क्विक कॉमर्स का प्रभाव: कीमत से अधिक सुविधा बन रही है खरीदारी की प्राथमिकता
सारांश
Key Takeaways
- 70 प्रतिशत उपभोक्ता क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल जारी रखेंगे।
- भरोसेमंद किराना दुकानों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।
- उपभोक्ताओं की खरीदारी आदतें बदल रही हैं।
- किराना दुकानदार अब डिजिटल प्लेटफार्मों से जुड़ने में रुचि दिखा रहे हैं।
- डिजिटल भुगतान आजकल आम हो चुका है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि 70 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं का मानना है कि भले ही छूट कम हो जाए, वे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग जारी रखेंगे। यह दर्शाता है कि अब ग्राहक कीमत से अधिक तेजी और सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत में रोजमर्रा की किराना खरीदारी के लिए स्थानीय दुकानों का अभी भी एक महत्वपूर्ण स्थान है, और ये लोगों की भरोसेमंद लेन-देन के लिए पहली पसंद बनी हुई हैं। हालाँकि, पिछले वर्ष में 51 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बताया कि उनकी स्थानीय दुकानों पर निर्भरता में कमी आई है।
लगभग 45 प्रतिशत लोग क्विक कॉमर्स का उपयोग आवश्यक वस्तुओं की अंतिम समय की खरीद के लिए करते हैं, जबकि 24 प्रतिशत लोग इसे रोजमर्रा के सामान जैसे दूध और ब्रेड के लिए इस्तेमाल करते हैं। साथ ही, 19 प्रतिशत लोग स्नैक्स और पेय पदार्थों की आकस्मिक खरीदारी के लिए इन प्लेटफार्मों का सहारा लेते हैं।
वहीं, 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अब पहले की तुलना में अधिक किराना दुकानों पर निर्भर हैं, जबकि 27 प्रतिशत लोगों की खरीदारी की आदतों में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, किराना दुकानदारों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि कम मुनाफा, कम समय का उधार और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएँ, विशेष रूप से उत्पाद की उपलब्धता और विविधता के संदर्भ में।
हालांकि, कई किराना दुकानदार अब डिजिटल प्लेटफार्मों से जुड़ने के लिए तत्पर हैं।
यह अध्ययन पूरे देश में 1,600 से अधिक उपभोक्ताओं और 1,000 से अधिक किराना दुकानदारों के सर्वे पर आधारित है।
लगभग 40 प्रतिशत किराना दुकानदारों ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ सहयोग में रुचि दिखाई, जबकि 32 प्रतिशत ने कहा कि वे रुचि रखते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि यह सहयोग कैसे काम करेगा।
इसके अतिरिक्त, 20 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा कि अगर उन्हें तकनीकी और संचालन से संबंधित सहायता मिले, तो वे इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं। यह दर्शाता है कि भविष्य में किराना दुकानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की विशाल संभावनाएँ हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब अधिकांश किराना दुकानों में डिजिटल भुगतान सामान्य हो चुका है और यूपीआई व क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान को व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है।
हालांकि, पीओएस सिस्टम, इन्वेंट्री प्रबंधन और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग अभी भी सीमित है, जिसका कारण उनकी लागत, प्रशिक्षण की आवश्यकता और संचालन की जटिलता है।