क्या रिटायरमेंट के बाद पैसों की चिंता खत्म होगी? पैसिव इनकम के ये अद्भुत तरीके बनेंगे बुढ़ापे का सहारा
सारांश
Key Takeaways
- पैसिव इनकम रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का साधन है।
- सही निवेश और योजना बनाना जरूरी है।
- किराया और डिविडेंड स्थिर आमदनी के स्रोत हैं।
- सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम एक सुरक्षित विकल्प है।
- एन्युटी प्लान जीवनभर आमदनी प्रदान करता है।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि नियमित आमदनी समाप्त हो जाती है। नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी मिलती रही, लेकिन रिटायरमेंट के बाद खर्चे वही रहते हैं और आय का स्रोत सीमित हो जाता है। ऐसे में यदि पहले से सही योजना नहीं बनाई गई, तो फाइनेंशियल दबाव तेजी से बढ़ सकता है। इस समस्या का सबसे बेहतर समाधान है पैसिव इनकम, जो कि बिना रोजाना मेहनत किए लंबे समय तक कमाई का जरिया बन सकती है।
पैसिव इनकम का अर्थ है ऐसी आमदनी, जिसमें बार-बार काम करने की आवश्यकता नहीं होती। शुरुआत में सही निवेश या योजना बनानी होती है, लेकिन उसके बाद तय समय पर पैसा अपने-आप आता रहता है। किराया, ब्याज, डिविडेंड या पेंशन जैसी आय इसके अंतर्गत आती हैं। रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए पैसिव इनकम को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस) रिटायर व्यक्तियों के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। यह पूरी तरह से सरकारी गारंटी वाली योजना है, जिसमें वर्तमान में लगभग 8.2 प्रतिशत का ब्याज मिलता है। इस योजना में अधिकतम 30 लाख रुपए तक का निवेश किया जा सकता है और अवधि 5 साल होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ब्याज हर तीन महीने में सीधे बैंक खाते में जमा होता है, जिससे नियमित आमदनी बनी रहती है। इसके साथ ही कुछ टैक्स लाभ भी प्राप्त होते हैं।
यदि किसी के पास पहले से फ्लैट, मकान या दुकान है, तो उसे किराए पर देना रिटायरमेंट के बाद मजबूत आमदनी का स्रोत बन सकता है। किराएदार मिलने के बाद हर महीने निर्धारित राशि आती रहती है, जिससे दैनिक खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं। हालांकि, इस विकल्प में लीज एग्रीमेंट को सही तरीके से बनवाना और किराएदार की पूरी जांच-पड़ताल करना आवश्यक है। लंबी अवधि में प्रॉपर्टी से मिलने वाली आय स्थिर और लाभकारी साबित हो सकती है।
जो लोग थोड़ा जोखिम उठाने को तैयार हैं, उनके लिए डिविडेंड देने वाले शेयर और म्यूचुअल फंड भी पैसिव इनकम का अच्छा साधन बन सकते हैं। ऐसे निवेशों में समय-समय पर डिविडेंड के रूप में आमदनी मिलती है, साथ ही पूंजी बढ़ने की संभावना भी होती है। हालांकि, इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है, इसलिए निवेश से पहले मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड वाले विकल्प चुनना आवश्यक है।
कम जोखिम के साथ हर महीने निश्चित आमदनी चाहने वालों के लिए पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (एमआईएस) एक भरोसेमंद विकल्प है। इस योजना में सिंगल अकाउंट में 9 लाख रुपए और जॉइंट अकाउंट में 15 लाख रुपए तक का निवेश किया जा सकता है। वर्तमान में इसमें लगभग 7.4 प्रतिशत का ब्याज मिलता है, जो हर महीने खाते में आता है। 5 साल की अवधि वाली यह योजना उन लोगों के लिए विशेष है, जो सुरक्षित निवेश के साथ स्थिर आमदनी चाहते हैं।
इसके अतिरिक्त, रिटायरमेंट के बाद पेंशन जैसी नियमित आय के लिए एन्युटी प्लान या पेंशन स्कीम भी प्रभावी साबित होती है। इसमें एकमुश्त राशि का निवेश करना होता है और इसके बदले में जीवन भर हर महीने निश्चित आमदनी मिलती रहती है। आमदनी की राशि निवेश की गई राशि और चुनी गई योजना पर निर्भर करती है। जो लोग लंबी अवधि तक बिना किसी झंझट के नियमित पैसा चाहते हैं, उनके लिए यह विकल्प काफी उपयोगी है।
कुल मिलाकर, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक तनाव से बचने के लिए पैसिव इनकम की योजना पहले से बनाना अत्यंत आवश्यक है। सही विकल्पों का चुनाव न केवल खर्चों को आसानी से पूरा करने में मदद करता है, बल्कि बुढ़ापे में आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बनाए रखता है।