महिला MSME: देश में 3.69 करोड़ उद्यम महिलाओं के नाम, श्रम भागीदारी दर 40% तक पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में महिला उद्यमिता और रोज़गार भागीदारी में उल्लेखनीय उछाल आया है — 3.69 करोड़ पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) अब महिलाओं के स्वामित्व में हैं, जो कुल पंजीकृत MSME का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा है। 15 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई। इसके साथ ही 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) वर्ष 2017-18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत पर पहुँच गई है।
महिला उद्यमिता के प्रमुख आंकड़े
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, देश के 1.07 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। ये स्टार्टअप कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के लगभग 48 प्रतिशत हैं — यह आँकड़ा भारतीय स्टार्टअप परितंत्र में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व भूमिका को रेखांकित करता है।
महिला वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) 2017-18 में 22 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 38.8 प्रतिशत हो गया। इस वर्ष 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 20 करोड़ महिलाएं रोज़गार में थीं।
विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी
फैक्टशीट में बताया गया है कि जुलाई 2026 तक मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र के प्रत्यक्ष कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत तक पहुँच गई है। वहीं, पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में सृजित कुल कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत रही है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के केंद्र में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है — महिलाओं की यह भागीदारी देश की औद्योगिक रणनीति को एक नई सामाजिक दिशा देती है।
सरकारी योजनाओं की भूमिका
यशस्विनी अभियान के तहत जुलाई 2026 तक 22 लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले MSME का उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण कराया जा चुका है। इस अभियान का लक्ष्य 2029 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर लैंगिक समानता हासिल करना है।
स्वावलंबन योजना के अंतर्गत युवा महिलाओं को बिजनेस आइडिया से लेकर उद्यम की स्थापना तक उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाज़ार संबंधी मार्गदर्शन और कानूनी सहयोग प्रदान किया जाता है। चयनित प्रतिभागियों को टिकाऊ उद्यम विकसित करने के लिए 21 सप्ताह तक मेंटरशिप और हैंडहोल्डिंग सहायता भी दी जाती है।
सार्वजनिक खरीद और वित्तीय समावेश
वित्त वर्ष 2025-26 में महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) से कुल सार्वजनिक खरीद 3.8 प्रतिशत रही, जो सरकार के 3 प्रतिशत के निर्धारित सार्वजनिक खरीद लक्ष्य से अधिक है। फैक्टशीट के अनुसार, औपचारिक मान्यता, वित्तीय सहायता और बाज़ार तक पहुँच, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को और मज़बूत बनाने के प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं।
यह व्यापक बदलाव महिलाओं को सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा और औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी प्रदान करने वाली नीतियों के माध्यम से संभव हो रहा है। आने वाले वर्षों में इन आंकड़ों की निरंतरता और गुणवत्ता, भारत की समावेशी आर्थिक वृद्धि की असली परीक्षा होगी।