9 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएमएमएसवाई से बदली गिरिडीह के सुमन कुमार की किस्मत: 32 तालाबों से 150 टन मछली, 40 लोगों को रोज़गार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएमएमएसवाई से बदली गिरिडीह के सुमन कुमार की किस्मत: 32 तालाबों से 150 टन मछली, 40 लोगों को रोज़गार

सारांश

इज़रायल से पढ़कर लौटे सुमन कुमार ने गिरिडीह के एक छोटे गाँव को मत्स्य पालन का केंद्र बना दिया। पीएमएमएसवाई की मदद से 8 तालाबों से शुरू हुआ सफर अब 32 तालाबों, 150 टन सालाना उत्पादन और 40 लोगों के रोज़गार तक पहुँच गया है — यह ग्रामीण उद्यमिता का एक ज़िंदा नमूना है।

मुख्य बातें

सुमन कुमार ने पीएमएमएसवाई का लाभ लेकर गिरिडीह, झारखंड में 32 तालाबों से मत्स्य पालन का बड़ा कारोबार खड़ा किया।
सालाना 100 से 150 टन मछली उत्पादन; रोहू-कतला का थोक भाव ₹180-200 प्रति किलो ।
वैज्ञानिक प्रबंधन से 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफ़ा; मछली की आपूर्ति झारखंड और बिहार की मंडियों तक।
30 से 40 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार — तालाब देखरेख, आहार, मछली पकड़ने और परिवहन में।
सुमन ने इज़रायल से मत्स्य पालन और कृषि की पढ़ाई के बाद गाँव लौटकर हेचरी निर्माण के लिए पीएमएमएसवाई का लाभ लिया।

झारखंड के गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड के युवा मत्स्य उद्यमी सुमन कुमार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) का लाभ उठाकर अपने गाँव को रोज़गार और मुनाफ़े का केंद्र बना दिया है। उनके 32 तालाबों से अब सालाना 100 से 150 टन मछली का उत्पादन होता है और 30 से 40 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिल रहा है। 8 सितंबर को सामने आई इस सफलता की कहानी सरकारी योजनाओं के ज़मीनी असर का एक ठोस उदाहरण बन रही है।

इज़रायल से पढ़कर लौटे, गाँव में बोया बदलाव का बीज

सुमन कुमार ने इज़रायल से मत्स्य पालन और कृषि विज्ञान की उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद अपने गाँव लौटने का फ़ैसला किया। विदेश में अर्जित आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के ज्ञान को उन्होंने पीएमएमएसवाई के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता के साथ जोड़ा। उन्होंने मत्स्य विभाग के जिला कार्यालय में आवेदन किया और विशेष रूप से हेचरी निर्माण के लिए योजना का लाभ प्राप्त किया।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब झारखंड जैसे राज्यों में ग्रामीण युवाओं का शहरों की ओर पलायन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सुमन का उदाहरण दर्शाता है कि सही योजना और तकनीक के संयोग से गाँव में ही आजीविका के स्थायी अवसर बनाए जा सकते हैं।

आठ तालाबों से 32 तालाबों तक का सफर

सुमन कुमार ने अपना मत्स्य पालन व्यवसाय महज आठ तालाबों से शुरू किया था। पहले वर्ष में ही इन तालाबों से 45 से 50 टन मछली का उत्पादन हुआ। वैज्ञानिक पद्धति, निरंतर परिश्रम और बेहतर प्रबंधन के बल पर उनका कारोबार आज 32 तालाबों तक विस्तृत हो चुका है।

इन तालाबों में मुख्य रूप से रोहू और कतला समेत अनेक प्रजातियों की मछलियाँ पाली जाती हैं। तैयार मछलियों की आपूर्ति गिरिडीह के अलावा झारखंड के विभिन्न जिलों और बिहार की कई मंडियों में की जाती है, जिससे उनकी पहचान अब राज्य की सीमाओं से भी आगे पहुँच गई है।

मुनाफ़े का गणित: ₹180-200 प्रति किलो, 50-60% लाभ

सुमन कुमार के अनुसार, रोहू और कतला का थोक बाज़ार भाव ₹180 से ₹200 प्रति किलोग्राम तक मिलता है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करने पर इस कारोबार में 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफ़ा हासिल हो जाता है।

गौरतलब है कि पारंपरिक खेती की तुलना में मत्स्य पालन में यह मार्जिन उल्लेखनीय रूप से अधिक है, जो इसे झारखंड के छोटे किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाता है।

