जेजीयू ने टोक्यो में तीसरे भारत-जापान उच्च शिक्षा फोरम 2026 का आयोजन किया, AI और भविष्य के विश्वविद्यालयों पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) ने 6 जुलाई 2026 को टोक्यो में तीसरे भारत-जापान उच्च शिक्षा फोरम 2026 का सफल आयोजन किया, जिसका विषय था — 'मानव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भविष्य के विश्वविद्यालयों को आकार देना।' इस फोरम में दोनों देशों के वरिष्ठ विश्वविद्यालय प्रमुख, राजनयिक, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और छात्र एकत्रित हुए।
फोरम की पृष्ठभूमि और महत्व
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच हुए भारत-जापान शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई दिशा दी थी। इस व्यापक संदर्भ में फोरम ने यह रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रौद्योगिकी, आर्थिक सुरक्षा और जन-जन संपर्क को मजबूत करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका केंद्रीय है।
उद्घाटन सत्र: प्रमुख संबोधन
उद्घाटन सत्र की शुरुआत जेजीयू के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार के संबोधन से हुई। इसके बाद जापान के पूर्व प्रधानमंत्री हातोयामा युकिओ ने विशेष भाषण दिया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान का संबंध बौद्ध धर्म, नैतिक चिंतन और आध्यात्मिक आदान-प्रदान से निर्मित एक गहरी सभ्यतागत साझेदारी है।
हातोयामा ने 'यू-ऐ' की अवधारणा को भाईचारे, पारस्परिक सम्मान और सहयोग का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह महात्मा गांधी के अहिंसा और सर्वोदय के विचारों के साथ गहराई से मेल खाती है। उन्होंने कहा, 'युवाओं की शिक्षा हमारे भविष्य को बनाने से जुड़ी हुई है और मुझे पूरी उम्मीद है कि जेजीयू और जापानी यूनिवर्सिटी के बीच गहरे सहयोग से ज़्यादा स्टूडेंट्स आपसी लेन-देन में हिस्सा ले पाएंगे।'
टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास के चार्जे डी'अफेयर्स आर. मधु सूदन ने शैक्षणिक एवं संस्थागत सहयोग को गहरा करने के लिए भारतीय मिशन का पूर्ण समर्थन जताया। पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के पूर्व विशेष सलाहकार प्रोफेसर (डॉ.) तोमोहिको तानिगुची ने मुख्य भाषण में कहा कि ज्ञान, नवाचार और उच्च शिक्षा हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित पूरी दुनिया के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
शशि थरूर का विशेष व्याख्यान
फोरम का एक विशेष आकर्षण लोकसभा सांसद और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर का सार्वजनिक व्याख्यान रहा। विश्वविद्यालय नेताओं, राजनयिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए थरूर ने भारत-जापान के बदलते संबंधों और तेज़ी से बदलते तकनीकी युग में एशिया के भविष्य को गढ़ने में उच्च शिक्षा व जन-जन संपर्क की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने जापान के साथ दीर्घकालिक शैक्षणिक संबंध बनाने में जेजीयू के प्रयासों की सराहना की।
पैनल चर्चा और प्रमुख प्रतिभागी
फोरम की पैनल चर्चा में जापान के शीर्ष विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ नेतृत्व एक मंच पर आए। इसे प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने संचालित किया। पैनल में शामिल रहे — प्रोफेसर (डॉ.) काओरी हयाशी (कार्यकारी उपाध्यक्ष, टोक्यो विश्वविद्यालय), प्रोफेसर (डॉ.) शोइचिरो इवाकिरी (अध्यक्ष, इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी), प्रोफेसर (डॉ.) नोरियुकी ताकाहाशी (अध्यक्ष, मुसाशी यूनिवर्सिटी), प्रोफेसर (डॉ.) मिकी सुगीमुरा (अध्यक्ष, सोफिया यूनिवर्सिटी), प्रोफेसर (डॉ.) नोबुओ हारुना (अध्यक्ष, टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज), प्रोफेसर (डॉ.) मैथ्यू विल्सन (अध्यक्ष एवं डीन, टेम्पल यूनिवर्सिटी जापान कैंपस), प्रोफेसर (डॉ.) मासाहिको जेम्मा (उपाध्यक्ष, वासेदा यूनिवर्सिटी) और जस्टिस माइकल डी. विल्सन (पूर्व न्यायाधीश, हवाई सर्वोच्च न्यायालय)।
छात्र प्रमाण-पत्र वितरण और जेजीयू की प्रतिबद्धता
फोरम के दौरान लगभग 200 जेजीयू छात्रों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए, जिन्होंने समर 2026 में जापान के साझेदार विश्वविद्यालयों — चुओ यूनिवर्सिटी, क्योरिन यूनिवर्सिटी, मुसाशी यूनिवर्सिटी, टेम्पल यूनिवर्सिटी जापान कैंपस, टोक्यो विश्वविद्यालय और यामानाशी विश्वविद्यालय — में अल्पकालिक विदेश अध्ययन कार्यक्रम पूरे किए। इस सत्र में प्रोफेसर पद्मनाभ रामानुजम ने जेजीयू सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2026 भी लॉन्च की।
प्रोफेसर राज कुमार ने कहा, 'जैसे-जैसे हम प्रौद्योगिकी की असाधारण संभावनाओं को अपना रहे हैं, विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव समझ को और गहरा करे, जनकल्याण को बढ़ावा दे तथा वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाए।' जेजीयू के अंतरराष्ट्रीय मामलों के कार्यकारी डीन प्रोफेसर (डॉ.) अखिल भारद्वाज ने इस फोरम को भारत-जापान संबंधों की जन-जन बुनियाद में एक दीर्घकालिक निवेश बताया। फोरम ने यह संदेश दिया कि भारत-जापान साझेदारी का भविष्य केवल सरकारें और बाज़ार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय, शोधार्थी और छात्र भी तय करेंगे।