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PNB का ग्राहकों को अलर्ट: AI वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक धोखाधड़ी से बचें

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PNB का ग्राहकों को अलर्ट: AI वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक धोखाधड़ी से बचें

सारांश

पंजाब नेशनल बैंक ने AI वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक के ज़रिए बढ़ती बैंकिंग ठगी पर अलर्ट जारी किया है। पुणे में ₹4.81 लाख और अहमदाबाद में ₹5 लाख की ठगी के ताज़ा मामलों ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक सबसे आसान निशाना हैं।

मुख्य बातें

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 20 अक्टूबर 2026 को AI वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और फिशिंग धोखाधड़ी के बारे में ग्राहकों को अलर्ट जारी किया।
बैंक के MD और CEO अशोक चंद्र ने चेताया कि साइबर ठग विश्वास, भय और तात्कालिकता का फायदा उठाकर परिजनों की आवाज़ व चेहरे की नकल करते हैं।
पुणे के बानेर में 70 वर्षीय दिलीप एकनाथ वाइकर से पेंशन कार्ड पंजीकरण के बहाने ₹4.81 लाख की ठगी; BNS धारा 318 और IT अधिनियम धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज।
अहमदाबाद के मकरबा में 72 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी ने फेसबुक विज्ञापन के ज़रिए ₹5 लाख गँवाए।
सार्वजनिक और निजी बैंक RBI के नियामक निर्देशों के तहत साइबर सुरक्षा निवेश बढ़ा रहे हैं।

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 20 अक्टूबर 2026 को अपने ग्राहकों को एआई-आधारित साइबर धोखाधड़ी — जिसमें वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और फिशिंग शामिल हैं — के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क किया है। बैंक के एमडी और सीईओ अशोक चंद्र ने ग्राहकों को भेजे संदेश में चेतावनी दी कि साइबर अपराधी अब परिष्कृत तकनीकी हथकंडों से आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।

साइबर अपराधियों के नए तरीके

अशोक चंद्र ने अपने संदेश में कहा कि साइबर ठग मानवीय व्यवहार की कमज़ोरियों — विशेष रूप से विश्वास, भय, तात्कालिकता और रोज़मर्रा की डिजिटल आदतों — का फायदा उठाते हैं। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी करने वाले परिवार के सदस्यों, दोस्तों या विश्वसनीय व्यक्तियों की आवाज़ या चेहरे की नकल करके झूठी आपात स्थिति बना सकते हैं और पैसों के तत्काल हस्तांतरण की माँग कर सकते हैं।

चंद्र के अनुसार, धोखाधड़ी वाले ईमेल, एसएमएस और संदेश इतने व्यक्तिगत और असली बैंकी संदेशों जैसे दिखते हैं कि उन्हें पहचान पाना आम ग्राहक के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। इन्हें विशेष रूप से घबराहट पैदा करने और बिना सत्यापन के तत्काल कार्रवाई कराने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह का संदर्भ

यह सतर्कता संदेश ऐसे समय में जारी किया गया है जब अक्टूबर को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। PNB ने इसी अवसर का उपयोग करते हुए अपने ग्राहक आधार को सूचित किया कि इस माह के दौरान साइबर अपराधी अपने प्रयासों को और अधिक सक्रिय और विश्वसनीय बनाते हैं।

गौरतलब है कि देश भर में साइबर अपराध के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इसी के मद्देनज़र सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक आईटी और साइबर सुरक्षा में निवेश बढ़ा रहे हैं — जिसमें उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न जोखिमों से निपटना और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के कड़े नियामक निर्देशों का पालन करना शामिल है।

पुणे और अहमदाबाद में ठगी के ताज़ा मामले

पुणे के बानेर इलाके में साइबर जालसाज़ों ने पेंशन कार्ड पंजीकरण का बहाना बनाकर 70 वर्षीय दिलीप एकनाथ वाइकर से ₹4.81 लाख की ठगी कर ली। पीड़ित को 8 और 9 सितंबर के बीच व्हाट्सएप पर एक संदेश मिला, जिसमें उन्हें एक लिंक खोलकर बैंक खाते की जानकारी दर्ज करने को कहा गया — जिसके बाद उनके खाते से धोखाधड़ी से यह रकम निकाल ली गई।

