सेबी ने जारी किए नए सेटलमेंट नियम 2026, ₹10 लाख तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक रूट लागू
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 10 अक्टूबर 2026 को सेटलमेंट गणना के लिए व्यापक रूप से संशोधित नियम जारी किए हैं और ₹10 लाख तक के मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए एक नया फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट रूट शुरू किया है। नए सेटलमेंट रेगुलेशन्स, 2026 का उद्देश्य इस प्रणाली को सरल, पारदर्शी और अधिक अनुमान-योग्य बनाना है।
नए नियमों की मुख्य संरचना
संशोधित ढाँचे के तहत सेटलमेंट की शर्तों में तीन प्रमुख तत्व होंगे: सेटलमेंट की रकम, जहाँ लागू हो वहाँ गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे की वापसी, और सुधारात्मक एवं रेगुलेटरी शर्तें (जिन्हें पहले नॉन-मॉनेटरी शर्तें कहा जाता था)।
गलत तरीके से अर्जित मुनाफे की वापसी के लिए अलग प्रावधान किया गया है ताकि सेटलमेंट की गणना में उस रकम की दोहरी गिनती न हो। नया फॉर्मूला सेटलमेंट की रकम को एक बेस अमाउंट से जोड़ता है, जो प्रतिभूति कानूनों के अंतर्गत उल्लंघन के लिए निर्धारित न्यूनतम पेनल्टी से संबद्ध होता है।
बेस अमाउंट की गणना कैसे होगी
बेस अमाउंट तय करते समय कार्यवाही का चरण, रेगुलेटरी एक्शन, उल्लंघन की गंभीरता, और मामले को अधिक या कम गंभीर बनाने वाले कारकों को ध्यान में रखा जाएगा। कानूनी खर्च भी इसमें शामिल होगा।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि बेस अमाउंट की गणना में गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुई हानि को शामिल नहीं किया जाएगा — इन रकमों को अलग से वसूला जाएगा।
फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट की दो श्रेणियाँ
सेबी के अनुसार, फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट दो प्रकार के होंगे: उल्लंघन-आधारित फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट और मौद्रिक सीमा-आधारित फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट। जब सेटलमेंट की रकम ₹10 लाख या उससे कम होगी, तो मामले सीधे इंटरनल कमिटी से होल-टाइम मेंबर्स के पैनल के पास भेजे जाएंगे।
उल्लंघन-आधारित फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया में सेबी संबंधित पक्ष को एक नोटिस भेजेगा, जिसमें उल्लिखित रकम का भुगतान करके मामले को निपटाने का अवसर दिया जाएगा। भुगतान पूरा होने के बाद सदस्यों का पैनल सेटलमेंट ऑर्डर जारी करेगा। यह व्यवस्था प्रक्रिया को पारंपरिक मार्ग की तुलना में काफी तेज़ बनाती है।
वित्तीय गड़बड़ी के मामलों पर विशेष प्रावधान
नए नियम वित्तीय विवरणों की गलत प्रस्तुति (मिसस्टेटमेंट) और फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों के सेटलमेंट का भी रास्ता खोलते हैं, बशर्ते उचित सुधारात्मक और रेगुलेटरी उपाय किए जाएँ — जिनमें अनिवार्य डिस्क्लोजर और डायवर्ट किए गए फंड की रिकवरी शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह संशोधन ऐसे समय आया है जब सेबी बाज़ार नियामन को आधुनिक बनाने और बड़ी संख्या में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट-ट्रैक रूट से छोटे और मझोले मामलों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी।
आगे की राह
सेटलमेंट रेगुलेशन्स, 2026 के तहत नई प्रक्रिया अब से प्रभावी बताई जा रही है। बाज़ार सहभागियों और कानूनी विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर होगी कि नई प्रणाली के पहले चरण में उल्लंघन-आधारित फास्ट-ट्रैक मामलों का निपटारा कितनी तेज़ी से होता है।