क्या एसएंडपी ने भारत के दिवालियापन ढांचे को अपग्रेड किया है?

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क्या एसएंडपी ने भारत के दिवालियापन ढांचे को अपग्रेड किया है?

सारांश

भारत के दिवालियापन ढांचे में सुधार की दिशा में एसएंडपी का यह कदम महत्वपूर्ण है। यह अपग्रेड क्रेडिटर सुरक्षा और आईबीसी की प्रभावशीलता को दर्शाता है। जानें इसके पीछे के कारण और इसके आर्थिक प्रभाव क्या हो सकते हैं।

मुख्य बातें

एसएंडपी ने भारत के दिवालियापन ढांचे को ग्रुप बी में अपग्रेड किया।
आईबीसी ने क्रेडिटर सुरक्षा को मजबूत किया है।
रिकवरी दर 30% से ऊपर पहुंच गई है।
खराब लोन को सुलझाने का समय घटकर दो साल हो गया है।
भारत का इन्सॉल्वेंसी सिस्टम वैश्विक मानकों से पीछे है।

नई दिल्ली, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत के दिवालियापन ढांचे को ग्रुप सी से ग्रुप बी में अपग्रेड किया है। इसका मुख्य कारण दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत मजबूत क्रेडिटर सुरक्षा और कुशलता है।

यह सुधार उस समय आया है जब हाल ही में एसएंडपी ने भारत की "क्रेडिटर मित्रता" स्कोर को कमजोर से मध्यम में अपग्रेड किया है। यह स्कोर क्रेडिटर-संचालित समाधानों के ट्रैक रिकॉर्ड को दर्शाता है।

रेटिंग एजेंसी ने उल्लेख किया कि हाल के मामलों में उच्च रिकवरी दर और समयबद्धता में वृद्धि के कारण सिस्टम पर विश्वास बढ़ा है।

एसएंडपी ने कहा कि उनके विचार में आईबीसी ने क्रेडिट अनुशासन को मजबूत किया है और रेजोल्यूशन प्रोसेस को क्रेडिटर्स के पक्ष में कर दिया है, जिससे प्रमोटर्स को अपने व्यवसाय पर नियंत्रण खोने का जोखिम हो सकता है, जबकि पहले के रेजोल्यूशन सिस्टम में ऐसा नहीं होता था।

रिपोर्ट में बताया गया कि प्री-आईबीसी रिजीम में रिकवरी 15-20 प्रतिशत के करीब थी, जबकि अब यह 30 प्रतिशत से ऊपर है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खराब लोन को सुलझाने का औसत समय तेजी से घटकर लगभग दो साल हो गया है, जो पहले छह से आठ साल था।

इस प्रगति को देखते हुए, रेटिंग एजेंसी ने चेतावनी दी कि भारत का इन्सॉल्वेंसी सिस्टम अभी भी ग्रुप ए में अधिक परिपक्व सिस्टम और ग्रुप बी के कुछ क्षेत्रों से पीछे है।

रेटिंग एजेंसी ने बताया कि वैश्विक मानकों के अनुसार ओवरऑल रिकवरी रेट मामूली बनी हुई है और विभिन्न क्षेत्रों में काफी भिन्नताएँ हैं, जिसमें स्टील और पावर जैसी एसेट-हैवी इंडस्ट्री बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

एसएंडपी ने संरचनात्मक चिंताओं पर भी ध्यान दिया और कहा कि सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड क्रेडिटर एक ही श्रेणी में एक साथ वोट करते हैं, जिससे अनसिक्योर्ड कर्ज के बड़े होने पर सिक्योर्ड लेंडर्स का प्रभाव कम हो सकता है।

एसएंडपी ने बताया कि गलत परिणामों को रोकने के लिए विकसित की गई विधियों पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हम अभी भी वैश्विक मानकों से पीछे हैं। हमें और अधिक सुधार की आवश्यकता है ताकि क्रेडिटर्स और प्रमोटर्स के हितों का संतुलन बना रह सके।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का दिवालियापन ढांचा क्या है?
भारत का दिवालियापन ढांचा एक कानूनी प्रणाली है जो दिवालिया कंपनियों और व्यक्तियों के मामलों को संभालती है।
एसएंडपी की रिपोर्ट का महत्व क्या है?
एसएंडपी की रिपोर्ट निवेशकों और बाजार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आर्थिक स्वास्थ्य का आकलन करती है।
क्रेडिटर सुरक्षा का क्या अर्थ है?
क्रेडिटर सुरक्षा का अर्थ है कि कर्ज देने वालों को उनके निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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