30 जुलाई 2026
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इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 21,000 करोड़ रुपये

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इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 21,000 करोड़ रुपये

सारांश

इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 21,831 करोड़ रुपये की निकासी की। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या असर पड़ा है।

मुख्य बातें

एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 21,831 करोड़ रुपये की निकासी की।
मार्च में डीआईआई का निवेश 32,786 करोड़ रुपये रहा।
इजरायल-ईरान युद्ध ने निवेशकों का रुख बदल दिया।
तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने तक खरीदारी की संभावना कम है।

नई दिल्ली, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल-ईरान युद्ध के बीच, पिछले सप्ताह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से २१,८३१ करोड़ रुपए की निकासी की है। यह जानकारी एक्सचेंज द्वारा जारी डेटा में सामने आई है।

युद्ध के चलते विदेशी निवेशकों का रुख स्पष्ट रूप से बदल गया है। फरवरी में, एफपीआई ने २२,६१५ करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले १७ महीनों में सबसे बड़ा विदेशी निवेश था।

फरवरी से पूर्व, लगातार तीन महीनों तक विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता बने रहे, जिन्होंने जनवरी में ३५,९६२ करोड़ रुपए, दिसंबर में २२,६११ करोड़ रुपए और नवंबर में ३,७६५ करोड़ रुपए की बिकवाली की थी।

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मार्च में भी समर्थन प्रदान किया और स्थिर एसआईपी प्रवाह तथा दीर्घकालिक घरेलू भागीदारी के बल पर लगभग ३२,७८६ करोड़ रुपए का निवेश किया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में हुई बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव थे। विश्लेषकों का कहना है कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की संभावना बढ़ गई है और ब्रेंट क्रूड की कीमत ९० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।

पिछले सप्ताह कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी थी कि यदि मध्य पूर्व में युद्ध कुछ दिनों तक जारी रहता है, तो खाड़ी देशों के निर्यातक देश आपातकालीन स्थिति घोषित कर सकते हैं, जिससे तेल की कीमत १५० डॉलर प्रति बैरल और प्राकृतिक गैस की कीमत ४० डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती है।

विश्लेषकों ने रुपए की कमजोरी और ९२ डॉलर प्रति डॉलर के स्तर से नीचे गिरने के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि का भी उल्लेख किया, जिससे पूंजी सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित हुई।

तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति, चालू खाता घाटा और मुद्रा स्थिरता के जोखिम बढ़ जाते हैं, जिसका उभरते बाजारों के प्रति विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण पर प्रभाव पड़ेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने तक विदेशी निवेशकों के शुद्ध खरीदार के रूप में लौटने की संभावना कम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफपीआई ने कितने रुपये की निकासी की?
एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 21,831 करोड़ रुपये की निकासी की।
मार्च में घरेलू संस्थागत निवेशकों का क्या रुख रहा?
मार्च में डीआईआई ने लगभग 32,786 करोड़ रुपये का निवेश किया।
इजरायल-ईरान युद्ध का बाजार पर क्या असर पड़ा?
इस युद्ध के चलते विदेशी निवेशकों का रुख बदला है, जिससे शेयर बाजार में बिकवाली हुई।
तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
तेल की कीमतें बढ़ने का कारण भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।
क्या विदेशी निवेशक फिर से खरीदारी करेंगे?
विश्लेषकों के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने तक विदेशी निवेशकों के लौटने की संभावना कम है।
राष्ट्र प्रेस
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