ईरान युद्ध के बीच निवेश रणनीति कैसे बनाएं? वॉरेन बफे की महत्वपूर्ण सलाह
सारांश
Key Takeaways
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
- वॉरेन बफे
- संकट के समय में धैर्य बनाए रखें और जल्दबाजी में निर्णय न लें।
- इतिहास ने दिखाया है कि शेयर बाजार ने हमेशा संकट का सामना किया है।
- बाजार की अल्पकालिक हलचल के बजाय दीर्घकालिक वृद्धि पर ध्यान दें।
मुंबई, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने मध्य पूर्व में एक गंभीर स्थिति उत्पन्न कर दी है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मची हुई है। इस संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे महंगाई में इजाफा होने और वैश्विक आर्थिक विकास में रुकावट का डर पैदा हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, विश्व के शेयर बाजारों पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
भारत में भी प्रमुख सूचकांक जैसे बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी ५० में भारी गिरावट देखने को मिली है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए विशेष चिंता का विषय बन गए हैं, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
इस संकट के बीच, दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस इंटरव्यू में, उन्होंने युद्ध, आर्थिक मंदी, और महामारी जैसे संकटों के दौरान निवेश के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी थी। २०२२ में पत्रकार चार्ली रोज को दिए गए इंटरव्यू में बफे ने कहा था कि दुनिया ने पहले भी कई बड़े संकट देखे हैं और आगे भी देखती रहेगी, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था और कारोबार आगे बढ़ते रहते हैं।
बफे, जो बर्कशायर हाथवे के पूर्व चेयरमैन और सीईओ रहे हैं, को दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में गिना जाता है। उनकी निवेश रणनीति का मुख्य आधार लंबी अवधि का निवेश और बाजार की अस्थिरता के दौरान धैर्य बनाए रखना है। 'ओरेकल ऑफ ओमाहा' के नाम से मशहूर बफे का मानना है कि भू-राजनीतिक संकट, आर्थिक मंदी और बाजार में गिरावट समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन ये लंबे समय में आर्थिक प्रगति को रोक नहीं पातीं।
इतिहास हमें बताता है कि शेयर बाजार ने कई बड़े संकटों का सामना किया है, जैसे महामंदी, वैश्विक वित्तीय संकट और कोविड-१९। इन मुश्किल समयों के बावजूद, वैश्विक अर्थव्यवस्था और कारोबार ने समय के साथ प्रगति की है।
वर्तमान में अमेरिका-ईरान संघर्ष दूसरे सप्ताह में पहुँच चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। लंबे समय तक युद्ध चलने और तेल बाजार में संभावित व्यवधान की आशंका से शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे समय में कई निवेशक जोखिम कम करने के लिए जल्दबाजी में फैसले लेते हैं, लेकिन अनुभवी निवेशक अक्सर लंबी अवधि के दृष्टिकोण को बनाए रखने की सलाह देते हैं।
वॉरेन बफे की निवेश फिलॉसफी यही बताती है कि बाजार की अल्पकालिक हलचल के बजाय कंपनियों की लंबी अवधि की वृद्धि पर ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि संकट भले ही कुछ समय के लिए बाजार को प्रभावित करें, लेकिन वे अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक प्रगति को पटरी से नहीं उतारते।