीच तेल व मुद्रा की टिकाऊ स्थिरता निर्णायक भूमिका निभाएगी।