एमजीएल ने मुंबई मेट्रो रीजन में सीएनजी ₹2/किलो महंगी की, नई दर ₹84 प्रति किलो
सारांश
मुख्य बातें
महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) ने 14 मई 2026 की आधी रात से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में कॉम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमत ₹2 प्रति किलोग्राम बढ़ाकर ₹84 प्रति किलोग्राम कर दी है। यह बढ़ोतरी मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और एमएमआर के आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगी।
मूल्य वृद्धि के कारण
एमजीएल ने इस बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण गिनाए हैं। कंपनी के अनुसार, गैस खरीद की बढ़ती लागत, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, रुपए का अवमूल्यन और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
विशेष रूप से, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही बाधित हुई है — यह वह जलमार्ग है जिससे दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत गुज़रता है। इस बाधा ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में तेज़ी से कीमतें बढ़ाई हैं।
एमजीएल अधिकारी का बयान
एमजीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, '14 मई आधी रात से सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई, जिससे शहर और आसपास के इलाकों में नई संशोधित दर ₹84 प्रति किलोग्राम हो जाएगी।' यह बयान कंपनी की आधिकारिक स्थिति को स्पष्ट करता है।
दिल्ली-एनसीआर की स्थिति
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में, जहाँ सीएनजी वितरण इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) के हाथ में है, कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालाँकि एमजीएल की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली-एनसीआर के उपभोक्ताओं की नज़र भी आईजीएल की संभावित कदम पर टिकी हुई है।
घरेलू आपूर्ति पर सरकार का आश्वासन
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने स्पष्ट किया था कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घरेलू खाना पकाने के लिए एलपीजी की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में उथल-पुथल जारी है।
शेयर बाज़ार पर असर
कीमत वृद्धि की घोषणा के बाद एमजीएल का शेयर दोपहर 12 बजे तक 1.81 प्रतिशत की तेज़ी के साथ ₹1,065 पर कारोबार कर रहा था। विश्लेषकों का मानना है कि ऊँची बिक्री दर से कंपनी के मार्जिन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य कैसे बदलता है और क्या अन्य शहर गैस वितरण कंपनियाँ भी इसी राह पर चलती हैं।