क्या जीएसटी सुधार और त्योहारी सीजन से घरेलू मांग में वृद्धि होगी? : वी. अनंत नागेश्वरन

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क्या जीएसटी सुधार और त्योहारी सीजन से घरेलू मांग में वृद्धि होगी? : वी. अनंत नागेश्वरन

सारांश

क्या जीएसटी सुधार और त्योहारी सीजन वास्तव में घरेलू मांग को बढ़ा सकते हैं? मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए हैं। जानिए उनके अनुसार हमारे आर्थिक भविष्य की क्या संभावनाएँ हैं।

Key Takeaways

  • त्योहारी सीजन से घरेलू मांग में वृद्धि की उम्मीद है।
  • जीएसटी सुधार से कर राजस्व में वृद्धि संभव है।
  • अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का आकलन अभी बाकी है।
  • जीडीपी में वृद्धि दर 6.3-6.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
  • निवेश के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है।

नई दिल्ली, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि त्योहारी सीजन और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के चलते आगामी तिमाहियों में घरेलू मांग में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि 27 अगस्त को लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं के कारण आर्थिक गतिविधियों में, खासकर निर्यात और पूंजी निर्माण, के लिए कुछ अल्पकालिक जोखिम बने हुए हैं।

नागेश्वरन ने कहा कि पर्याप्त घरेलू खपत प्राइवेट प्लेयर्स को मुश्किल समय में भी निवेश जारी रखने के लिए प्रेरित करेगी।

जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद, जिसमें जून तिमाही में अपेक्षा से अधिक 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई है, नागेश्वरन ने कहा कि इस वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.3-6.8 प्रतिशत के लक्षित दायरे में रहने की अपेक्षा है, जैसा कि इस वर्ष की शुरुआत में आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमानित किया गया था।

उन्होंने अमेरिकी टैरिफ पर चिंताओं के बावजूद, इस वृद्धि दर के आंकड़े में किसी भी संशोधन की संभावना से इनकार किया।

उन्होंने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का सटीक प्रभाव जानने में अभी समय लगेगा।"

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विनिर्माण, निर्माण और सेवाओं ने आपूर्ति-पक्ष की वृद्धि को बढ़ावा दिया है।

निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे मांग-पक्ष की वृद्धि को बल मिला।

सरकार के पूंजीगत व्यय ने भी निवेश वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जून में समाप्त तीन महीनों के लिए सकल घरेलू उत्पाद में निजी उपभोग का हिस्सा 15 वर्षों में उस तिमाही के लिए सबसे अधिक रहा।

सीईए नागेश्वरन के अनुसार, जुलाई के उच्च-आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि जून तिमाही से आर्थिक गति जारी है।

लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, भारत न केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, बल्कि अन्य देशों के साथ इसका अंतर भी बढ़ा है।

जून तिमाही में चीन ने 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, उसके बाद इंडोनेशिया ने 5.1 प्रतिशत, अमेरिका ने 2.1 प्रतिशत, जापान और ब्रिटेन ने 1.2-1.2 प्रतिशत और फ्रांस ने 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की।

एसबीआई रिसर्च की इस महीने की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि 5.5 लाख करोड़ रुपए की खपत वृद्धि से वित्त वर्ष 26 में जीएसटी राजस्व में 52,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वृद्धि होगी, जो जीएसटी 2.0 सुधारों से होने वाले 45,000 करोड़ रुपए के अनुमानित राजस्व नुकसान की भरपाई कर देगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी 2.0 सुधारों से खपत में वृद्धि हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप कर राजस्व में वृद्धि, मुद्रास्फीति में कमी और विकास दर में वृद्धि हो सकती है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था के सुधार और त्योहारी सीजन का समन्वय न केवल घरेलू मांग को बढ़ा सकता है, बल्कि निवेश के लिए भी एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर सकता है। हमें उम्मीद है कि ये बदलाव हमारे आर्थिक भविष्य को सशक्त बनायेंगे।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या जीएसटी सुधार से घरेलू मांग बढ़ेगी?
हाँ, विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी सुधार और त्योहारी सीजन से घरेलू मांग में वृद्धि हो सकती है।
क्या अमेरिकी टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का सही आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी।