स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में घाटा 29 गुना उछलकर ₹167.8 करोड़, राजस्व 46 गुना बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
इंस्टेंट हाउसहेल्प स्टार्टअप स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में शुद्ध घाटा करीब 29 गुना बढ़कर ₹167.8 करोड़ पर पहुँच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह घाटा मात्र ₹5.7 करोड़ था। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) से प्राप्त वित्तीय आँकड़ों के अनुसार, यह उछाल सेवा नेटवर्क के आक्रामक विस्तार और नए ग्राहकों को जोड़ने पर किए गए भारी निवेश का नतीजा है। हालाँकि, इसी अवधि में कंपनी का परिचालन राजस्व भी 46 गुना बढ़कर ₹12.2 करोड़ हो गया।
कंपनी की पृष्ठभूमि और कारोबारी मॉडल
आयुष अग्रवाल द्वारा 2024 में स्थापित स्नैबिट सफाई, बर्तन धोने और कपड़े धोने जैसी घरेलू सेवाएँ माँग के आधार पर उपलब्ध कराती है। कंपनी प्रशिक्षित पेशेवरों के नेटवर्क के ज़रिए 10 मिनट के भीतर सेवा पहुँचाने का दावा करती है।
राजस्व की संरचना पर नज़र डालें तो मुख्य प्लेटफॉर्म सेवाओं से कंपनी को ₹10.82 करोड़ की आय हुई, जो कुल परिचालन राजस्व का लगभग 88% है। शेष आय यूनिफॉर्म की बिक्री से प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त, मुख्यतः बैंक जमा पर ब्याज से ₹14.76 करोड़ की अन्य आय भी दर्ज की गई।
खर्चों का विवरण
स्टार्टअप की आक्रामक विस्तार रणनीति का सबसे स्पष्ट असर उसके खर्चों में दिखा। वित्त वर्ष 2026 में कुल खर्च बढ़कर ₹194.8 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले केवल ₹6.8 करोड़ था।
इनमें विशेषज्ञ सेवाओं पर ₹63 करोड़, मार्केटिंग पर ₹48.7 करोड़, कर्मचारियों से जुड़े खर्च ₹46 करोड़ और सेवाएँ पूरी करने पर ₹23.8 करोड़ शामिल हैं। भर्ती, कमीशन, कानूनी सेवाओं, सॉफ्टवेयर रखरखाव और प्रशासन से जुड़े अन्य खर्च भी इसी में शामिल हैं।
वित्तीय संकेतक और दक्षता
आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का घाटा उसके परिचालन राजस्व से करीब 14 गुना अधिक रहा। परिचालन राजस्व का प्रत्येक ₹1 कमाने के लिए कंपनी ने लगभग ₹15.92 खर्च किए।
तेज़ी से कारोबार बढ़ाने के दबाव का असर अन्य वित्तीय संकेतकों पर भी पड़ा। कंपनी ने नियोजित पूँजी पर -58.45% का नकारात्मक रिटर्न (आरओसीई) और -1,481.63% का ईबीआईटीडीए मार्जिन दर्ज किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत का क्विक-कॉमर्स और ऑन-डिमांड होम-सर्विस क्षेत्र तेज़ी से प्रतिस्पर्धी बन रहा है।
फंडिंग और निवेशक समर्थन
भारी घाटे के बावजूद स्नैबिट निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में सफल रही है। कंपनी ने अब तक 11.2 करोड़ डॉलर (लगभग $112 मिलियन) से अधिक की पूँजी जुटाई है। इसमें $56 मिलियन का सीरीज डी फंडिंग राउंड शामिल है, जिसमें सुशेहन्ना वीसी, मिराए एसेट वेंचर इन्वेस्टमेंट्स और बर्टेल्समैन इंडिया इन्वेस्टमेंट्स ने भाग लिया।
परिचालन प्रगति और आगे की राह
कंपनी के अनुसार, सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। स्नैबिट ने एक दिन में 1.15 लाख से अधिक सेवाएँ पूरी करने का आँकड़ा पार किया और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घरेलू सहायकों से जुड़ी 40 लाख सेवाएँ पूरी कीं। इकाई अर्थशास्त्र में भी सुधार के संकेत दिखे — प्रति सेवा खर्च किया गया अतिरिक्त पैसा पिछली तिमाही की तुलना में ₹100 से अधिक घटकर ₹250 से नीचे आ गया। आगे यह देखना अहम होगा कि कंपनी इस घाटे की रफ्तार को नियंत्रित करते हुए स्केल हासिल कर पाती है या नहीं।