MeitY का मेटा को निर्देश: फेसबुक-इंस्टाग्राम के रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म की तत्काल करें समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 19 अक्टूबर 2026 को टेक दिग्गज मेटा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कंटेंट रिकमेंडेशन और रैंकिंग सिस्टम की तत्काल समीक्षा करने के औपचारिक निर्देश दिए हैं। भारत में सोशल मीडिया एल्गोरिद्म द्वारा सूचनाओं को बढ़ावा देने के तरीके को लेकर सरकार की निगरानी लगातार कड़ी होती जा रही है।
एडवाइजरी में क्या कहा गया
मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में मेटा से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उसकी रिकमेंडेशन प्रणाली ऐसी नहीं होनी चाहिए जो उपयोगकर्ताओं के सामने केवल एक या सीमित प्रकार की विचारधाराएँ अथवा कथानक बार-बार प्रस्तुत करे। इसके बजाय, उपयोगकर्ताओं को विविध, प्रासंगिक और विश्वसनीय जानकारी तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एडवाइजरी में विशेष रूप से सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो और ग्राफिक्स का उल्लेख किया गया है, जिनकी प्रामाणिकता, समय, स्थान या परिस्थितियों को लेकर अस्पष्टता हो सकती है। सरकार ने कहा है कि ऐसे मामलों में अतिरिक्त संदर्भ उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
किस तरह के कंटेंट पर विशेष ध्यान
मंत्रालय ने उन स्थितियों को रेखांकित किया है जहाँ पुराने या असंबंधित दृश्य वर्तमान घटनाओं के रूप में प्रस्तुत किए जाएँ, वीडियो को चुनिंदा रूप से संपादित किया गया हो, या आपात स्थिति, पुलिस कार्रवाई अथवा अन्य सरकारी उपायों को लेकर अपुष्ट दावे किए जा रहे हों। ऐसे कंटेंट की पहचान, समीक्षा और त्वरित निगरानी के लिए तंत्र को मजबूत करने का भी निर्देश दिया गया है।
गौरतलब है कि मंत्रालय ने उस कंटेंट पर विशेष जोर दिया है जो रिकमेंडेशन सिस्टम के जरिए तेजी से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच रहा हो और जिससे सार्वजनिक भ्रम, हिंसा या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो।
पृष्ठभूमि: बढ़ती सरकारी निगरानी
यह कदम मेटा की कंटेंट मॉडरेशन और रिकमेंडेशन प्रणालियों को लेकर सरकार की बढ़ती सक्रियता का ताज़ा उदाहरण है। इससे पहले अगस्त 2026 में सरकारी अधिकारियों ने मेटा के अधिकारियों से कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया और गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ सुरक्षा उपायों को लेकर सीधे सवाल किए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिद्म और उनके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर नियामक दबाव बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ का डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट (DSA) भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है।
मेटा की ओर से उठाए गए कदम
मेटा ने हाल ही में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर उठी चिंताओं के बाद कंटेंट और विज्ञापन संबंधी सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया है। कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में बताया कि उसने एआई-आधारित नई विज्ञापन समीक्षा प्रणाली लागू की है और जनवरी से जून 2026 के बीच भारत में बाल यौन शोषण से संबंधित 53 लाख कंटेंट हटाए हैं, जिनमें से 98 प्रतिशत से अधिक मामलों की पहचान कंपनी ने स्वयं सक्रिय रूप से की थी।
आगे क्या होगा
MeitY ने मेटा को उठाए गए कदमों की जानकारी तत्काल सरकार को देने के लिए कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक व्यापक नियामक ढाँचे की दिशा में बढ़ते कदमों का हिस्सा हो सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेटा किस समयसीमा में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और क्या इस एडवाइजरी का असर कंपनी की वैश्विक नीतियों पर भी पड़ता है।