पीएम-आशा योजना: किसानों को MSP पर ₹814 से ₹2,293 प्रति क्विंटल अतिरिक्त लाभ, बजट बढ़कर ₹7,200 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उनकी उपज बेचने का अवसर देकर मजबूरी में की जाने वाली बिक्री पर अंकुश लगा रही है। 21 अगस्त को सरकार द्वारा जारी आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना ने कृषि खरीद, मूल्य स्थिरीकरण और बाज़ार हस्तक्षेप को अधिक प्रभावी बनाकर किसानों की आय संरक्षण में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
मुख्य घटनाक्रम
फैक्टशीट के अनुसार, पीएम-आशा के अंतर्गत दलहन, तिलहन और खोपरे की समय पर सरकारी खरीद सुनिश्चित की जा रही है। इस कार्य में राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड/NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) प्रमुख एजेंसियों के रूप में कार्यरत हैं। किसानों की बाज़ार तक पहुँच सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
सरकार के बयान के अनुसार, डिजिटल सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विस्तार ने मिलकर खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया है, जिसका लाभ विभिन्न राज्यों के किसानों को मिल रहा है।
डिजिटल सुधार और पारदर्शिता
फैक्टशीट में उल्लेख किया गया है कि योजना के तहत आधार-आधारित प्रमाणीकरण, ई-एनएएम (e-NAM), ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे डिजिटल मंचों को खरीद प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इन पहलों से भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता आई है और बिचौलियों पर किसानों की निर्भरता कम हुई है।
इसके साथ ही कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) से मिले समर्थन और खरीद कवरेज के विस्तार ने भी योजना की व्यापकता बढ़ाई है। सरकार का कहना है कि तकनीक-आधारित हस्तक्षेप से किसानों को सीधे लाभ पहुँच रहा है।
बजटीय आवंटन में वृद्धि
पीएम-आशा के लिए बजटीय प्रावधान में लगातार बढ़ोतरी की गई है। 2024-25 में योजना का वास्तविक व्यय ₹5,437.99 करोड़ रहा। 2025-26 में बजट बढ़ाकर ₹6,941.36 करोड़ किया गया, और 2026-27 में इसे ₹7,200 करोड़ तक ले जाया गया है। आँकड़ों के अनुसार यह वृद्धि MSP प्रणाली को सुदृढ़ करने की सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है।
फसलवार MSP और लागत का अंतर
फैक्टशीट में 2026-27 के लिए प्रमुख फसलों की उत्पादन लागत और MSP के बीच के अंतर का विवरण दिया गया है:
सामान्य धान की उत्पादन लागत ₹1,627 प्रति क्विंटल रही, जबकि MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया — किसानों को ₹814 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त लाभ।
गेहूँ की उत्पादन लागत ₹1,239 प्रति क्विंटल के मुकाबले MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल तय हुआ, यानी ₹1,346 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त लाभ।
पीली सोयाबीन की उत्पादन लागत ₹3,805 प्रति क्विंटल के विरुद्ध MSP ₹5,708 प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ — ₹1,903 प्रति क्विंटल का लाभ।
जूट में सर्वाधिक अंतर देखा गया: उत्पादन लागत ₹3,662 प्रति क्विंटल के मुकाबले MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल — ₹2,293 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त लाभ।
आगे की राह
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और विस्तारित खरीद केंद्रों के जरिये पीएम-आशा आने वाले वर्षों में और अधिक किसानों तक अपनी पहुँच बढ़ाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब कृषि आय और ग्रामीण संकट राष्ट्रीय बहस के केंद्र में बने हुए हैं।