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स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में घाटा 29 गुना उछलकर ₹167.8 करोड़, राजस्व 46 गुना बढ़ा

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स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में घाटा 29 गुना उछलकर ₹167.8 करोड़, राजस्व 46 गुना बढ़ा

सारांश

स्नैबिट का घाटा एक साल में ₹5.7 करोड़ से ₹167.8 करोड़ हो गया — करीब 29 गुना उछाल। राजस्व 46 गुना बढ़ा, लेकिन हर ₹1 कमाने पर ₹15.92 खर्च। यह भारत के ऑन-डिमांड होम-सर्विस सेक्टर की 'ग्रोथ बनाम लाभप्रदता' की बड़ी जंग की झलक है।

मुख्य बातें

स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में शुद्ध घाटा करीब 29 गुना बढ़कर ₹167.8 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष ₹5.7 करोड़ था।
परिचालन राजस्व 46 गुना उछलकर ₹12.2 करोड़ पर पहुँचा; मुख्य प्लेटफॉर्म सेवाओं से 88% आय।
कुल खर्च ₹6.8 करोड़ से बढ़कर ₹194.8 करोड़ हुआ; मार्केटिंग पर अकेले ₹48.7 करोड़ व्यय।
₹1 राजस्व के लिए ₹15.92 खर्च; आरओसीई -58.45% और ईबीआईटीडीए मार्जिन -1,481.63% ।
कंपनी अब तक $112 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटा चुकी है, जिसमें $56 मिलियन का सीरीज डी राउंड शामिल।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 40 लाख सेवाएँ पूरी; प्रति सेवा अतिरिक्त खर्च ₹250 से नीचे।

इंस्टेंट हाउसहेल्प स्टार्टअप स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में शुद्ध घाटा करीब 29 गुना बढ़कर ₹167.8 करोड़ पर पहुँच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह घाटा मात्र ₹5.7 करोड़ था। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) से प्राप्त वित्तीय आँकड़ों के अनुसार, यह उछाल सेवा नेटवर्क के आक्रामक विस्तार और नए ग्राहकों को जोड़ने पर किए गए भारी निवेश का नतीजा है। हालाँकि, इसी अवधि में कंपनी का परिचालन राजस्व भी 46 गुना बढ़कर ₹12.2 करोड़ हो गया।

कंपनी की पृष्ठभूमि और कारोबारी मॉडल

आयुष अग्रवाल द्वारा 2024 में स्थापित स्नैबिट सफाई, बर्तन धोने और कपड़े धोने जैसी घरेलू सेवाएँ माँग के आधार पर उपलब्ध कराती है। कंपनी प्रशिक्षित पेशेवरों के नेटवर्क के ज़रिए 10 मिनट के भीतर सेवा पहुँचाने का दावा करती है।

राजस्व की संरचना पर नज़र डालें तो मुख्य प्लेटफॉर्म सेवाओं से कंपनी को ₹10.82 करोड़ की आय हुई, जो कुल परिचालन राजस्व का लगभग 88% है। शेष आय यूनिफॉर्म की बिक्री से प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त, मुख्यतः बैंक जमा पर ब्याज से ₹14.76 करोड़ की अन्य आय भी दर्ज की गई।

खर्चों का विवरण

स्टार्टअप की आक्रामक विस्तार रणनीति का सबसे स्पष्ट असर उसके खर्चों में दिखा। वित्त वर्ष 2026 में कुल खर्च बढ़कर ₹194.8 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले केवल ₹6.8 करोड़ था।

इनमें विशेषज्ञ सेवाओं पर ₹63 करोड़, मार्केटिंग पर ₹48.7 करोड़, कर्मचारियों से जुड़े खर्च ₹46 करोड़ और सेवाएँ पूरी करने पर ₹23.8 करोड़ शामिल हैं। भर्ती, कमीशन, कानूनी सेवाओं, सॉफ्टवेयर रखरखाव और प्रशासन से जुड़े अन्य खर्च भी इसी में शामिल हैं।

वित्तीय संकेतक और दक्षता

आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का घाटा उसके परिचालन राजस्व से करीब 14 गुना अधिक रहा। परिचालन राजस्व का प्रत्येक ₹1 कमाने के लिए कंपनी ने लगभग ₹15.92 खर्च किए।

तेज़ी से कारोबार बढ़ाने के दबाव का असर अन्य वित्तीय संकेतकों पर भी पड़ा। कंपनी ने नियोजित पूँजी पर -58.45% का नकारात्मक रिटर्न (आरओसीई) और -1,481.63% का ईबीआईटीडीए मार्जिन दर्ज किया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत का क्विक-कॉमर्स और ऑन-डिमांड होम-सर्विस क्षेत्र तेज़ी से प्रतिस्पर्धी बन रहा है।

