जेजीयू के 15वें दीक्षांत समारोह में 5,604 विद्यार्थियों को डिग्री, न्यायमूर्ति नरसिम्हा और हार्वर्ड प्रोफेसर ने दिया संदेश
सारांश
मुख्य बातें
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू), सोनीपत ने 25 और 26 जुलाई 2026 को अपने 15वें दीक्षांत समारोह का दो दिवसीय आयोजन संपन्न किया, जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के कुल 5,604 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इस समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, हार्वर्ड के प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों सहित अनेक विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
समारोह का मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम का शुभारंभ जेजीयू के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने शिक्षण, अनुसंधान, लोकसेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। इसके बाद जेजीयू के चांसलर नवीन जिंदल ने स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित किया।
नवीन जिंदल ने कहा, "भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और प्रौद्योगिकी, नवाचार, उद्यमिता, स्वास्थ्य सेवा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। लेकिन भारत की असली ताकत केवल उसकी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उसके 1.5 अरब लोग हैं। डिग्री आपको आजीविका दिला सकती है, लेकिन जीवन का उद्देश्य ही उसे वास्तविक अर्थ देता है।"
मुख्य अतिथियों के संदेश
पहले दिन के मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, "आधुनिक चुनौतियाँ युवाओं से केवल दक्षता ही नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमता भी माँगती हैं। आप जिस भी पेशे में जाएँ, आपका दायित्व कानून के शासन को मजबूत करना और एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करना होगा।"
वर्ल्डवाइड यूनिवर्सिटीज नेटवर्क की कार्यकारी निदेशक एवं ऑकलैंड विश्वविद्यालय (न्यूजीलैंड) की पूर्व कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) डॉन फ्रेशवॉटर ने कहा, "आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अधिक सक्षम होगी, लेकिन हमें सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व देना होगा। आपका भविष्य एआई की नकल करने में नहीं, बल्कि उन मानवीय गुणों को विकसित करने में है जो मशीनों में कभी नहीं हो सकते।"
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर डॉ. तरुण खन्ना ने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने का आग्रह करते हुए कहा, "जीवन हमेशा आपकी बनाई योजना के अनुसार नहीं चलता। अपनी जिज्ञासा का अनुसरण करें, असफलताओं को स्वीकार करें और हर अनुभव से सीखते हुए आगे बढ़ते रहें।"
दूसरे दिन के मुख्य अतिथि, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। ज्ञान हमें बताता है कि क्या संभव है, जबकि विवेक यह सिखाता है कि क्या उचित है। कौशल हमें आजीविका देता है, लेकिन मूल्य तय करते हैं कि वह आजीविका समाज के कितने काम आएगी।"
विश्वविद्यालय की वैश्विक उपस्थिति
संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने बताया कि इस वर्ष जेजीयू ने अपनी स्थापना के 17 वर्ष पूरे किए हैं। 2009 में एक स्कूल के साथ शुरू हुई यह संस्था आज 12 स्कूलों वाले बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हो चुकी है।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में 16,000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 51 देशों के शिक्षक यहाँ पढ़ाते हैं और 160 से अधिक देशों के छात्र यहाँ अध्ययन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने 80 से अधिक देशों के 600 से अधिक प्रमुख संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग स्थापित किया है।
ओ.पी. जिंदल की विरासत और शिक्षा का उद्देश्य
नवीन जिंदल ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना उनके पिता ओ.पी. जिंदल को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से की गई थी, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किसी भी व्यक्ति को दिया जाने वाला सबसे बड़ा उपहार मानते थे और विशेष रूप से बालिका शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।
डॉ. सिंघवी ने भी नवीन जिंदल की दूरदृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता की स्मृति में विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित कर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
समारोह का समापन
समारोह के अंत में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर दबीरू श्रीधर पटनायक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। प्रोफेसर (डॉ.) उपासना महांता, डीन (प्रवेश एवं आउटरीच), ने मुख्य अतिथियों और विशिष्ट अतिथियों का परिचय कराया। गौरतलब है कि यह समारोह जेजीयू के लिए केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि उसकी बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रतिबिंब है — और आने वाले वर्षों में यह संस्था भारत की उच्च शिक्षा में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की राह पर है।