शिकायत के बाद बानेर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 318(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

यह इस तरह की अकेली घटना नहीं है। पिछले महीने अहमदाबाद के मकरबा इलाके में एक 72 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी ने पेंशन कार्ड की पेशकश करने वाले फेसबुक विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद ₹5 लाख गँवा दिए। ये मामले बताते हैं कि वरिष्ठ नागरिक इन जालसाज़ों के प्राथमिक निशाने पर हैं।

आम जनता पर असर और सावधानियाँ

PNB ने ग्राहकों से आग्रह किया है कि वे किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, फ़ोन या संदेश पर बैंक खाते की जानकारी साझा न करें और किसी भी तात्कालिक वित्तीय माँग को पहले सीधे संबंधित व्यक्ति से सत्यापित करें। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि असली बैंक कभी भी ओटीपी, पासवर्ड या खाता विवरण नहीं माँगता।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक के सुलभ होने के साथ-साथ साइबर ठगी के तरीके और भी जटिल होते जाएँगे, इसलिए डिजिटल साक्षरता और सतर्कता आज की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई है। आने वाले समय में बैंकों और नियामकों द्वारा और अधिक कठोर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बैंकों और नियामकों की चेतावनियाँ जागरूकता से आगे कब जाएँगी। पुणे और अहमदाबाद के ताज़ा मामले यह साफ़ करते हैं कि वरिष्ठ नागरिक — जो सबसे कम डिजिटल-साक्षर वर्ग हैं — सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं। AI तकनीक की सुलभता के साथ डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग की लागत तेज़ी से घट रही है, जिससे ये हथकंडे अब केवल बड़े लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहे। बिना सख्त डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के, ये अलर्ट महज औपचारिकता बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PNB ने किस तरह की साइबर धोखाधड़ी के बारे में चेतावनी दी है?
PNB ने AI वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और फिशिंग आधारित साइबर धोखाधड़ी के बारे में ग्राहकों को सतर्क किया है। इन तरीकों में जालसाज़ परिजनों या विश्वसनीय व्यक्तियों की आवाज़ और चेहरे की नकल कर झूठी आपात स्थिति बनाते हैं और पैसों का तत्काल हस्तांतरण करवाते हैं।
पुणे में पेंशन कार्ड धोखाधड़ी का मामला क्या है?
पुणे के बानेर इलाके में 70 वर्षीय दिलीप एकनाथ वाइकर को 8-9 सितंबर के बीच पेंशन कार्ड पंजीकरण का व्हाट्सएप संदेश मिला। लिंक पर बैंक जानकारी दर्ज करते ही उनके खाते से ₹4.81 लाख निकाल लिए गए और BNS तथा IT अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ।
साइबर ठगी से बचने के लिए बैंक ग्राहक क्या करें?
PNB ने सलाह दी है कि अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, फ़ोन या संदेश पर बैंक खाता विवरण, ओटीपी या पासवर्ड साझा न करें। किसी भी तात्कालिक वित्तीय माँग को सीधे संबंधित व्यक्ति से सत्यापित करें, क्योंकि असली बैंक कभी ऐसी जानकारी नहीं माँगता।
AI वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक धोखाधड़ी क्या होती है?
AI वॉयस क्लोनिंग में जालसाज़ किसी परिचित की आवाज़ की नकल करने वाला AI टूल इस्तेमाल करते हैं, जबकि डीपफेक में किसी व्यक्ति के चेहरे की नकल वाला नकली वीडियो बनाया जाता है। इन तकनीकों से पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह किसी जाने-पहचाने व्यक्ति से बात कर रहा है।
क्या भारत में ऐसी साइबर ठगी के और भी हालिया मामले हैं?
हाँ, अहमदाबाद के मकरबा इलाके में एक 72 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी ने पेंशन कार्ड का फेसबुक विज्ञापन देखकर क्लिक करने के बाद ₹5 लाख गँवाए। ये मामले दर्शाते हैं कि वरिष्ठ नागरिक इन जालसाज़ों के प्रमुख निशाने पर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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