फंडिंग और निवेशक समर्थन

भारी घाटे के बावजूद स्नैबिट निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में सफल रही है। कंपनी ने अब तक 11.2 करोड़ डॉलर (लगभग $112 मिलियन) से अधिक की पूँजी जुटाई है। इसमें $56 मिलियन का सीरीज डी फंडिंग राउंड शामिल है, जिसमें सुशेहन्ना वीसी, मिराए एसेट वेंचर इन्वेस्टमेंट्स और बर्टेल्समैन इंडिया इन्वेस्टमेंट्स ने भाग लिया।

परिचालन प्रगति और आगे की राह

कंपनी के अनुसार, सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। स्नैबिट ने एक दिन में 1.15 लाख से अधिक सेवाएँ पूरी करने का आँकड़ा पार किया और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घरेलू सहायकों से जुड़ी 40 लाख सेवाएँ पूरी कीं। इकाई अर्थशास्त्र में भी सुधार के संकेत दिखे — प्रति सेवा खर्च किया गया अतिरिक्त पैसा पिछली तिमाही की तुलना में ₹100 से अधिक घटकर ₹250 से नीचे आ गया। आगे यह देखना अहम होगा कि कंपनी इस घाटे की रफ्तार को नियंत्रित करते हुए स्केल हासिल कर पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निवेशकों का असली इम्तहान तब होगा जब यह खर्च-अनुपात घटने की रफ्तार को मापा जाएगा। प्रति सेवा अतिरिक्त खर्च में ₹100 की कमी उत्साहजनक है, पर -1,481% का ईबीआईटीडीए मार्जिन बताता है कि लाभप्रदता अभी भी दूर के क्षितिज पर है। $112 मिलियन की फंडिंग एक मज़बूत रनवे देती है, लेकिन अगले एक-दो राउंड में बाज़ार को ठोस यूनिट इकोनॉमिक्स देखनी होगी — वरना 'घर-घर सेवा' का यह सपना भी फंडिंग-ड्रिवन मृगतृष्णा बन सकता है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में घाटा कितना रहा?
आरओसी के आँकड़ों के अनुसार, स्नैबिट का वित्त वर्ष 2026 में शुद्ध घाटा ₹167.8 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के ₹5.7 करोड़ की तुलना में करीब 29 गुना अधिक है। यह उछाल मुख्यतः सेवा नेटवर्क विस्तार और मार्केटिंग पर भारी खर्च के कारण आया।
स्नैबिट क्या है और इसकी सेवाएँ क्या हैं?
स्नैबिट एक ऑन-डिमांड हाउसहेल्प स्टार्टअप है, जिसे आयुष अग्रवाल ने 2024 में स्थापित किया। यह सफाई, बर्तन धोने और कपड़े धोने जैसी घरेलू सेवाएँ प्रशिक्षित पेशेवरों के नेटवर्क के ज़रिए 10 मिनट के भीतर उपलब्ध कराने का दावा करती है।
स्नैबिट ने अब तक कितनी फंडिंग जुटाई है?
स्नैबिट ने अब तक $112 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है। इसमें $56 मिलियन का सीरीज डी राउंड शामिल है, जिसमें सुशेहन्ना वीसी, मिराए एसेट वेंचर इन्वेस्टमेंट्स और बर्टेल्समैन इंडिया इन्वेस्टमेंट्स ने निवेश किया।
स्नैबिट के राजस्व की संरचना कैसी है?
वित्त वर्ष 2026 में स्नैबिट का परिचालन राजस्व ₹12.2 करोड़ रहा, जिसमें से ₹10.82 करोड़ (88%) मुख्य प्लेटफॉर्म सेवाओं से और शेष यूनिफॉर्म बिक्री से आया। बैंक जमा पर ब्याज सहित अन्य स्रोतों से ₹14.76 करोड़ की अतिरिक्त आय भी हुई।
स्नैबिट के परिचालन में सुधार के क्या संकेत हैं?
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 40 लाख सेवाएँ पूरी की गईं और एक दिन में 1.15 लाख से अधिक सेवाओं का रिकॉर्ड बना। साथ ही प्रति सेवा अतिरिक्त खर्च ₹100 से अधिक घटकर ₹250 से नीचे आ गया, जो इकाई अर्थशास्त्र में क्रमिक सुधार का संकेत देता है।
राष्ट्र प्रेस
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