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क्या सुकन्या समृद्धि योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के 11 वर्ष पूरे हुए?

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क्या सुकन्या समृद्धि योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के 11 वर्ष पूरे हुए?

सारांश

सुकन्या समृद्धि योजना की 11वीं वर्षगांठ पर जानिए कैसे यह बालिकाओं के sashaktikaran में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और आत्मविश्वास में वृद्धि कर रही है।

मुख्य बातें

सुकन्या समृद्धि योजना का उद्देश्य बालिकाओं का sashaktikaran है।
इसमें आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाता है।
ब्याज दर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत है।
खाता खोलने की प्रक्रिया सरल और सुरक्षित है।
4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) का आज 11वां वर्ष पूरा हो गया है। केंद्र सरकार की यह योजना बालिकाओं के सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसने न केवल बालिकाओं के लिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण किया है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी जगाया है।

एसएसवाई की शुरुआत बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत 22 जनवरी 2015 को हुई थी। यह एक कम जोखिम वाली जमा योजना है, जिसमें सरकार मूलधन की गारंटी देती है और ब्याज का भुगतान निर्धारित दरों के अनुसार हर तिमाही किया जाता है।

इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करना है। यह पहल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है और भविष्य में आत्मनिर्भरता की दिशा में मदद करती है।

वर्तमान में, सुकन्या समृद्धि योजना के तहत ब्याज दर 8.2 प्रतिशत है।

एसएसवाई के अंतर्गत, माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपनी बालिका के लिए किसी भी भारतीय डाकघर या किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और अधिकृत निजी क्षेत्र के बैंकों (जैसे एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक) में खाता खोल सकते हैं। यह खाता बालिका के जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक कभी भी खोला जा सकता है।

एक बालिका का केवल एक ही एसएसवाई खाता खोला जा सकता है और एक परिवार अधिकतम दो बालिकाओं के लिए खाते खोल सकता है। हालांकि, जुड़वां या तीन जुड़वां बच्चों के मामले में, संबंधित जन्म प्रमाण पत्र के साथ शपथ पत्र जमा करने पर दो से अधिक खाते खोलने की अनुमति है। यह खाता भारत में किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है।

इस योजना की विशेषता यह है कि जब तक बालिका 18 वर्ष की नहीं हो जाती, तब तक खाता माता-पिता/अभिभावक द्वारा संचालित होता है। इससे अभिभावक बचत की निगरानी कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि धनराशि का उपयोग बालिका की शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए सही तरीके से किया जा रहा है। 18 वर्ष की आयु होने पर, खाताधारक आवश्यक दस्तावेज जमा करके स्वयं खाते का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।

सरकार के अनुसार, अब तक देश में 4.53 करोड़ एसएसवाई खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें कुल 3.33 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा है।

इसके अलावा, 22 जनवरी 2015 को ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को सुरक्षित करना, उनके प्रति होने वाले भेदभाव को समाप्त करना और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत लिंगानुपात में सुधार, बालिकाओं के विद्यालय में नामांकन को बढ़ाना तथा समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना शामिल है।

यह योजना महिला एवं बाल विकास, शिक्षा तथा स्वास्थ्य मंत्रालयों के सहयोग से चलायी जाती है और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित करती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुकन्या समृद्धि योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करना है।
एसएसवाई के तहत खाता कैसे खोला जा सकता है?
माता-पिता या कानूनी अभिभावक किसी भी भारतीय डाकघर या अधिकृत बैंक में खाता खोल सकते हैं।
एक परिवार के लिए अधिकतम कितने खाते खोले जा सकते हैं?
एक परिवार अधिकतम दो बालिकाओं के लिए खाते खोल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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