SEBI का ASTPL और अवधूत साठे पर बड़ा एक्शन: ₹546.17 करोड़ रिफंड और ₹11.5 करोड़ जुर्माने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 24 अक्टूबर 2026 को अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (ASTPL) और उसके संस्थापक अवधूत साठे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों से जुटाई गई ₹546.17 करोड़ की राशि वापस करने का आदेश दिया है। नियामक ने अपनी जाँच में पाया कि कंपनी और उसके संस्थापक बिना अनिवार्य पंजीकरण के निवेश सलाहकार और रिसर्च एनालिस्ट की गतिविधियाँ संचालित कर रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
SEBI के अंतिम आदेश में ASTPL और अवधूत साठे को प्रतिभूति बाज़ार से दो वर्षों के लिए — या रिफंड संबंधी निर्देशों के पूर्ण अनुपालन तक, जो भी अधिक हो — प्रतिबंधित कर दिया गया है। कंपनी के निदेशक अवधूत साठे को अलग से छह महीने के लिए बाज़ार से दूर रहने का आदेश दिया गया है।
नियामक ने निर्देश दिया है कि कंपनी और अवधूत साठे आदेश प्राप्त होने के पाँच महीने के भीतर पूरी ₹546.17 करोड़ की राशि एक विशेष बैंक खाते में जमा करें। इसके अतिरिक्त, 30 दिनों के भीतर अंग्रेज़ी, हिंदी और एक व्यापक रूप से प्रसारित स्थानीय भाषा के समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कर निवेशकों को रिफंड प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी।
जुर्माने का विवरण
SEBI ने कंपनी, अवधूत साठे और गौरी साठे पर कुल ₹11.5 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इसमें ASTPL पर ₹6 करोड़, अवधूत साठे पर ₹4 करोड़ और गौरी साठे पर ₹1.5 करोड़ का दंड शामिल है। यह राशि आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक पूरी रिफंड राशि जमा नहीं की जाती, संबंधित पक्षों के बैंक खातों से डेबिट लेनदेन पर रोक लागू रहेगी।
रिफंड प्रक्रिया और एस्क्रो व्यवस्था
नियामक ने निर्देश दिया है कि निवेशकों को धनवापसी केवल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर या अन्य बैंकिंग माध्यमों से की जाएगी, ताकि भुगतान का पूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित हो सके। यदि सभी दावेदारों को भुगतान के बाद कोई राशि शेष रहती है, तो उसे एक वर्ष के लिए एस्क्रो खाते में रखा जाएगा, जिससे पात्र निवेशकों और शिकायतकर्ताओं को भुगतान सुनिश्चित हो सके। इसके बाद भी यदि धनराशि बचती है, तो उसे निवेशक संरक्षण एवं शिक्षा कोष (IPEF) में स्थानांतरित किया जाएगा।
जाँच में क्या सामने आया
SEBI की जाँच में उजागर हुआ कि ASTPL और उसके संस्थापक केवल शेयर बाज़ार की शिक्षा तक सीमित नहीं थे, बल्कि निवेशकों को विशिष्ट शेयरों में खरीद और बिक्री की सलाह भी दी जा रही थी। कंपनी कथित तौर पर एंट्री और एग्जिट स्तर, स्टॉप लॉस और शेयरों की कीमतों की दिशा से जुड़े सुझाव दे रही थी — जबकि इसके लिए आवश्यक नियामकीय पंजीकरण उसके पास नहीं था।
गौरतलब है कि कंपनी अपनी प्रचार सामग्री में चुनिंदा लाभदायक सौदों को प्रमुखता से दिखाकर और ऊँचे रिटर्न का दावा करके प्रतिभागियों को आकर्षित कर रही थी। मार्च 2024 में प्रशासनिक चेतावनी मिलने के बाद भी इन गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसके बाद SEBI ने यह सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
आम निवेशकों पर असर और आगे की राह
यह मामला उन हज़ारों निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने कथित तौर पर बिना पंजीकृत सलाहकार सेवाओं के लिए भुगतान किया। रिफंड की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया और अखबारी विज्ञापन की बाध्यता यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अधिकतम पीड़ित अपनी राशि वापस पाने में सक्षम हों। यह कार्रवाई SEBI की उस व्यापक मुहिम का हिस्सा है, जिसके तहत अपंजीकृत वित्तीय सलाहकारों और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसी जा रही है।