स्थानीय रोज़गार: 30-40 परिवारों को मिली आजीविका

तालाबों की देखरेख, मछलियों को आहार देने, मछली पकड़ने और परिवहन जैसे कार्यों में 30 से 40 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिल रहा है। यह रोज़गार सृजन बेंगाबाद जैसे दूरदराज़ के प्रखंड में आर्थिक गतिविधि को सीधे प्रोत्साहित कर रहा है।

सुमन कुमार ने कहा, 'पीएमएमएसवाई हमारे लिए बहुत लाभदायक है। यहाँ के डीएफओ और फिशरीज ऑफिसर बहुत मददगार हैं।' उनके अनुसार, इस योजना का लाभ न केवल उन्हें बल्कि आसपास के स्थानीय किसानों को भी मिल रहा है।

आगे की राह

सुमन कुमार का यह मॉडल झारखंड में मत्स्य पालन क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित करता है। पीएमएमएसवाई के तहत हेचरी निर्माण से शुरू हुई यह यात्रा अब एक बहु-जिला आपूर्ति श्रृंखला में तब्दील हो चुकी है। यदि राज्य के अन्य युवा उद्यमी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो झारखंड का मत्स्य पालन क्षेत्र आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत स्तंभ बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक अपवाद भी है — इज़रायल में प्रशिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और सरकारी तंत्र को नेविगेट करने में सफल। असली सवाल यह है कि पीएमएमएसवाई का लाभ उन हज़ारों छोटे मछुआरों तक कितना पहुँच रहा है जिनके पास न विदेशी डिग्री है, न बाज़ार तक पहुँच। झारखंड में ग्रामीण पलायन की दर अभी भी ऊँची है, और एक सफल मॉडल तब तक नीतिगत उपलब्धि नहीं बन सकता जब तक उसे व्यापक स्तर पर दोहराने की संरचना न हो। डीएफओ और फिशरीज ऑफिसर की तारीफ़ स्वागतयोग्य है, पर जवाबदेही के लिए ज़रूरी है कि ऐसे मॉडलों का डेटा-आधारित मूल्यांकन सार्वजनिक हो।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) क्या है?
पीएमएमएसवाई केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है जो मत्स्य पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण, उत्पादन वृद्धि और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसके तहत हेचरी निर्माण, तालाब विकास और आधुनिक तकनीक अपनाने पर अनुदान मिलता है। गिरिडीह के सुमन कुमार ने इसी योजना के ज़रिए हेचरी निर्माण के लिए सहायता प्राप्त की।
सुमन कुमार ने पीएमएमएसवाई का लाभ कैसे लिया?
सुमन कुमार ने मत्स्य विभाग के गिरिडीह जिला कार्यालय में आवेदन किया और विशेष रूप से हेचरी निर्माण के लिए योजना का लाभ प्राप्त किया। इज़रायल से मत्स्य पालन और कृषि की पढ़ाई के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीक को सरकारी सहायता के साथ जोड़कर अपना कारोबार खड़ा किया।
गिरिडीह के इस मत्स्य पालन मॉडल से कितने लोगों को रोज़गार मिला है?
सुमन कुमार के 32 तालाबों में तालाब देखरेख, मछलियों को आहार देने, मछली पकड़ने और परिवहन जैसे कार्यों में 30 से 40 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिल रहा है। यह रोज़गार बेंगाबाद प्रखंड जैसे दूरदराज़ के इलाके में स्थायी आजीविका का स्रोत बन गया है।
सुमन कुमार के तालाबों में किन मछलियों का पालन होता है और बाज़ार भाव क्या है?
उनके तालाबों में मुख्य रूप से रोहू और कतला समेत कई प्रजातियों की मछलियाँ पाली जाती हैं। रोहू और कतला का थोक बाज़ार भाव ₹180 से ₹200 प्रति किलोग्राम तक मिलता है और वैज्ञानिक तरीके से पालन करने पर 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफ़ा होता है।
सुमन कुमार की मछली कहाँ-कहाँ बिकती है?
उनके तालाबों से तैयार मछलियों की आपूर्ति गिरिडीह के अलावा झारखंड के विभिन्न जिलों और बिहार की कई मंडियों में की जाती है। इससे उन्हें स्थानीय बाज़ार के साथ-साथ अन्य राज्यों के बाज़ारों में भी पहचान मिली है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 11 महीने पहले
  2. 12 महीने पहले
  3. 12 महीने पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले