सोना ₹1,51,103 और चांदी ₹2,24,321 पर, वैश्विक सकारात्मक संकेतों से MCX पर 1.5% तक की तेजी
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 9 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से मिले सकारात्मक संकेतों, अमेरिकी डॉलर में नरमी और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच निवेशकों की बढ़ती खरीदारी ने दोनों कीमती धातुओं को सहारा दिया। सुबह करीब 11 बजे IST तक दिसंबर डिलीवरी का सोना ₹1,51,103 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,24,321 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नज़र आई।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों का हाल
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोना दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए करीब 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ लगभग 4,200 डॉलर प्रति औंस के नज़दीक पहुँच गया। चांदी ने भी मज़बूत खरीदारी के दम पर 60 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार किया और इसमें करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नरमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में माँग को बढ़ाया है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की आगामी ब्याज दर नीति पर भी बारीक नज़र बनाए हुए हैं।
MCX पर घरेलू भाव और उछाल
घरेलू वायदा बाज़ार में दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव दिन के उच्च स्तर ₹1,51,200 प्रति 10 ग्राम तक पहुँचा, जो पिछले बंद भाव ₹1,49,610 से ₹1,590 यानी 1.06 प्रतिशत अधिक है। खबर लिखे जाने तक यह ₹1,493 यानी 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,51,103 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था।
चांदी में और अधिक तेजी देखी गई। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी ने ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम का उच्च स्तर छुआ, जो पिछले बंद भाव ₹2,21,233 से ₹3,267 यानी 1.47 प्रतिशत अधिक है। खबर लिखे जाने तक यह ₹3,088 यानी 1.40 प्रतिशत की उछाल के साथ ₹2,24,321 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
भू-राजनीतिक कारक और फेड नीति का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान — जिसमें उन्होंने नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर किसी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया — ने बाज़ारों को कुछ राहत प्रदान की। हालाँकि मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जिसके चलते सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की माँग बरकरार है।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को लेकर बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों का मत है कि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें सोने की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन देती हैं, क्योंकि कम ब्याज दरें बिना यील्ड वाली परिसंपत्तियों जैसे सोने को अपेक्षाकृत आकर्षक बनाती हैं।
त्योहारी माँग से मिल सकता है अतिरिक्त सहारा
बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे प्रमुख भारतीय त्योहारों के नज़दीक आने के साथ-साथ शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी से सोने-चांदी की माँग और बढ़ सकती है। गौरतलब है कि भारत विश्व के सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता देशों में शामिल है, और त्योहारी सीज़न में घरेलू माँग कीमतों को ऊपरी स्तर पर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
आगे क्या देखें निवेशक
विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दर संबंधी संकेत, मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक आर्थिक आँकड़ों पर कड़ी नज़र बनाए रखें। इन्हीं कारकों के आधार पर आने वाले सत्रों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी।