क्या वित्तीय क्षेत्र में आया बड़ा विदेशी निवेश कई वर्षों के कार्य का नतीजा है? : आरबीआई गवर्नर

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क्या वित्तीय क्षेत्र में आया बड़ा विदेशी निवेश कई वर्षों के कार्य का नतीजा है? : आरबीआई गवर्नर

सारांश

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह वर्षों की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने बताया कि आर्थिक वृद्धि और तकनीकी निवेश से भारत की वित्तीय स्थिरता बढ़ रही है। यह लेख जानिए कैसे विदेशी कंपनियों का निवेश भारत के भविष्य को आकार दे रहा है।

Key Takeaways

  • विदेशी निवेश भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  • आरबीआई ने कोई नए नियम नहीं बनाए हैं।
  • 2025 में कई बड़े डील देखने को मिले हैं।
  • लॉन्ग-टर्म निवेशक भारत के भविष्य पर भरोसा जता रहे हैं।
  • भारत की ग्रोथ की कहानी अभी भी जारी है।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि देश के वित्तीय क्षेत्र में आया बड़ा विदेशी निवेश कई वर्षों के प्रयासों का परिणाम है।

एनडीटीवी प्रॉफिट को दिए एक इंटरव्यू में केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि दर के कारण आने वाले समय में विदेशी निवेश को आकर्षित करती रहेगी। यह गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियों द्वारा देश में किए जा रहे भारी निवेश और एफटीए में बड़ी प्रतिबद्धताओं से भी स्पष्ट होता है।

विदेशी निवेशकों का निवेश हर साल समान नहीं रहेगा, लेकिन भारत बैंकिंग, टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्थाओं के अन्य बड़े सेक्टर्स में गुणवत्तापूर्ण निवेश आकर्षित करता रहेगा।

2025 में भारत के वित्तीय क्षेत्र में कई बड़ी डील देखने को मिली हैं।

इन डील में एमिरेट्स एनबीडी द्वारा आरबीएल बैंक में 3 अरब डॉलर में हिस्सेदारी खरीदना, प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन द्वारा फेडरल बैंक में 705 मिलियन डॉलर में 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदना और अबू धाबी स्थित आईएचसी द्वारा सम्मान कैपिटल में 1 अरब डॉलर में 43.46 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदना शामिल है।

मल्होत्रा ने कहा कि यह इनफ्लो केवल एक साल में किए गए काम का परिणाम नहीं है, बल्कि यह कई सालों की मिली-जुली कोशिशों का नतीजा है, जिससे बैंकों और नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) को मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा, "विदेशी और घरेलू, दोनों तरह के निवेशक इस सेक्टर की मजबूती और भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ की संभावनाओं से आकर्षित हो रहे हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि ये तुरंत आने जाने वाली पूंजी नहीं हैं, बल्कि लॉन्ग-टर्म, धैर्य वाली पूंजी है।"

मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई ने इस निवेश को आकर्षित करने के लिए कोई रेगुलेटरी नियम नहीं बदले हैं, और पात्रता के नियम पहले जैसे ही हैं।

मल्होत्रा ने कहा, "सिर्फ 2025 में ही, प्राइवेट फाइनेंशियल संस्थाओं में लगभग 15 अरब डॉलर का निवेश आया, जो सिस्टम में भरोसे को दर्शाता है।"

मल्होत्रा के अनुसार, भारत की ग्रोथ की कहानी अभी भी बरकरार है। उन्होंने कहा, "हमने पहले छमाही में 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है, इस साल 7.4 प्रतिशत और अगले साल लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कैपिटल की मांग मजबूत बनी रहेगी।"

Point of View

बल्कि भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत में विदेशी निवेश का मुख्य कारण क्या है?
भारत में विदेशी निवेश का मुख्य कारण यहां की मजबूत आर्थिक वृद्धि और तकनीकी क्षेत्र में बदलाव है।
आरबीआई गवर्नर का इस विषय पर क्या कहना है?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि यह निवेश कई वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
क्या विदेशी निवेश स्थायी है?
विदेशी निवेशक दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं, जो स्थायी है।
भारत के वित्तीय क्षेत्र में कौन से बड़े निवेश हुए हैं?
भारत के वित्तीय क्षेत्र में एमिरेट्स एनबीडी, ब्लैकस्टोन, और आईएचसी द्वारा बड़े निवेश हुए हैं।
भविष्य में भारत की आर्थिक विकास दर क्या होगी?
इस साल 7.4 प्रतिशत और अगले साल लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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