यस बैंक शेयर 2.21% फिसला: सुप्रीम कोर्ट के AT-1 बॉन्ड फैसले के बाद ब्रोकरेज सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
यस बैंक के शेयर शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 2.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹17.72 पर आ गए। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ₹8,415 करोड़ के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड के राइट-ऑफ को रद्द करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने इस बैंक को लेकर सतर्क रुख अपना लिया है। इस फैसले के चलते बैंक की पूंजी संरचना और बुक वैल्यू पर गंभीर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला और पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय ने यस बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया जो बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 जनवरी 2023 के आदेश के विरुद्ध दायर की गई थीं। हाई कोर्ट ने अपने उस फैसले में AT-1 बॉन्ड के राइट-डाउन को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था।
गौरतलब है कि ये AT-1 बॉन्ड मार्च 2020 में यस बैंक के बेलआउट और पुनरुद्धार प्रक्रिया के दौरान खत्म कर दिए गए थे। उस समय RBI की अगुवाई में बैंक को डूबने से बचाने के लिए SBI सहित अन्य संस्थाओं ने पूंजी निवेश किया था। अब शीर्ष अदालत के इस फैसले ने उस पूरी प्रक्रिया के एक अहम हिस्से को पलट दिया है।
ब्रोकरेज फर्मों की प्रतिक्रिया
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी (Citi) के विश्लेषकों ने यस बैंक पर अपनी 'बिकवाली' (Sell) रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस घटाकर ₹17.50 कर दिया है। फर्म ने चेतावनी दी है कि AT-1 बॉन्ड राइट-डाउन पलटने से पूंजी से जुड़ी गंभीर चिंताएँ फिर उभर आई हैं।
इसी क्रम में मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भी अपनी 'अंडरवेट' (Underweight) रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस ₹17 तय किया है। दोनों प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों का यह एकसाथ सतर्क रुख बाज़ार में भारी बिकवाली की वजह बना।
पूंजी और बुक वैल्यू पर संभावित असर
सिटी के अनुमान के अनुसार, इस फैसले के परिणामस्वरूप यस बैंक के कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) कैपिटल रेशियो में 250 आधार अंक की कमी आ सकती है, जिससे यह घटकर 11.5 प्रतिशत पर आ सकता है। यह अनुमान केवल मूल राशि पर आधारित है और इसमें कूपन भुगतान को स्वैच्छिक एवं नॉन-क्यूमुलेटिव माना गया है।
इसके अलावा, ब्रोकरेज का अनुमान है कि इस संभावित देनदारी से बैंक की बुक वैल्यू 13-14 प्रतिशत तक घट सकती है। इस स्थिति में कैपिटल बफर को बहाल करने के लिए बैंक को बाज़ार से अतिरिक्त पूंजी जुटाने की ज़रूरत पड़ सकती है, जो शेयरधारकों के लिए और कमज़ोरी का संकेत है।
अंतिम असर कितना होगा
विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे कैसे लागू किया जाता है और बकाया बॉन्ड के साथ क्या व्यवहार किया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब यस बैंक पिछले कुछ वर्षों से अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहा है और बाज़ार में विश्वसनीयता फिर से हासिल करने की दिशा में काम कर रहा था।
आने वाले दिनों में बैंक प्रबंधन, RBI और सरकार की ओर से इस फैसले के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टीकरण बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।